बैतूल
Betul News : बैतूलबाजार के रहवासियों को भूमि स्वामी अधिकार पत्र प्रदान करने की मांग
Betul News : Demand to provide land owner rights letter to the residents of Betulbazar

– प्रशासन द्वारा धारणाधिकार के तहत पट्टा देने से उपज रहा आक्रोश
– नगर परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित पार्षदों ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा
Betul News : बैतूल। जिले के सबसे प्राचीन नगर बैतूल बाजार के रहवासियों के पास काबिज भूमि का अधिकार पत्र आज तक नही है। नजूल घोषित करने के बाद से आज तक जांच के नाम पर भूमि स्वामी का अधिकार नहीं दिया जा सका है। सरकार ने भू अधिकार पत्र प्रदान करने की घोषणा की है जिसके बाद प्रशासन द्वारा भूमि स्वामी अधिकार पत्र देने की बजाय धारण अधिकार के तहत पट्टा प्रदान किया जा रहा है। इस पट्टे के आधार पर ना तो लोग भूमि स्वामी बन पाएंगे और ना ही किसी बैंक से कर्ज ही लेने के लिए पात्र होंगे। प्रशासन की इस कारवाई को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
शनिवार को बीजेपी के जिला महामंत्री सुधाकर पवार के नेतृत्व में बैतूल बाजार नगर परिषद के जन प्रतिनिधियों ने कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस को राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि बैतूल बाजार के रहवासियों को भूमि स्वामी अधिकार पत्र प्रदान किए जाएं। पूर्व में दो वार्डों में नजूल जांच के बाद भूमि स्वामी अधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं और उनका पंजीयन भी किया गया है।
नगर परिषद अध्यक्ष दुर्गावती वर्मा, उपाध्यक्ष सुरेश गायकवाड़, पार्षद विजेश वर्मा, नीतू राठौर, पूनम सुनील परिहार, विजय पानकर, दिव्या मयंक वर्मा, विनीत बारमासे, राजेंद्र पवार, पूजा भूपेंद्र पवार, सुनीता पंडिया, वंदना राजेश धुर्वे, सांसद प्रतिनिधि अनूप वर्मा, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष संजय वर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष विनंती सायरे, बीजेपी के मंडल अध्यक्ष सुनील पवार के द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बैतूलबाजार नगरीय क्षेत्र में धारणाधिकार 2021-22 के अंतर्गत दिए जा रहे

