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RES Bhimpur block corruption: ग्रेवेल सडक़ से उठ रही भारी भ्रष्टाचार की गंध

RES Bhimpur block corruption: The gravel road smells of corruption

RES Bhimpur block corruption: आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले का दोहन कैसे किया जा सकता है, ये बैतूल जिले में पदस्थ अधिकारियों से भलीभांती सीखा जा सकता है। चाहे स्वच्छ भारत अभियान में करोड़ों के घोटाले की बात हो या फिर गरीब आदिवासियों की पढ़ाई के हक पर डाका डालना हो जिसका उदाहरण जेएच कॉलेज का करोड़ों का स्कालरशिप घोटाला है वहीं निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी करके कैसे वाहवाही लूटी जा सकता है यह भी भीमपुर ब्लॉक में बाशिंदा सुखढाना से डांडलभूरू तक मुख्यमंत्री ग्राम सडक़ के निर्माण में देखा जा सकता है। 

RES Bhimpur block corruption

RES Bhimpur block corruption: एसडीओ पंकज सिंह, इंजीनियर निशा पाटिल के संरक्षण में गुणवत्ताहीन काम पर एसई गजभिए का गुपचुप निरीक्षण

अधिकारियों ने सडक़ में जो गोलमाल किया है उसका अंदाजा खुद जांच अधिकारी भी नहीं लगा सकते कि आखिर मामला कितने के भ्रष्टाचार का है, यह सडक़ तो लगभग सवा करोड़ के आस-पास की लागत से बन रही है, लेकिन इसमें गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। बताया जाता है कि एसडीओ पंकज सिंह, इंजीनियर निशा पाटिल के संरक्षण में गुणवत्ताहीन काम पर जब एसई गजभिए ने गुपचुप निरीक्षण किया तो उनके भी होश उड़ गए। हालांकि सभी अधिकारी इस मामले मेें बात करने से कतरा रहे हैं या यूं कहें कि कन्नी काट रहे हैं। 

RES Bhimpur block corruption: जनता के टैक्स का दुरुपयोग

लेकिन स्थानीय नागरिकों और खासकर जिनकी सुविधा के लिए यह सडक़ बनाई जा रही है उन्हें इस बात का अंदाजा है कि गड़बड़झाला कहां हो रहा है। आपको बता दें कि 118.54 लाख रुपये की यह सडक़ जनता के टैक्स का पैसा है, और यदि इसी स्तर का कार्य होता रहा तो यह सडक़ राहत नहीं बल्कि बरसात में बढ़ी हुई परेशानी का कारण बनेगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण की जांच कर जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई की जाए। 

RES Bhimpur block corruption: जनसंपर्क की खबर भी निकली झूठी

इस मामले में आरईएएस एसडीओ भीमपुर पंकज सिंह राजपूत ने हमारे पिछले अंक में कहा था कि आपके द्वारा बताए गए विषय को मैं देखता हूँ। लेकिन उसके बाद उन्होंने भी कोई अपडेट नहीं दिया। इधर पत्रकारिता के भी कुछ उसूल होते हैं, लेकिन इस बात का घोर आश्चर्य है कि जिला जनसंपर्क कार्यालय से इसी सडक़ के पूर्ण होने और चमचमाती सडक़ से आवागमन सुगम हुआ जैसी खबर जारी कर दी गई, जबकि सरकारी पत्रकार को मौका मुआयना तो करना ही था बिना सच्चाई जाने खबर जारी करने से बवाल खड़ा हुआ है वही एक ऐसा धागा है जो इस भ्रष्टाचार की परत-दर-परत खोलता चला जाएगा और जिम्मेदार अधिकारी इसके लपेटे में आते जाएंगे। 

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RES Bhimpur block corruption: इसी प्रकार पुलिया में भी धांधली

सडक़ तो छोडिय़े पुलिया में भी धांधली की हद कर दी 118.54 लाख की लागत से 3 किलोमीटर बन रही इस सडक़ में पुलिया का निर्माण भी किया जा रहा है, लेकिन हालात यह है कि पुलिया की प्लिंथ में पत्थर, वॉल की चौड़ाई में कमी, और कंक्रीट में उपयुक्त मटेरियल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। गुपचुप निरीक्षण करने वाले एसई राजेंद्र गजभिये और एसडीओ पंकज सिंह राजपूत भी इस मामले में कुछ कहने से कतरा रहे हैं, जब उन्हें इस संबंध में बात करने के लिए फोन किया गया तो दोनों ने ही फोन रिसीव नहीं किया। 

