छिंदवाड़ा

Chhindwara News : धार्मिक स्थलों एवं अन्य स्थानों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित व नियम विरूध्द प्रयोग पर नियंत्रण और प्रभावी कार्यवाही के निर्देश

Chhindwara News : Instructions for control and effective action on uncontrolled and illegal use of loudspeakers in religious places and other places.

Chhindwara News : राज्य शासन के गृह विभाग द्वारा धार्मिक स्थलों एवं अन्य स्थानों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों लाउड स्पीकर, डी.जे. व अन्य संबोधन प्रणाली के अनियंत्रित व नियम विरूध्द प्रयोग पर नियंत्रण और प्रभावी कार्यवाही के लिये दिशा निर्देश जारी किये गये हैं । इसके अनुसार सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय व राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन.जी.टी.) के दिशा निर्देशों, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 और म.प्र. कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 के प्रावधानों के सम्यक अनुपालन के निर्देश दिये गये हैं । इन निर्देशों के परिपालन में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री मनोज पुष्प द्वारा ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 यथा संशोधित नियमों की नियमावली के अनुसार प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं । कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री पुष्प द्वारा निर्देश दिये गये हैं कि नियमावली के शेड्यूल में एम्बीएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्डस इन रेस्पेक्ट ऑफ नॉइस के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों जैसे औद्योगिक क्षेत्र में दिन में 75 व रात्रि में 70, वाणिज्यिक क्षेत्र में दिन में 65 व रात्रि में 55, रिहायशी क्षेत्र में दिन में 55 व रात्रि में 45 और शांत क्षेत्र में दिन में 50 व रात्रि में 40 डेसीबल की अधिकतम निर्धारित ध्वनि तीव्रता के अनुसार छिंदवाड़ा जिले के तहसील क्षेत्रों के लिये ध्वनि मानकों को क्रियान्वित करने के प्रयोजन के लिये औद्योगिक, वाणिज्यिक, आवासीय या शान्त क्षेत्रों/परिक्षेत्रों के क्षेत्रों को वर्गीकृत कर मानकों का अनुपालन सुनिश्चित् करें और की गई कार्यवाही से जिला कार्यालय एवं म.प्र.प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड छिंदवाड़ा को अवगत करायें । उन्होंने ध्वनि प्रदूषण के निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्यवाही किये जाने के लिये संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार/नायब तहसीलदार (जिला प्रशासन द्वारा नामित अधिकारी), संबंधित थाना के थाना प्रभारी या उसके प्रतिनिधि और म.प्र. प्रदूषण बोर्ड छिंदवाड़ा के सहायक यंत्री श्री अरविन्द तिवारी व केमिस्ट श्री संजय राजपूत को शामिल करते हुये उड़नदस्ता दलों का गठन किया है । उन्होंने उड़नदस्ता दलों को निर्देश दिये हैं कि नियमित व आकस्मिक रूप से निर्धारित उपकरणों के साथ ऐसे धार्मिक व सार्वजनिक स्थानों का औचक निरीक्षण करें, जहां ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग होता हो तथा प्राप्त शिकायतों की आकस्मिक जांच करें और नियमों का पालन सुनिश्चित् करें। उड़नदस्ता दल को जांच के निर्देश प्राप्त होने पर वे तत्काल जांच कर अधिकतम 3 दिनों के भीतर संबंधित प्राधिकारी अनुविभागीय दण्डाधिकारी के समक्ष समुचित जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें ।