पटटे पर आपत्ति जताई गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि बैतूलबाजार नगरीय क्षेत्र में धारणाधिकार के अंतर्गत कंडिका 3.4 (आठ) के अंतर्गत नजूल भूमि का स्थाई पट्टे प्रदान करने में त्रुटियां हैं।
बैतूलबाजार प्राचीन जिला मुख्यालय था। सैकड़ों साल से पुरानी प्रचलित आबादी का नगर है। नगर के सभी मकान सैकडो साल पुराने है। जब प्रशासन सरकार नहीं थी नजूल भी नहीं था तब भी यहां आबादी मे घर बने थे। बहुत से मकान सैकडो साल पुराने आज भी बने हुए है। जो पुरानी बस्ती होने का प्रमाण है।
शासन के 24 सितंबर 2020 के आदेश में स्पष्ट है कि नगरीय निकाय के गठन अथवा विस्तारण के समय जो भू भाग नगरीय क्षेत्र में दर्ज था उस भू भाग के भूमि स्वामी के उत्तराधिकारी अथवा उत्तरवर्ती अंतरिती की वे उक्त प्रावधान के अनुसार भूमि स्वामी रहे है। ऐसे अधिभोगी को अधिभोग के समस्त भूखण्ड के भूमिस्वामी अधिकार पत्र प्रदत्त किए जाए।
इस आदेश के बिंदू 32 मे दिए गए नियम के अनुसार बैतूलबाजार नगर के आसपास की शासकीय भूमि जो राजस्व विभाग में पटवारी के रिकार्ड में दर्ज है। जिसमें पुलिस थाना स्वास्थ विभाग तथा विद्युत विभाग पशु चिकित्सालय को भूमि दी है। इसके बाद बची शेष भूमि शासकीय भूमि में पूर्व मे ही पटटे बांटे जा चुके है। इस भूमि को छोड़कर बैतूलबाजार मे वर्तमान में कोई भी शासकीय भूमि नहीं है। सैकडो साल पुरानी प्रचलित आबादी वाले नगर में मकान / भूखण्ड नगर पालिका के गठन के पहले से ही बने हुए हैं। जिन पर लोग पीढ़ी दर पीढ़ी काबिज है।
किन्तु इस भूमि को शासकीय भूमि का दर्जा देकर जो पटटे दिए जा रहे हैं। उस पर शीर्षक में ही लिखा है कि नगरीय क्षेत्रों की शासकीय भूमियों में के धारकों के धारणाधिकार के लिए कंडिका 3.4 (आठ) के अंतर्गत नजूल भूमि का स्थाई पटटा यह पूर्णतः आपत्ति जनक है। हमारी कई पीढियो से पुरानी जमीन एवं मकान को एक झटके में सरकार के एक आदेश से शासकीय भूमि हो गई यह घोर आपत्तिजनक है इसका जनता घोर विरोध कर रही है
बैतूलबाजार नगर में नजूल घोषित होने के बाद सन 1984-85 में दो वार्डो में नजूल पट्टे भी वितरित किए हैं। उनका पंजीयन भी किया गया है। बाकि वार्डो की नजूल जाच पेडिंग रही है। फिर प्रशासन ने पुरानी पेंडिंग नजूल जॉच को दबा दिया और धारणाधिकार का नया कानून बैतूलबाजार की जनता पर थोप दिया है। जब बैतूलबाजार में नजूल पटटे सन 1984-85 में दो वार्डो में बांट दिए गए है तो शेष वार्डो में भी उसी श्रृंखला के नजूल पटटे क्यों नहीं दिए जा रहे है।
प्रारूप ध के धारणाधिकार नजूल पटटे की सामान्य शर्त क्रमांक (7) (क) (ख) में दिया गया है कि इस पटटे की भूमि को पटटेदार बेच नही सकता इस पर लोन भी नहीं मिलता। बैंक इस पटटे की भूमि का भूमिस्वामी सरकार / राज्यपाल महोदय को मान रही है। हमारी खानदानी भूमि मकान पर हमारा अधिकार नही रहा। सरकार पटटे ऐसे दे रही है जैसे सरकारी जमीन पर लोग अतिक्रमण कर मकान बना लेते है बाद में उन्हे पटटे दिए जाते हैं।
भूमि इस धारणाधिकार पटटे पर किसी भी प्रकार का ऋण इत्यादि नही मिल रहा है। तथा कलेक्टर कार्यालय इसे रजिस्टर्ड कराकर भी नही दे रहे है। आपसे सादर अनुरोध है कि बैतूल जिले के बैतूलबाजार नगर में धारणाधिकार के तहत नजूल के पटटे भूमि स्वामी अधिकार पत्र या नजूल जॉच वाला रजिस्टर्ड नजूल पटटा देने की कृपा करें।

लोगों से मांगा जा रहा राजस्व का रिकार्ड:
ज्ञापन में इस बात पर भी आपत्ति जताई गई है कि प्रशासन द्वारा बैतूल बाजार के लोगों से राजस्व का रिकार्ड मांगा जा रहा है। धारणाधिकार आदेश के बिन्दू 3.2 नगरीय निकाय के गठन के समय या पूर्व के संपत्ति या नगर के प्रमाण मांगने की बात जनता को मंजूर नहीं है क्योकि प्रमाण राजस्व विभाग के पास होना चाहिए या नगरीय निकाय के पास होना चाहिए। जनता के पास इतने वर्षो पुराना प्रमाण कहा से उपलब्ध होगा। इस बिंदू का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि नगर और नगर के लोग सैकड़ों साल से काबिज हैं।