RES Bhimpur block corruption: ये है पूरा मामला

बाशिंदा सुखढाना से डांडलभूरू तक मुख्यमंत्री ग्राम सडक़ एवं अधोसंरचना मद से 118.54 लाख रुपये की लागत से 3 किलोमीटर ग्रेवेल सडक़ निर्माण कार्य आरईएस विभाग द्वारा कराया जा रहा है। जनसंपर्क के आधिकारीक पेज पर इस सडक़ को ‘उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण’ बता कर पोस्ट जारी की, लेकिन स्थल पर जांच करने पर निर्माण की स्थिति विभागीय दावों के बिल्कुल विपरीत मिली। यहां फिलहाल पुलिया के बेरिंग कोट का कार्य जारी है, और सडक़ की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। 

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RES Bhimpur block corruption: मटेरियल क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों से खिलवाड़

निर्माण स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि सडक़ निर्माण में न क्वालिटी का ध्यान रखा गया और न ही निर्धारित मटेरियल क्वांटिटी का उपयोग किया गया है। उनके अनुसार ठेकेदार ने सडक़ पर केवल मुरूम डालकर समतल किया और अंतिम चरण में दाल में जीरे जितनी बारीक बजरी चूरी बिछा दी गई। 

RES Bhimpur block corruption: ग्रामीणों का कहना

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि निर्माण के दौरान न पानी डाला गया और न ही रोलर चलाया गया, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि पहली ही बरसात में सडक़ टूटकर दलदल में बदल जाएगी। सडक़ के साथ बन रही पुलिया भी अनियमितताओं का उदाहरण बन गई हैं। पुलिया निर्माण में वॉल की चौड़ाई समान नहीं रखी गई, पाइप बेड तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं बने, और बेयरिंग कोट में कांक्रीट के स्थान पर बड़े पत्थरों का उपयोग किया है। 

RES Bhimpur block corruption: बरसाती पानी का दबाव नहीं झेल पाएगा निर्माण

तकनीकी जानकारों का मानना है कि ऐसा निर्माण बरसाती पानी का दबाव झेल ही नहीं पाएगा। इन अनियमितताओं की जानकारी जब इस निर्माण कार्य की सुपरवाइजिंग इंजीनियर निशा पाटिल को दी गई, तो उन्होंने न कोई जवाब दिया और न ही निर्माण गुणवत्ता में सुधार की दिशा में कोई कदम उठाया। 

RES Bhimpur block corruption: स्थानीय लोगों का कहना

स्थानीय लोग मानते हैं कि यदि निर्माण काल के दौरान इंजीनियरिंग सुपरविजन प्रभावी और जिम्मेदार तरीके से किया जाता, तो निर्माण कार्य में इस स्तर की अनियमितता संभव ही नहीं थी। ग्रामीणों का कहना है कि सुपरविजऩ की कमी और निगरानी तंत्र की लापरवाही ने सडक़ निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण मानकों की अनदेखी करते हुए कार्य सिर्फ औपचारिकता निभाने के उद्देश्य से किया गया है।

RES Bhimpur block corruption: जनसंपर्क विभाग की खबर से जनता के बीच नाराजगी

जनसंपर्क विभाग द्वारा सडक़ को ‘पूर्ण और उच्च गुणवत्ता वाली’ बताकर प्रचारित करना भी ग्रामीणों के बीच गहरी नाराजग़ी का कारण बना है। जबकि वास्तविकता में सडक़ अधूरी है और गुणवत्ता हीन निर्माण के आरोप सामने आ रहे हैं, ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जनता को गुमराह करने की कोशिश क्यों की गई? क्या यह विभागीय उपलब्धि दिखाने का प्रयास था, क्या खराब निर्माण को छुपाने की मंशा थी, या फिर ठेकेदार-अधिकारी गठजोड़ की कहानी?

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Sagar Karkare

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