Private School Violations: नगर सरकार ने अंधा बांटे रेवड़ी, अपने-अपनों को दे। वाली कहावत परंपरा के रूप में चल रही है। किस तरह भवन निर्माण की अनुमति दी जाती है इसका अनुभव अनुमति प्राप्त करने वाले अधिकांश लोगों को तर्जुबा है कि बगैर आर्थिक सहयोग के अनुमति अटक जाती है। अब पिछले लंबे समय से नगर में संचालित हो रहे स्कूल को देखकर आप समझ जाएंगे कि स्कूली बच्चे स्कूल से सीधे सड़क पर आ जाते हैं।

मुख्य मार्ग पर तेज गति वाहन स्कूल की टाइमिंग के दौरान कभी भी हादसे को न्यौता दे सकते हैं। पहले कभी नगरपालिका ने स्कूल संचालक को पार्किंग संबंधित नोटिस भी दिया था, इसके बाद क्या कार्यवाही हुई इसकी खबर देने में अब नगर सरकार के नुमाइयों को आलसी आ रही है। वहीं पता चला है कि स्कूल संचालक संघनिष्ठ है जिसके चलते नियमों को ठेंगा बताने की छूट उन्हें नगर सरकार उपलब्ध करा रही है।
Private School Violations: दिव्यांग सुविधा सिरे से नदारद
एक तरफ नगर सरकार कायदे से निर्माणों को लेकर सिर्फ अपना कायदा और फायदा देखती है, वहीं शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी निजी स्कूलों के निरीक्षण को लेकर अपने उन नुमाइंदों की नजरों पर भरोसा करते हैं जो लंबे समय से सिर्फ अतिरिक्त आर्थिक आय पर नजर जमाकर विभाग को फायदा पहुंचा रहे हैं। स्कूल के ड्राइंग डिजाइन और संचालन के लिहाज से दिव्यांगों के लिए सुविधाएं सिरे से नदारद मिलती हैं। ऐसे में स्कूल संचालन में जो कायदे होने चाहिए उन्हें भी ठेगा दिखाया जा रहा है। शिक्षा विभाग को इस स्कूल से जुड़े खेल मैदान और लैब की भी भौतिक पड़ताल किए हुए लंबा समय होना बताया जा रहा है।

Private School Violations: शिक्षक-शिक्षिकाओं की योग्यता भी ताक पर
जिस ग्रुप के पास इस स्कूल का संचालन बताया जाता है वे अपने संचालन में अपनी सुविधा के हिसाब से शिक्षक-शिक्षिकाओं की नियुक्ति कर रहे हैं। पुख्ता सूत्र की मानें तो स्कूल संचालन समिति स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए ऐसे लोगों से सेवा कार्य पूरे करा रहे हैं जिनको योग्यता पर सवाल है, दूसरी तरफ स्टॉफ और संचालन समिति के सदस्यों सहित विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी शाला प्रबंधन से जुड़े एजेंडों और निर्णयों की जानकारी नहीं होती पता चला है कि है कि इस स्कूल में गैर शैक्षणिक कार्य भी होते हैं, लेकिन इनका हिसाब किताब शाला प्रबंधन समिति में नहीं रखा जाता।
Private School Violations: डर के मारे कोई सामने नहीं आ रहा
स्कूल संचालन समिति का डर शिक्षक-शिक्षिकाओं पर इस कदर हावी है कि नाम न छपने की बात पर बताया जाता है कि जब मानदेय मिलता है उसके पहले ही बड़ा हिस्सा स्कूल संचालन समिति को लौटाना पड़ता है। लगभग आधे मानदेय में काम चलाना पड़ता है। अब जो अयोग्य होंगे वो कम में भी काम चला सकते हैं, यह बात स्कूल संचालन समिति जानती है आधे मानदेय के नाम पर पूरा मानदेय देने का जुगाड़ भी बना हुआ है। वहीं छात्रों की छात्रवृत्ति मामले में भी हेराफेरी के मामले सामने आए थे लेकिन अभिभावक बच्चों के भविष्य का डर देखते हुए बोलने से बचते रहे।
Private School Violations: इधर गड्ढे में लगता है स्कूल मासूमों की जान को खतरा
इधर इस ग्रुप को जो एक अन्य स्कूल है वह गंज में तांगा स्टैंड के पास स्थित है, इस स्कूल में बच्चों की स्टेध भी बढ़िया है, लेकिन शिक्षा विभाग के नियमों से इतर इस स्कूल में कोई भी व्यवस्थाएं नहीं हैं। न तो खेल मैदान है न पार्किंग के लिए जगह है। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां स्कूल के अंदर जाने और बाहर आने के लिए रास्ता भी खतरों भरा है।

स्कूल में प्रवेश करते हुए नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां तो हैं, लेकिन स्कूल लगभग 15 से 20 फीट की गहराई में चना हुआ है यहां पर बच्चों की जान को खतरा है। स्कूल के जिससे पीछे नाला सटा हुआ है इससे बचाव के लिए मैनेजमेंट ने ऊंची दीवार तो उठा दी लेकिन पानी नापकर नहीं गिरता यदि हाथी नाले में अच्छी खासी चाड़ आए जाए स्कूल में पानी भराना तय है, वहीं स्कूल के सामने स्कूल लगते समय और छुट्टी के दौरान ट्रैफिक जाम तो जैसी स्थिति निर्मित हो जाती है।
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