Indore News: धार्मिक कायदों पर भारी सत्ता के धुरंधर
Indore News: Power-hungry people overpower religious rules
Indore News: पिछले दिनों सतीश भाऊ के खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर काफी हंगामा मचा। मीडिया में, अखबारों में मामला खूब उछला, खूब छपा. खजराना थाने में सतीश भाऊ के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ एवं आखिरकार सतीश भाऊ ने पत्नी सहित थाने थाने में सरेंडर किया।

जितनी तत्परता प्रशासन ने ,पुलिस ने इस मामले में दिखाई है ठीक भी है..नियमों का पालन होना चाहिए। लेकिन, जब मामला नेताओं , नेता पुत्रों या उनके परिजनों से जुड़ा होता है जब वे बिना अनुमति धौंस दिखाकर गर्भगृह में प्रवेश कर जाता है तो प्रशासन की तत्परता एवं पुलिसिया कार्यवाही को लकवा मार जाता है।
Indore News: विधायक पुत्र व पुत्रवधु पर क्या कार्यवाही हुई ?
चलिए अब आपको थोड़ा पीछे ले चलते है। ज्यादा समय नहीं बीता है जब इंदौर विधानसभा क्रमांक 3 के विधायक जो खुद को सनातनी विधायक के तौर पर प्रचारित करते है…के पुत्र का विवाह हुआ था..तब विधायक पुत्र एवं उनकी पुत्रवधु खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में गए थे।

मामला सोशल मीडिया पर चला भी…विधायक गोलू शुक्ला ने हमेशा की तरह उनके बच्चों को सही ठहराया ( मीडिया में बयान देकर ) लेकिन इंदौर का प्रशासन एवं संबंधित खजराना थाने का प्रशासन शायद सत्ता पक्ष के विधायक के परिजनों द्वारा गर्भगृह में प्रवेश पर कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए…या इन अधिकारियों की इन पर कोई कार्यवाही करने में सांसे फूल रही थी।
Indore News: जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष गए गर्भगृह में
इसी कड़ी में एक नाम और ले तो हेमंत खंडेलवाल का भी लें। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद इंदौर आकर हेमंत खंडेलवाल भी खजराना गणेश मंदिर में गर्भगृह में गए थे..तब तो खैर प्रशासन से कुछ कार्यवाही की उम्मीद ही छोड़ दो।

Indore News: आए दिन विवादों में रहने वाले रुद्राक्ष शुक्ला भी गए थे गर्भगृह में
आए दिन विवाद में रहने वाले सनातनी विधायक गोलू शुक्ला के पुत्र रुद्राक्ष शुक्ला का भी जिक्र करना हम यहां कैसे भूल सकते है..कभी महाकाल मंदिर के गर्भगृह में, कभी देवास टेकरी मामले में विवाद में रहने वाले रुद्राक्ष गोलू शुक्ला भी खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में गए थे…लेकिन नतीजा वही…सिफर…क्योंकि नेता पुत्र जो ठहरे..इसलिए प्रशासन का नियम और पुलिस की कार्यवाही का तो उन पर भी सवाल ही नहीं उठता है.

Indore News: राजनीतिक रसूख के आगे क्यों भीगी बिल्ली बन जाता है प्रशासन
सवाल सीधा है :– क्या कानून और मंदिर के नियम केवल आम नागरिकों के लिए ही बने हैं? क्या रसूख और सत्ता के सामने प्रशासन की सख्ती दम तोड़ देती है? यदि सतीश भाऊ के मामले में 48 घंटे में कार्रवाई हो सकती है, तो फिर विधायक पुत्रों और बड़े नेताओं के मामलों में चुप्पी क्यों?
खजराना गणेश मंदिर आस्था का केंद्र है, किसी की निजी जागीर नहीं। यदि प्रशासन के अधिकारियों में, कलेक्टर में नियम का पालन करवाने की हिम्मत ही ना हो तो फिर क्या मतलब है ऐसे नियमों का ?
Indore News: बात सीधी है कि नियम सबके लिए समान होने चाहिए चाहे वह आम श्रद्धालु हो या सत्ता का सरताज। वरना यह संदेश जाएगा कि कानून की धार भी चेहरे देखकर चलती है। प्रशासन से निष्पक्षता की उम्मीद तो खैर इस मामले में है ही नहीं और ये भी तय है कि यह मामला भी राजनीतिक सुविधानुसार ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
____________________________
इसी प्रकार की जानकारी और समाचार पाना चाहते हैं तो,हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़े व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए “कृपया यहां क्लिक” करे।
साथ ही हमारे इंस्टाग्राम के जुड़ने के लिए यहां “क्लिक करें“


