Garba event GST rules India: गरबे की ताल पर टैक्स का खेल
Garba event GST rules India: Tax game to the beat of Garba
Garba event GST rules India: शारदीय नवरात्रि की आहट के साथ ही बैतूल के मैदानों और सोशल मीडिया पेजों पर चमचमाते गरबा आयोजनों की व्यावसायिक बुकिंग का खेल शुरू हो चुका है। लेकिन संस्कृति और आस्था के इस बड़े मंच के पीछे चल रहे करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन में देश के प्रति आर्थिक और कानूनी जिम्मेदारियों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। देखा जाता है कि ये बड़े आयोजक जिला प्रशासन से भीड़ जुटाने, पुलिस से लाउडस्पीकर बजाने और नगर पालिका से ग्राउंड अलॉट कराने जैसी बुनियादी अनुमतियां लेकर खुद को कानूनन पाक-साफ घोषित कर देते हैं।
लेकिन वित्तीय मामलों और टैक्स के मोर्चे पर यह पूरा खेल पूरी तरह अवैध और संदिग्ध नजर आ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्थानीय प्रशासन जानबूझकर इस गंभीर टैक्स चोरी से अपनी आंखें मूंदे बैठा है या फिर शिकायत का इंतजार रहा है?
Garba event GST rules India: बिना GST नंबर धड़ल्ले से बांटे गए थे पास
यह कोई पहली बार नहीं है जब बैतूल में जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। अगर पिछले साल के गरबा आयोजनों का रिकॉर्ड खंगाला जाए, तो साफ हो जाएगा कि बड़े-बड़े स्पॉन्सरशिप्स और वीआईपी एंट्री के लिए बांटे गए पासेज पर कहीं भी अनिवार्य गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) नंबर अंकित नहीं था। नियमों के मुताबिक, किसी भी व्यावसायिक इवेंट में बिना जीएसटी इनवॉइस या बिना रजिस्टर्ड नंबर के टिकट या पास बेचना सीधे तौर पर एक संज्ञेय अपराध जिसे हम टैक्स चोरी कहते है उसकी श्रेणी में आता है।
Garba event GST rules India: पिछली बार की इस खुली चोरी पर प्रशासन और कमर्शियल टैक्स विभाग का मौन रहना यह साबित करता है कि नियमों का डंडा सिर्फ छोटे व्यापारियों के लिए है, जबकि बड़े आयोजकों को खुली छूट मिली हुई है। आशंका है कि इस साल भी इसी पुराने ढर्रे पर करोड़ों का वारा-न्यारा करने की तैयारी है।
Garba event GST rules India: ₹500 से ऊपर के पास पर 18% GST है अनिवार्य
आयोजकों के इस दावे की हवा देश का केंद्रीय टैक्स कानून ही निकाल देता है। नियमों के स्पष्ट प्रावधानों के तहत, किसी भी व्यावसायिक, सांस्कृतिक या मनोरंजन से जुड़े इवेंट में यदि प्रवेश टिकट या पास का मूल्य ₹500 से अधिक है, तो उस पर सीधे 18 प्रतिशत जीएसटी देना अनिवार्य है। इतना ही नहीं, इन आयोजनों के लिए स्थानीय ब्रांड्स और कंपनियों से जो लाखों रुपयों की स्पॉन्सरशिप वसूली जाती है, उस पर भी 18% की दर से टैक्स बनता है। बैतूल में बिना किसी वैध बिलिंग और बिना जीएसटी नंबर के जो पर्चियां काटी जा रही हैं, वह सीधे तौर पर समानांतर ब्लैक-मार्केट इकोनॉमी को बढ़ावा देने जैसा है।
टैक्स का यह खेल सिर्फ जीएसटी तक सीमित नहीं है, बल्कि आयकर विभाग की भी इसमें खुली अवहेलना हो रही है। देश के टैक्स कोड के तहत धारा 269ST अब नए आयकर अधिनियम 2025 की धारा 186 यह साफ़ कहती है कि किसी भी एक इवेंट या अवसर पर किसी भी एक व्यक्ति या संस्था से दो लाख रुपये या उससे अधिक का नकद लेनदेन करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि कोई आयोजक स्पॉन्सरशिप, वेंडर्स, साउंड-लाइट ठेकेदारों या सेलिब्रिटी सिंगर्स को लाखों का भुगतान नकद में कर रहा है या ले रहा है, तो प्राप्तकर्ता पर 100% पेनल्टी लगाने का प्रावधान है।
Garba event GST rules India: बड़े-बड़े कलाकारों को बुलाने का दावा करने वाले इन आयोजकों के बैंक खातों और कैश बुक का अगर आज ऑडिट करा लिया जाए, तो काले धन का एक बहुत बड़ा नेटवर्क उजागर हो सकता है। प्रशासन को तत्काल अलर्ट मोड पर आकर इन आयोजनों की प्री-बुकिंग, पास डिस्ट्रीब्यूशन और वेंडर एग्रीमेंट्स की कड़ाई से निगरानी करनी चाहिए ताकि राष्ट्र निर्माण में काम आने वाले टैक्स की एक भी रुपये की चोरी न हो सके।
Garba event GST rules India: एक्सपर्ट ओपिनियन
एक्सपर्ट व्यू- 1: करण पांडे (चार्टर्ड अकाउंटेंट)
“अगर गरबा पास ₹500 या उससे महंगा है, तो भले ही आयोजन सिर्फ दो दिन का हो, 18% GST वसूलकर सरकार को देना अनिवार्य है। इसके लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। वहीं, आयकर अधिनियम, 2025 के तहत गरबा के मुनाफे पर टैक्स इस आधार पर लगेगा कि आयोजन कौन कर रहा है कोई अकेला व्यक्ति, अनरजिस्टर्ड सोसाइटी (AOP), फर्म या फिर कोई रजिस्टर्ड ट्रस्ट। केवल स्थानीय प्रशासनिक अनुमतियां ले लेने से कोई भी टैक्स की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।”
एक्सपर्ट व्यू- 2: कुनाल गुदवारे (चार्टर्ड अकाउंटेंट)
“सिर्फ प्रशासनिक अनुमति ले लेना टैक्स दायित्व से बचने का लाइसेंस नहीं है। जब तक पास पर GST नंबर, टिकट पर उचित इनवॉइस और आय का पारदर्शी रिकॉर्ड नहीं होगा, तब तक यह कमाई टैक्स के दायरे से बाहर नहीं मानी जा सकती और जांच होने पर विभाग के पास अनुमान के आधार पर भी टैक्स वसूलने की पूरी कानूनी ताकत मौजूद है।”
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