Betul Samachar : हिन्दू धर्म के ही नहीं वरन् सम्पूर्ण विश्व के आराध्य है भगवान विश्वकर्मा
Betul Samachar: Lord Vishwakarma is adorable not only of Hindu religion but of the whole world
श्री शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन आचार्य पुष्कर परसाई ने दिए महत्वपूर्ण उपदेश
Betul Samachar : (बैतूल)। भगवान विश्वकर्मा केवल हिन्दू धर्म के ही आराध्य नही बल्कि सम्पूर्ण विश्व इन्हें ईश्वर मानता हैं, उनकी कृपा से ही सम्पूर्ण विश्व कमा खा रहा है। श्री विश्वकर्मा द्वारा भगवान शिव जी का त्रिशूल, भगवान विष्णु जी का सुदर्शन चक्र, अर्जुन का गांडीव, द्वारकापुरी, यमपुरी एवं सकल सृष्टि का निर्माण करने वाले भगवान विश्वकर्मा के मंदिर में महाशिवपुराण की कथा सुनना सुनाना बड़े सौभाग्य से मिलता है। उक्त उद्गार मंगलवार को विश्वकर्मा मंदिर गंज में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन आचार्य पुष्कर परसाई ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान विश्वकर्मा की कथा सुनाते हुए व्यक्त किए।
अचार्य पुष्कर परसाई ने बताया कि शिवलिंग का प्रथम पूजन होने के कारण महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इसी दिन शिवलिंग प्रगट हुई थी, इसलिए नही की उस दिन भोलेनाथ का विवाह हुआ था। प्रथम ज्योतिर्लिंग (अग्नि स्तम्भ) अरुणांचल में प्रगट हुआ था, काशीविश्वनाथ की तरह यहां भी प्राण त्यागने से मोक्ष प्राप्त होता हैं। कोई व्यक्ति गौशाला, देवस्थान में प्राण त्यागता हैं तो उसका कल्याण निश्चित है। शिवलिंग का स्थान महत्वपूर्ण है, शिवपुराण का मूल मंत्र है “ॐ नमः शिवाय” इसकी व्याख्या स्वयं शंकराचार्य द्वारा की गई हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर का निर्माण करना सरल हैं किंतु उसकी देखभाल करना कठिन है, वेद और धर्म के अनुकूल चलकर ही मंदिर का निर्माण करना चाहिए।
पहले मंदिर निर्माण के पहले मंदिर संचालन की व्यवस्था, जमीन दान देकर मन्दिर निर्माण किया जाता था। नर्मदेश्वर लिंग सर्वश्रेष्ठ होता हैं। उन्होंने आचार्य प्रदीप मिश्रा द्वारा धर्म जागरण और मंदिर जाने के लिये प्रेरित करने के लिये धन्यवाद निवेदित किया। उन्होंने बताया कि शिव पूजन कहीं भी किया जा सकता है, जहां स्वयंभू, प्राचीन या ऋषियों द्वारा स्थापित शिवलिंग हो उसके एक हजार हाथ के अन्दर का क्षेत्र पुण्य क्षेत्र होता है, उस क्षेत्र में कोई तालाब,कुआ होता हैं उसे शिवगंगा कहते है, उसका उतना ही फल मिलता हैं जितना की गंगाजी के पूजन से मिलता हैं, जहां सिर्फ देशी गाय बांधी जाती हो, वही गौशाला है। हमें ग्रहण के समय का लाभ लेना चाहिए।
सूर्यग्रहण चन्द्र ग्रहण में मंत्र जप करने से मंत्र सिद्ध होते हैं। कथा में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण की। अगले दिन तृतीय दिवस की कथा ठीक 2 बजे से प्रारम्भ होंगी। उन्होंने कहा कि आयोजन समिति ने बैठक व्यवस्था बड़ी सुंदर की है। अतिथियों को कभी भूखा नही लौटना चाहिए। यदि शिवभक्त ब्राह्मण को दान दिया जाता हैं, तो कैलाश की प्राप्ति होती हैं। यदि रविवार को किसी ब्राह्मण को दशांक भोजन कराया जाए तो व्यक्ति 10 वर्षो तक निरोगी होता हैं।



