MGNREGA corruption Betul: मनरेगा के निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के आरोप, जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
MGNREGA corruption Betul: Allegations of irregularities in MNREGA construction works, questions raised on investigation process
MGNREGA corruption Betul: जनपद पंचायत आठनेर में ग्राम पंचायत आष्टी के निर्माण कार्यों को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आवेदक विशाल भालेकर ने जनपद पंचायत आठनेर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित आवेदन देकर जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मनरेगा के तहत एक ही परिवार के सदस्यों को अलग-अलग योजनाओं का लाभ दिया गया और जांच प्रक्रिया भी पारदर्शी तरीके से नहीं की गई।

MGNREGA corruption Betul: शिकायतकर्ता को बिना सूचना पहुंची जांच टीम
आवेदन में बताया गया है कि शिकायतकर्ता को सूचना दिए बिना ही 25 जुलाई 2025 को जांच दल ग्राम पंचायत आष्टी पहुंच गया और जांच की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। शिकायत में यह भी आरोप है कि मनरेगा योजना के तहत लगभग पांच लाख रुपये की लागत से सुरेश के खेत के पास बनाया गया अर्धन डेम पहली ही बारिश में फूटकर बह गया, लेकिन जांच अधिकारियों ने कागज़ों में इस कार्य को पूर्ण दर्शा दिया।
MGNREGA corruption Betul: दूसरे निर्माण कार्य की स्थिति भी सवालों के घेरे में
इसी तरह नागोराव के खेत के पास लगभग 5.10 लाख रुपये की लागत से बनाए गए अर्धन डेम की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। शिकायत के अनुसार मौके पर अर्धन तालाब का कोई स्पष्ट अस्तित्व दिखाई नहीं देता और वहां खेती की जा रही है, इसके बावजूद रिकॉर्ड में निर्माण कार्य पूर्ण बताया गया है।

MGNREGA corruption Betul: जांच अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
मामले में जांच अधिकारी सहायक यंत्री नितेश पानकर, उपयंत्री ठाकुर और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी भरत सिंह की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि इन अधिकारियों की मिलीभगत से ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव को बचाने का प्रयास किया गया।

MGNREGA corruption Betul: प्रशासन की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जनपद पंचायत आठनेर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपने अधीनस्थ अधिकारियों, पंचायत सचिव और रोजगार सहायक को संरक्षण दे रही हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं में खर्च हुई राशि का काम जमीन पर दिखाई नहीं देता और जांच केवल कागज़ों तक सीमित रहती है तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या मामला फाइलों तक ही सीमित रह जाता है।
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