बैतूल

Illegal Gambling in Aathner: आठनेर में फलता-फूलता जुए का साम्राज्य, सबको खबर, पुलिस बेखबर

Illegal Gambling in Aathner: A thriving gambling empire in Aathner, everyone aware, police unaware

Illegal Gambling in Aathner: बैतूल जिले में अवैध जुआ और सट्टे के कारोबार ने गहरी जड़ें जमा ली हैं। राहुल, पिंकेश और संजय जैसे शातिर जुआ संचालक खुलेआम अपनी जुएं की फड़ चला रहे हैं। इन लोगों ने अपने गुट में शामिल जुआरियों को यह भरोसा दिला रखा है कि उनकी फड़ पर पूरी सुरक्षा है और पुलिस की कोई पहुंच नहीं। जबकि पुलिस अधीक्षक बार-बार थाना प्रभारियों को अवैध गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं, लेकिन जमीनी स्थिति इन निर्देशों को खोखला साबित कर रही है।

Illegal Gambling in Aathner

Illegal Gambling in Aathner: तालाब से लेकर खेत तक जहां जगह मिले, वहीं लग जाती है जुएं की फड़

आठनेर क्षेत्र में राहुल, संजय और पिंकेश कभी तालाब किनारे तो कभी किसी परिचित के खेत में अपनी जुएं की फड़ सजाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन तीनों का नाम हर जुआरी की जुबान पर है और प्रतिदिन इनकी फड़ पर 10–15 लाख रुपये तक का जुआ खेला जा रहा है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन फड़ों में खेलने वाले जुआरी यह कहते सुने जाते हैं कि यहां “मुखबिरी का कोई खतरा नहीं।” इसी विश्वास के कारण वे बिना किसी डर के जुआ खेलने आते हैं।

Illegal Gambling in Aathner: क्या पुलिस संरक्षण में चल रहा है जुए का कारोबार?

सूत्रों के अनुसार, इन जुआ संचालकों का दावा है कि “साहब अपने हैं, कोई कार्रवाई नहीं होगी।” यह बयान पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। आठनेर के बच्चे-बच्चे को पता है कि ये फड़े कहां लगती और कैसे चलती हैं, पर आश्चर्य यह है कि पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती। सवाल यह है “क्या पुलिस वास्तव में अनजान है या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए है?”

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Illegal Gambling in Aathner: पुलिस अधीक्षक के निर्देश हवा-हवाई

पुलिस अधीक्षक द्वारा बार-बार जारी सख्त हिदायतों के बावजूद, जुएं का यह अवैध व्यापार रुका नहीं है। जुआरी बेखौफ, जुआ संचालक निडर, और पुलिस पूरी तरह मौन। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर गहरे सवाल उठते हैं।

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Illegal Gambling in Aathner: अवैध जुए का खेल समाज और कानून व्यवस्था के लिए खतरा

जुआ और सट्टे का यह अवैध कारोबार न केवल कानून को चुनौती दे रहा है बल्कि समाज के नैतिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचा रहा है। राहुल, संजय और पिंकेश जैसे संचालक अपनी फड़ पर सभी “सुविधाएँ” और “सुरक्षा” देने का दावा करते हैं। यह स्थिति प्रशासन के लिए चेतावनी है कि यदि इस धंधे को रोका नहीं गया तो यह अपराध की बड़ी जड़ बन सकता है।

यथार्थ योद्धा संवाददाता – लक्की राने

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Sagar Karkare

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