बैतूल

Betul Politics News : मैं अपना वोट आपको क्यूं दूं…?

Betul Politics News : स्वागत, सत्कार और तबला बजाने में समय खोटी कर रहे बैतूल के नेता....

Betul News : चुनाव आते ही शिवराज मामा तो सौगातों की बारिश में लगे हुए हैं कुछ योजनाएं मतदाताओं को रिझाने में कारगर भी साबित हो रही हैं, लेकिन बैतूल जिले के विकास को तब से ब्रेक लगा है जब से 2018 में कांग्रेस की सरकार प्रदेश में आई, कांग्रेस की सरकार बनी तो जिले को चार कांग्रेस विधायक और एक कैबिनेट मंत्री का पद भी मिला, लेकिन कांग्रेस की सरकार जितने समय टिकी उतने समय गुलदस्ते लेने देने का दौर चलता रहा और समय हाथ से निकल गया। कमलनाथ सरकार में दलबदलुओं के कारण सरकार गिरी और प्रदेश में फिर से भाजपा सरकार आई, लेकिन बैतूल को इसलिए कुछ हासिल नहीं हो सका क्योंकि स्थानीय एमएलए कांग्रेस से हैं और प्रदेश में भाजपा की सरकार है।

निलय भिया की 5 साल की विधायकी में क्यों थमी विकास की रफ्तार ?

बैतूल विधानसभा में पिछले पांच सालों से विधायक निलय डागा हैं। एमएलए होने के नाते बैतूल का विकास उनकी पहली प्राथमिकता में होना था, चाहे विपक्ष में रहते हुए उन्हें सरकार के खिलाफ आंदोलन करना पड़ता या अनशन पर बैठना पड़ता, लेकिन बैतूल के लिए उन्होंने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया। हाँ उनका खुद डागा फाउंडेशन है, जिसमें बच्चों की उच्च गुणवत्ता की शिक्षा ये बताती है कि वे शिक्षा के क्षत्र में जरूर काम कर रहे हैं, लेकिन विधायक रहते हुए बैतूल के लिए उनका कोई भी काम ऐसा नहीं है जो उनकी विधायकी के लिए मील का पत्थर साबित हो, क्योंकि इन पांच सालों में शहर या जिले को ऐसी कोई सौगात नहीं मिली है जिससे ऐसा लगता है कि ये पांच साल का समय बैतूल जिले के विकास को आगे ले जाने की बजाए पीछे ही कर गया। क्योंकि जिले में किसानों को परेशान देखा गया, बेरोजगारों का पलायन जारी रहा, कोई नई योजनाएं जिले को नहीं मिली। कुल मिलाकर शिक्षा, सडक़, बिजली, पानी, स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई झंडे हम इन पांच सालों में नहीं गाड़ पाए हैं, वैसे भी यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो कांग्रेस के विधायक की वहां कितनी सुनवाई होती होगी ये समझा जा सकता है।

 हेमंत भिया सांसद रहे और विधायक भी, लेकिन नतीजा सामने है

भाजपा की दूसरी सूची भी जारी हो गई, लेकिन बैतूल विधानसभा में विधायक का टिकट फाइनल नहीं हो सका। इसका सबसे बड़ा कारण बैतूल जिले की भाजपा में अंदरूनी गुटबाजी है, पहले एक समय था जब जनता के मुंह से प्रत्याशियों के नाम निकलते थे और फाइनल भी हो जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है, क्योंकि मतदाता ये जानते हैं कि कौन क्या कर पा रहा है, पिछले पांच साल तो जीरो हो ही गए उसके पहले यदि आपका कोई जिले के लिए प्लान होगा तो वो भी ठप पड़ा है, खैर जो भी हो लेकिन जनता अब ये सोच रही है कि आपको भी विधायक क्यों बनाया जाए, ऐसा आपने जिले के लिए क्या किया है, केवल खुद की पब्लिसिटी और खुदकी समाजसेवा के अलावा आपने किया ही क्या है?

– सांसद सेलब्रिटी की तरह टाइम पास कर रहे, कैबिनेट मंत्री ने भी क्या किया

अभी हाल ही में सांसद दुर्गाप्रसाद उईके का एक फोटो प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में देखने को मिला था कि वे मंदिर में तबला बजा रहे हैं और उस खबर में लिखा था कि उन्हें तबला बजाने का बचपन से शौक है, तो साहब आपको ये बता दें कि आप फिलहाल सांसद के ओहदे पर हैं और आपको अपने शौक घर में पूरे करने चाहिए बाहर तो आपको सांसद की तरह ही पेश आना है, तबला बजाने से अच्छा होता कि आप किसी विकास की बात में व्यस्त होते केंद्र तक जाते प्रदेश में बैतूल जिले के लिए कुछ प्लान लाते, लेकिन ये पांच साल आपको लगता है कि आपके शौक पूरे करने के लिए मिले हैं, ऐसा नहीं है विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव भी आ रहे हैं….।

– डेढ़ साल कैबिनेट मंत्री, और काम कुछ नहीं

बैतूल जिले से मंत्री पद तक कम ही लोग पहुंचे हैं, ये तकदीर की बात ही है कि मुलताई से सुखदेव पांसे कैबिनेट मंत्री बने लेकिन ऐसा लगता है कि जितने समय वे मंत्री रहे उतना समय केवल गुलदस्ते लेने देने में ही बीत गया और बात चली गई गनपत के हाथ, सरकार नहीं बची तो पद भी नहीं बचा उतने समय में कुछ कर देने तो जनता दुआ देती।

युवा कह रहे हैं रोजगार के लाले हैं, बिजली, पानी, सडक़ों की व्यवस्था ध्वस्त…
 नहीं रुका बेरोजगारों का पलायन

