Article

Married Women Property Act 1874: डेढ़ सौ साल पुराना कानून, आज भी मजबूत निशान, बीमा में पत्नी-बच्चों के हक की खास पहचान

Married Women Property Act 1874: A 150-year-old law, still strong today, specifically recognizing the rights of wife and children in insurance.

Married Women Property Act 1874: कानून की दुनिया में कुछ कानून ऐसे हैं जो समय के साथ पुराने जरूर हो जाते हैं, लेकिन उनका महत्व खत्म नहीं होता। विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम, 1874 ऐसा ही एक कानून है। करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराना यह कानून आज भी लागू है और विवाहित महिलाओं की कमाई, बीमा तथा अलग संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान करता है।Married Women Property Act 1874

Married Women Property Act 1874: क्या कहना है धारा 6

इस कानून की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में धारा 6 शामिल है, जिसका सीधा संबंध जीवन बीमा योजना से है। यदि कोई विवाहित पुरुष अपने जीवन पर ऐसी बीमा पॉलिसी लेता है, जिसमें पत्नी और बच्चों के लाभ के लिए स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है, तो कानून ऐसी पॉलिसी को उनके लाभ के लिए ट्रस्ट के रूप में मानता है। ऐसी स्थिति में, जब तक ट्रस्ट का उद्देश्य कायम रहता है, पॉलिसी पति के नियंत्रण में नहीं रहती और सामान्यतः उसके क्रेडिटर के दावों या उसकी एस्टेट का हिस्सा नहीं बनती।

यही कारण है कि बीमा के क्षेत्र में इस कानून की जानकारी महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर परिस्थिति में बीमा राशि पूरी तरह लेनदारों से सुरक्षित होगी। कानून स्वयं यह अपवाद रखता है कि यदि पॉलिसी लेनदारों को धोखा देने के इरादे से ली गई हो, तो उनके अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।

Married Women Property Act 1874

Married Women Property Act 1874: सिर्फ बीमा नहीं, कमाई का अधिकार भी

कानून केवल इंश्योरेंस तक सीमित नहीं है। धारा 4 के अनुसार विवाहित महिला की अपनी नौकरी, व्यवसाय या अन्य रोजगार से हुई कमाई तथा उससे की गई सेविंग्स और इनवेस्टमेंट उसकी सेपरेट प्रॉपर्टी मानी जाती हैं।

धारा 5 विवाहित महिला को अपने नाम और अपने हित में स्वतंत्र रूप से जीवन बीमा योजना लेने की अनुमति देता है। ऐसी पॉलिसी और उसके फ़ायदे, यदि आवश्यक रूप से व्यक्त हों, उसकी पृथक संपत्ति के रूप में देखे जाते हैं।

इसके आगे धारा 7 महिला को अपनी पृथक संपत्ति की सुरक्षा के लिए अपने नाम से कानूनी कार्यवाही करने का अधिकार देता है। धारा 8 उसकी पृथक संपत्ति से संबंधित संविदात्मक दायित्व को, धारा 9 शादी से पहले पत्नी के कर्ज के संबंध में पति की देयता को और धारा 10 पत्नी द्वारा ट्रस्टी या एक्जीक्यूटिव/एडमिनिस्ट्रेटिव के रूप में किए गए ब्रीच से जुड़ी पति की देयता की सीमा को संबोधित करता है।Married Women Property Act 1874

Married Women Property Act 1874: यानी विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम, 1874 केवल पुरानी किताब का कानून नहीं है। खासकर जीवन बीमा योजना में इसका धारा 6 आज भी ऐसा प्रावधान है, जिसकी जानकारी परिवारों को वित्तीय सुरक्षा और कानूनी अधिकार को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकती है।

____________________________

इसी प्रकार की जानकारी और समाचार पाना चाहते हैं तो,हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़े व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए “कृपया यहां क्लिक” करे

साथ ही हमारे इंस्टाग्राम के जुड़ने के लिए यहां “क्लिक करें“ 

Kartik Trivedi

Kartik Trivedi is the Editor in Chief of Yatharth Yoddha Digital Desk and He is also the youngest Publisher and Editor of Medhavi Samachar.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button