Betul Today Samachar: विद्यार्थी बोले… परीक्षा नहीं होने से कोर्स का समय दो साल बढ़ा, नौकरी में उम्र बाधा बनेगी, प्रदेश के विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर लामबंद हुआ आदिवासी छात्र संगठन
Betul Today Samachar: Students said... Due to non-examination, the duration of the course was extended by two years, age will become a hindrance in the job, the tribal student organization mobilized for the problems of the students of the state.
विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
Betul Today Samachar: (बैतूल)। प्रदेश के विद्यार्थियों की विभिन्न समस्याओं का त्वरित निराकरण नहीं करने से आक्रोशित आदिवासी छात्र संगठन ने बुधवार को विद्यार्थियों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर संगठन के जिला अध्यक्ष संतोष कुमार धुर्वे के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान विद्यार्थियों ने बी.एस.सी. नर्सिंग महाविद्यालयों में प्रवेशित छात्रों की पिछले 2-3 वर्ष से परीक्षा आयोजित नहीं करने पर जमकर नाराजगी व्यक्त की। विद्यार्थियों ने कहा कि परीक्षा नहीं होने से कोर्स का समय दो साल बढ़ गया है। यदि वे डिग्री मिलने के बाद शासकीय नौकरी के लिए एप्लाई करेंगे तो उनकी उम्र ज्यादा हो जाएगी, उनके ओवर ऐज होने का खतरा बना रहेगा।
उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में सत्र 2020-21 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की अब तक परीक्षा नहीं हुई। उन्होंने शासन से मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्रवेश लिया था। उनका अध्यापन और प्रशिक्षण पूरा हो गया, लेकिन परीक्षा न होने उनका कोर्स दो साल बढ़ गया। जिसका असर उनकी आयु सीमा पर पड़ेगा।
उनकी मांग केवल इतनी है कि जल्दी परीक्षा करा दी जाए, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो जाए। आदिवासी छात्र संगठन के जिला अध्यक्ष संतोष कुमार धुर्वे ने कहा कि नर्सिंग में बच्चे मेहनत करते हैं, यदि उनकी परीक्षा 3-3 साल न हो और छात्रवृत्ति न मिले तो कॅरियर बनाना मुश्किल हो जाता है।
धुर्वे ने कहा कि नर्स को सम्मान से बहन का दर्जा दिया जाता है। लेकिन इन्ही नर्सिंग विद्यार्थियों की 3 साल में परीक्षा न कराना म.प्र. मेडिकल विवि की विफलता है। ज्ञापन सौंपने वालों में आदिवासी छात्र संगठन जिला अध्यक्ष संतोष कुमार धुर्वे, जितेंद्र सिंह इवने, संजय वाड़िवा, महेश इंगले, अलकेश वाघमारे, तरुणा नर्रे, पृथ्वीराज बारस्कर, राहुल इवने, राधेश्याम कासदे, विनीत कुमरे, राधेश्याम धुर्वे, अजय उइके, अजय पन्द्राम, सतीश चिल्हाटे, रमन कुमरे, सुखदेव उइके, विशाल धुर्वे सहित अन्य छात्र उपस्थित थे।
इन मांगों पर किया ध्यानाकर्षण
नर्सिंग कालेजो द्वारा छात्र के मूल दस्तावेज जमा कर लिए गये है, वह छात्रों को वापस नहीं दिये जा रहा है, जिसके कारण छात्र आर्थिक व मानसिक रुप से अत्यधिक परेशान है, उनके मूल दस्तावेज लौटाए जाए एवं उक्त कालेजो की जॉच कर संचालक के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाए। आजादी के बाद से अब तक छात्रावासों की सीटों की संख्या में वृद्धि नही की गई है,जबकि जनसंख्या कई गुना बढ़ गई है, जनसंख्या व प्राप्त आवेदनो के अनुपात में छात्रावासों की सीटों की संख्या में वृद्धि की जाए, साथ ही ब्लॉक स्तर पर 200 सीटर, जिला मुख्यालय पर 1000 हजार सीट एवं संभाग मुख्यालय पर 2500 सीटर महाविद्यालय छात्रावास का निर्माण होना चाहिए।
प्रदेश के कई महाविद्यालय एवं स्कूलों अतिथि विद्वानों के भरोसे चल रहे है, वहां पर स्थायी प्रोफेसरों एवं शिक्षकों की भर्ती की जाए। विद्यालय एवं महाविद्यालय में अध्यनरत विद्यार्थियों को सिलेबस की बुक्स एवं स्टेशनरी शिक्षण सत्र के प्रारंभ में प्रदान की जाए। स्कालरशिप एवं आवास सहायता की राशि में मंहगाई के हिसाब से वृध्दि की जाकर शिक्षण सत्र प्रारंभ कर दिया जाए। प्रदेश में संचालित सभी छात्रावासों में लॉयब्रेरी, व्यायम शाला, मनोरंजन के साधन और सुरक्षा की दृष्टि से छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे लगाकर बॉवन्ड्रीवाल का निर्माण होना चाहिए।