बैतूल जिले में पिछले 15-20 सालो में ऐसी कोई रोजगार के अवसर नही लाए गए जो क्षेत्र के युवा को जिले से पलायन रोक सके, और कही भी ठेला लगाना रोजगार नही होता, अपनी शिक्षा के अनुरुप उसको कार्य मिले रोजगार में आता है, यदि शहर के युवाओं को रोजगार मिल जायेगे तो, राजनीति केसे चलेगी, युवा अपने राजनेता के पीछे पीछे केसे घूमेंगे। कुल मिलाकर शिक्षा, रोजगार, विकास के नाम पर सब मटियामेट हो रहा है।

कमलेश बुंदेले,युवा बैतूल

बंद कर देना चाहिए निजी स्कूल

शिक्षा व्यवस्था बैतूल में बिल्कुल भी ठीक नहीं है बैतूल क्या पूरे प्रदेश में ही अच्छी नहीं है मेरा तो यह मानना है कि सारे प्राइवेट स्कूल बंद कर देने चाहिए और सरकारी स्कूल में सीबीएसई पैटर्न और अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई करवाना चाहिए और जितने भी सरकारी अधिकारी हंै उन्होंने अपने बच्चों को गवर्नमेंट स्कूल में पढऩा चाहिए ताकि गवर्नमेंट स्कूल के हालत और अच्छी हो सके।

नैना पाटिल, बैतूल

नेताओं के तो खुद बड़े स्कूल हैं

नही रोजगार के लिए ना कोई बड़ा प्रोजेक्ट है ना ही कोई आशा है । नेताओ के खुद के बड़े बड़े स्कूल है वो खुद नही चाहते की सरकारी स्कूल बेहतर हो खेलो में भी निजी स्कूलों के बच्चे ही आगे दिखते हैं जिले में मिडिल क्लास पर ज्यादा बोझ है। अपराधों के मामले में नए साहब आए है तब से बेहतर नजर आ रही है फिर भी पुलिस एक्ट 1862 की व्यवस्था है जिसमे जनता को सहयोग से ज्यादा डर लगता है। जनता के हित अभी कोसों दूर नजर आते हैं।

मदन मोहन चिचोली समाजसेवी

सडक़ों पर नहीं दे रहे ध्यान

रोजगार बेहाल है सब बड़े महानगरों में मजदुरी करने जाते है। सरकारी स्कूल में तो बेहतर है कही कही सुधार की जरुरत है पर प्राइवेट स्कूल फ़ीस मन मानी लेते है कई सालो में कांग्रेस विधायक ने सडक़ो पे ध्यान नहीं दिया उनके घर सामने की सडक़ में पूरे गड्डे हो गए है। पुलिस अपराधों में कोई अंकुश नहीं लगा पाई थाने में घंटो खड़े रहने के बाद भी गरीबों को रिपोर्ट नही लिखी जाती।

बंटी आरसे, समाजसेवी गौ भक्त

कमर तोड़ रही है फीस

बैतूल जिले में रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है, बैतूल के जन प्रतिनिधियों से भी किसी प्रकार की कोई उम्मीद नहीं है हमको। हम भी सरकारी स्कूल में पढ़े हैं पहले बहुत अच्छी व्यवस्था थी लेकिन अब गांव देहात में कोई भी शिक्षक पढऩे नहीं जाना चाहता सब अटैचमेंट में रहना चाहते हैं शहर में। प्राइवेट स्कूलों की फीस तो कमर तोड़ रही है। पूर्व सांसद के प्रयासों से तो पानी की व्यवस्था हो गई लेकिन सडक़ों की व्यवस्था तो बहुत जर्जर है।

चेतन यादव समाजसेवी

व्यवस्थाएं ध्वस्त हैं

रोजगार के हालात खराब हैं, सरकारी शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त है। बिजली पानी सडक़ की व्यवस्था इतनी कोई खास नहीं है। खासकर सडक़ के हाल तो बहुत ही बेहाल दिखाई देते हैं। पुलिस बल अपराधों पर अंकुश नहीं लग पा रही है लेकिन फिर भी पुलिस अपना कार्य कर रही है लेकिन कई ऐसे अपराध है जिन पर अंकुश लगा बहुत जरूरी है और पुलिस ऐसे अपराधों पर ध्यान देना चाहिए ।-

संगीता साहू, बैतूल

ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवस्थाएं नहीं

बिजली पानी सडक़ की व्यवस्था बैतूल शहर में तो बहुत अच्छी है लेकिन अगर बैतूल जिले की बात करें तो कई ऐसे ग्राम है जहां पर इन सब की कोई भी व्यवस्था इतनी कोई खास नहीं है लोग पानी में सो रहे हैं और कोई भी उन पर ध्यान नहीं दे रहा है और जिनके पति मर चुके हैं वह बेचारे बेघर होकर घूम रहे हैं। गांव में उन पर कोई ध्यान नहीं दे रहा सब बस बाहर बाहर बैतूल में ध्यान दे रहे लेकिन अगर देखे तो सबसे बड़ा वोट बैंक अगर कहीं है तो वह ग्राम में है ।

कार्तिक त्रिवेदी (विधि विद्यार्थी)

पढ़े लिखे बेरोजगार हैं

पढ़े-लिखे युवा कपड़े की दुकान में काम कर रहे है शिक्षा के हिसाब से यहां नौकरी नहीं है। पढ़ लिख कर कपड़े की दुकान में ही काम करना है तो हम बिना पढ़े ही कपड़े की दुकान में कम कर लेते। एक भी शिक्षक मेरी नजर में नहीं है जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में शिक्षा दिलाते हो। ये ही बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ा रहे तो आप शिक्षा की व्यवस्था देख सकते हैं।

धीरज पाटनकर, युवा बैतूल

Sagar Karkare

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