Betul News : अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव उन्मेश में गोंडी भाषा में किया कविता पाठ, लोक कलाकार बसंत कवडे ने बढ़ाया आदिवासी अंचल बैतूल का मान
Betul News: Poetry recitation in Gondi language at the International Literature Festival Unmesh, folk artist Basant Kavde enhanced the honor of tribal region Betul
राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू के मुख्य आतिथ्य में हुआ अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के द्वितीय संस्करण का शुभारंभ
Betul News : (बैतूल)। अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव में आदिवासी अंचल कहलाने वाले बैतूल का नाम खासा चर्चा में रहा। बैतूल जिले के लोक कलाकार बसंत कवडे ने इस साहित्य उत्सव में गोंडी भाषा में कविता पाठ करके आदिवासी अंचल बैतूल को गौरवान्वित किया।
बसंत कवडे ने बैतूल की परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने गोंडी बोली भाषा शानदार तरीके से साहित्य उत्सव के मंच पर पेश की। उल्लेखनीय है कि विगत 30 वर्षों से बसंत कवड़े आकाशवाणी दूरदर्शन पर गोंडी लोक संगीत का कार्यक्रम देते आ रहे है। कवड़े समूचे मध्यप्रदेश में पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने गोंडी लोक संगीत को दूरदर्शन पर पहुंचाने का प्रयास किया।
एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के द्वितीय संस्करण का रविंद्र भवन भोपाल में गरिमामय शुभारंभ राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू के मुख्य आतिथ्य, मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव उमा नंदूरी, संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष संध्या पुरेचा तथा साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक भी उपस्थित थे।
राष्ट्रपति ने अपने उद्बोधन में कहा कि देश और विदेश से पधारे साहित्यकारों का इस महासंग्राम में स्वागत करते है, उन्होंने कहा कि साहित्य के आदान-प्रदान से ही दुनिया में एक बेहतर समाज का निर्माण होता है जो हम सभी को श्रेष्ठ नागरिक बनने में भी सहायता करता है। साहित्य हमेशा सत्य का संवाहक होता है और साहित्य ने हमेशा मानवता को बचाने का काम किया है।
14 देशों से 103 बोली भाषाओं को जानने वाले विद्वान शामिल हुए
3 से 6 अगस्त तक चले इस साहित्य उत्सव में 14 देशों से 103 बोली भाषाओं को जानने वाले विद्वान शामिल हुए। 575 साहित्यकार लेखकों ने भाग लिया, बैतूल के बसंत कवडे गोंडी लोक गायक साहित्यकार ने गोंडी बोली भाषा में कविता पाठ किया। अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव उन्मेश में गोंडी बोली भाषा को गीत के माध्यम से पहचान दिलाने पर उन्हें इष्ट मित्र सुखनंदन आहके, नामदेव उइके, नाहर सिंह सलामे, शिवम मरकाम ने बधाई दी।



