Betul Samachar : अन्ना भाऊ साठे दलित साहित्य के संस्थापक
Betul Samachar : Anna Bhau Sathe founder of Dalit literature
अन्ना भाऊ साठे की मूर्ति का हुआ अनावरण, धूमधाम से मनाई अन्ना भाऊ साठे जयंती
Betul Samachar : (बैतूल)। समस्त मांग (मातंग) समाज के तत्वावधान में लोक साहित्यकार अन्नाभाऊ साठे की 103वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। शोभा यात्रा न्यू बैतूल ग्राउंड कोठीबाजार से निकाली गई, अन्ना भाऊ साठे की मूर्ति अनावरण नागदेव मंदिर के पास टिकारी बैतूल में किया गया।
कार्यक्रम लहुजी शक्ति सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु भाऊ कस्बे, सांसद डीडी उइके, आमला विधायक डॉ.योगेश पंडाग्रे, पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल, हिंगोली विधायक ताना जी मुटकुले, नपा अध्यक्ष पार्वती बाई बारस्कर, भाजपा जिला अध्यक्ष आदित्य शुक्ला, मांग मातंग समाज के प्रदेश अध्यक्ष सदाशिव खंडारे, लहुजी शक्ति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनिल साठे, महिला मातंग समाज प्रदेश अध्यक्ष लता बाई वायराल के आतिथ्य में और समाज के अध्यक्ष एलएस तायवड़े की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में समाज के छात्र-छात्राएं जिन्होने 10वीं व 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है उन्हें स्व.महादेव राव लांगड़े की स्मृति में शील्ड व नगद पुरूस्कार देकर सम्मानित किया गया। विष्णु भाऊ कस्बे ने कहा कि एक समाज सुधारक, लोक कवि और लेखक थे। साठे का जन्म एक मांग (हिंदू) समुदाय में हुआ था। उनका लेखन सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता पर आधारित था। सांसद डीडी उइके ने कहा कि अन्ना भाऊ साठे को दलित साहित्य का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ताना जी मुटकुले ने कहा कि अन्ना भाऊ साठे का साहित्य परिवर्तन की दिशा और प्रेरणा बन गया है। महाराष्ट्र के समग्र गठन और परिवर्तन में इस साहित्य का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। आज भी बड़ी संख्या में छात्र और विद्वान उनके साहित्य पर शोध करते देखे जाते हैं। कार्यक्रम का संचालन शैलेन्द्र लोखंडे ने व आभार मधुकर देव्हारे ने व्यक्त किया।
यह थे मौजूद (Betul Samachar)
नितिन धोडक़े, अरूण हिवाड़े, राजू वैराल, बेबी बाई, संतोष मल्हार, उत्तम जाधव, संजय अवचारे, सुधाकर खड़से, अशोक फाल्के, यशवंत कामले, रामदास जौंधलेकर, संपत वाघमारे, एनडी तेलंग, सतीष जौंधलेकर, एलएल लोखंडे, अनिल वानखेड़े, संतोष वानखेड़े, देवेन्द्र लांगड़े, महेन्द्र कसारे, प्रकाश तिलंगे, योगेश खड़से, रवि खड़से, श्याम वानखेड़े, दिनेश खड़से, भगवानराव वानखेड़े, बंटी चौहान, एमडी तायवाड़े, अर्जुन वानखेड़े, मधु जाधव सहित सैंकड़ों की संख्या में जिला, प्रदेश सहित महाराष्ट्र से समाज के पदाधिकारी और स्वजातीय बंधु मौजूद थे।