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कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री पुष्प द्वारा निर्देश दिये गये हैं कि समुचित प्राधिकारी/ अनुविभागीय दण्डाधिकारी को निर्देश दिये हैं कि संकलित साक्ष्य और उड़नदस्ते द्वारा की गई प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमों के उल्लंघनकर्ता प्रबंधक/संबंधित व्यक्ति को समुचित सुनवाई का अवसर प्रदान करने के लिये अविलम्ब विधिवत नोटिस जारी करने की कार्यवाही करें तथा अनावेदक को सुनवाई का अवसर देने के उपरांत यथावश्यक धारा-133 दण्ड प्रकिया संहिता, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के सुसंगत प्रावधानों और म.प्र.कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 के सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत विधिवत कार्यवाही सुनिश्चित् करें । उन्होंने बताया कि सक्षम प्राधिकारी/मजिस्ट्रेट को अपने समक्ष प्रचलित सभी कार्यवाहियों में दण्ड प्रकिया संहिता 1973 के अंतर्गत तलाशी, जप्ती, साक्ष्य अभिलेखन, आदेशिकायें निर्गत करने की समस्त शक्तियां प्राप्त हैं, इसलिये बतौर प्राधिकारी यदि मजिस्ट्रेट प्रकरण में यथास्थिति धारा-188, 190 भारतीय दण्ड संहिता अथवा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा-15, कोलाहल नियंत्रण अधिनियम एवं अन्य किसी सुसंगत प्रावधान में अभियोजन की कार्यवाही को समुचित पाते हैं तो समुचित प्राधिकारी अथवा उड़नदस्ते प्रभारी को जैसा भी वह समीचीन समझें, प्रकरण में यथास्थिति प्रथम सूचना रिपोर्ट अथवा सक्षम न्यायालय के समक्ष परिवाद प्रस्तुत करने के लिये आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दे सकते हैं। प्राधिकारी यदि पाता है कि प्रकरण में शिकायत मिथ्या या लघु प्रकृति की है तो अभिलिखित किये जाने वाले कारणों का उल्लेख करते हुये किसी भी शिकायत में संक्षिप्त प्रकिया अपनाते हुये प्रकरण निक्षेपित किया जा सकता है । कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री पुष्प द्वारा अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी छिंदवाडा को जिले के सभी उड़नदस्तों का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने सभी उड़नदस्तों को निर्देश दिये हैं कि अपनी औचक जांचों की मासिक रिपोर्ट संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय दण्डाधिकारियों के माध्यम से नोडल अधिकारी/अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी छिंदवाड़ा को भेजें । उन्होंने जिले के सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारियों को भी निर्देश दिये हैं कि अपने क्षेत्रों के सभी संबंधित धर्म गुरूओं से संवाद व समन्वय के आधार पर अवैध लाउडस्पीकरों को हटाये जाने की कार्यवाही करें और निर्धारित डेसिबल का अनुपालन कराया जाना भी सुनिश्चित् करें। ऐसे धर्म स्थलों की थानावार सूची भी बनायें, जहां इन नियमों/आदेशों का अनुपालन होना नहीं पाया गया है और इसकी जिला स्तर पर टी.एल.मीटिंग में साप्ताहिक समीक्षा की जायेगी । उन्होंने बताया कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण ) नियम 2000 यथा संशोधित नियमों की नियमावली के शेड्यूल में अंकित अनुमत्य अधिकतम डेसिबल ध्वनि सीमा के अंतर्गत ध्वनि मानकों के प्रावधानों का पालन करने के लिये सामान्यतः मध्यम आकार के अधिकतम 2 डी.जे. के प्रयोग को ही अनुमत्य किया जायेगा। डीजे व लाउडस्पीकर की विधिवत अनुमति संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय दण्डाधिकारी/कार्यपालिक दण्डाधिकारी (तहसीलदार/नायब तहसीलदार) द्वारा प्रदान की जायेगी । किसी भी संस्था/व्यक्ति द्वारा ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 यथा संशोधित नियमावली के प्रावधानों का पालन करते हुये ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों लाउड स्पीकर, डी.जे. आदि का प्रयोग किया जा सकेगा। उन्होंने निर्देश दिये हैं कि ऐसे कार्यकम जिनमें नियमों का पालन नहीं करते हुये डी.जे. या ध्वनि विस्तारक यंत्रों का अनियंत्रित रूप में प्रयोग किया जाता है, उनके आयोजकों के विरूध्द नियमानुसार विधिक कार्यवाही सुनिश्चित करें । साथ ही यदि यह पाया जाता है कि किसी शासकीय अधिकारी/कर्मचारी जिसका ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 यथा संशोधित नियमावली के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित् कराने का दायित्व था, परन्तु उसके द्वारा ऐसा नहीं करने के कारण किसी धार्मिक स्थल, सार्वजनिक स्थल अथवा कार्यकम में नियम विरूध्द ध्वनि विस्तारक यंत्र लाउडस्पीकर,  डी.जे. प्रयोग में लाया गया हो तो जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी के विरूध्द भी यथोचित अनुशासनात्मक कार्यवाही सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाये ।

Sagar Karkare

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