छात्रावासा में निवासरत सभी छात्रों को स्वच्छ एवं गुणवतापूर्ण भोजन दिया जाकर छात्रावासों में पीने हेतु शुध्द जल व उपयोग के लिए भरपूर मात्रा में पानी की व्यवस्था होना चाहिए। प्रत्येक छात्रावासों में निवासरत छात्र/छात्राओं के लिये शासन द्वारा निःशुल्क विशेष कोचिंग की व्यवस्था होना चाहिए। प्रदेश के कई ब्लॉकों एवं महाविद्यालयों में बालक/बालिकाओं हेतु महाविद्यालय का आवासीय छात्रावास नही है, वहा पर बालक-बालिकाओं के लिए 200-200 सीटर नवीन छात्रावासों का निर्माण किया जाए।
बुरहानपुर, बलवाडी, पाटी, पानसेमल, निवाली, राणापुर सहित प्रदेश के कई जिलो के ब्लॉको के महाविद्यालय में मात्र एक ही कोर्स बी.ए. संचालित है, वहां पर प्रोफेशनल कोर्स के साथ बी.एसी. एवं बी.कॉम. विषय के कोर्स भी संचालित किये जाये, साथ ही छात्रावास से जिन महाविद्यालय की दूरी अधिक है उन महाविद्यालय में आने जाने के लिए वाहन की व्यवस्था की जाए।
विशिष्ट शिक्षण संस्थानों में योग्य, प्रशिक्षित एवं विषय विशेषज्ञ नहीं है उन संस्थाओं में स्थाई शिक्षक नियुक्त किए जाए, जिन आदिवासी छात्रों के परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है उन छात्रों के लिए बेरोजगारी भत्ता दिया जाना चाहिए, जिससे उन्हें प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी करने हेतु आर्थिक समस्याओं का सामना करना ना पड़े। शिक्षण संस्थाओं में 2 किलोमीटर दायरे में किसी भी प्रकार की खदानों को स्वीकृती नही दी जाए। शा. महाविद्यायलय राणापुर जिला झाबुआ में गिट्टी क्रेसर खदान होने से 24 घंटे ध्वनि व वायू प्रदूषण होता रहता है, जिससे विद्यार्थियों पर शिक्षा में विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। उक्त खदान पर प्रतिबंध लगाया जाए।
प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली का आरोप
व्यापम द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधलिया हो रही है, रसूखदार परिवारों के अयोग्य प्रतियोगियों का चयन हो रहा है और योग्य प्रतियोगी युवक चयन से वंचित हो रहे है। पुलिस भर्ती पटवारी भर्ती आदि में कई मामले सामने आने के बावजूद दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
आदिवासी वर्ग के व्यक्तियों पर प्रदेश में आये दिन अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही है, आदिवासी पर अत्याचार करने वाले व्यक्तियों विरुद्ध ऐसी कठोर कार्यवाही की जाए ताकि कोई भी व्यक्ति कुछ भी हरकत करने से पहले उसके जहन में कार्यवाही का डर होना चाहिए। आदिवासी छात्र संगठन ने उपरोक्त समस्याओं को गंभीरता से लेकर आदिवासी छात्रों के उत्थान के लिए निम्न बिंदुओं पर उचित समय में समाधान करने की मांग की है, वहीं चेतावनी दी है कि अन्याथा आदिवासी छात्र संगठन प्रदेश स्तर पर चरणबद्ध आंदोलन करेगा।
यह है एसीएस का उद्देश्य
विद्यार्थियों के हक अधिकारों की लड़ाई
आदिवासी विद्यार्थियों के हक अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिये 26 जुलाई, 2015 को आदिवासी छात्र संगठन (एसीएस) मध्यप्रदेश का गठन किया गया। संगठन की स्थापना से लेकर अब तक आदिवासी छात्र संगठन विद्यार्थियों के हक अधिकारों की लड़ाई निरंतर लड़ते आ रहा है। वर्तमान में आदिवासी छात्र संगठन मध्यप्रदेश द्वारा आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं को जानने के लिये 21 जून 2023 से 1 जुलाई 2023 तक मालवा निमाड़ के 10 आदिवासी बाहुल्य जिलों एवं 37 आदिवासी ब्लॉको में ‘विद्यार्थी संवाद’ यात्रा निकाली गई। इस यात्रा के दौरान आदिवासी विद्यार्थियों की कई समस्याएं संगठन के संज्ञान में आई है।



