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Anonymous Messages Legal Issue: सोशल मीडिया Confession के पीछे छिपे चेहरे कानून की नज़र से दूर नहीं

Anonymous Messages Legal Issue: Faces hidden behind social media confessions are not far from the eyes of the law

Anonymous Messages Legal Issue: अभिव्यक्ति की आजादी ने आवाज उठाने का हक दिया, लेकिन सोशल मीडिया पर यही आजादी अब कई बार हदें पार कर रही है। Confession के पर्दे में छुपे संदेश सवाल खड़े कर रहे हैं कि नाम भले गुम हो, क्या शब्दों की जिम्मेदारी भी गुम हो सकती है?Anonymous Messages Legal Issue

Anonymous Messages Legal Issue: नाम छुपा, राज नहीं…., एनजीएल पर अनामियत की आड़ में सवाल कई

कॉलेज, विश्वविद्यालय और सोशल मीडिया पर बढ़ता ‘अनाम संदेशों’ का चलन; लेकिन क्या नाम छिप जाने से भेजने वाला कानून की पहुंच से भी बाहर हो जाता है? सोशल मीडिया के दौर में अपनी बात किसी तक पहुंचाने के लिए अब नाम सामने रखना जरूरी नहीं रह गया है। एनजीएल जैसे अनाम मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर यूजर अपना एनजीएल लिंक साझा करते हैं और उस लिंक के जरिए कोई भी व्यक्ति बिना नाम बताए संदेश भेज सकता है।

कॉलेज, विश्वविद्यालय और सोशल मीडिया पेजों पर इनका इस्तेमाल कभी प्रशंसा, कभी प्रेम प्रस्ताव और कभी निजी अनुभव साझा करने के लिए होता है। लेकिन यही सुविधा तब सवालों के घेरे में आती है, जब अनामियत की आड़ में किसी व्यक्ति के बारे में अपमानजनक, झूठी या धमकी भरी बातें सार्वजनिक होने लगती हैं।

Anonymous Messages Legal Issue: अनाम है, अज्ञात नहीं

आम धारणा है कि अगर संदेश भेजते समय नाम दिखाई नहीं दे रहा है तो भेजने वाले की पहचान पूरी तरह छिप गई। एनजीएल की अपनी प्राइवेसी पॉलिसी इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं ठहराती। एनजीएल के अनुसार वह मैसेज सेंडर का नाम या सोशल मीडिया हैंडल स्टोर नहीं करता और यह जानकारी ऐप यूजर या अन्य लोगों को उपलब्ध नहीं कर सकता।

हालांकि, एनजीएल यह भी बताता है कि मैसेज सेंडर के आईपी एड्रेस या ब्राउजर यूजर-एजेंट के आधार पर कुछ जानकारी उपलब्ध हो सकती है। उसकी पॉलिसी में आईपी एड्रेस, डिवाइस संबंधी जानकारी और सामान्य लोकेशन जैसी तकनीकी जानकारी एकत्र किए जाने का भी उल्लेख है।Anonymous Messages Legal Issueएनजीएल यह भी कहता है कि अनुपालन, सुरक्षा और अन्य वैध परिस्थितियों में वह कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जानकारी साझा कर सकता है। यानी प्राप्तकर्ता के लिए अनाम होना और कानून की नजर में पूरी तरह पहचान से परे होना दो अलग बातें हैं।

Anonymous Messages Legal Issue: एनजीएल पर अमेरिकी कार्रवाई ने भी उठाए सवाल

एनजीएल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आधिकारिक रिकॉर्ड अमेरिका का है। 2024 में फेडरल ट्रेड कमिशन यानी एफटीसी और लॉस एंजिल्स डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी कार्यालय ने एनजीएल लैब्स और उसके दो सह-संस्थापकों के खिलाफ कार्रवाई की। एफटीसी की शिकायत में आरोप लगाया गया कि कंपनी ने बच्चों और किशोरों को अपनी अनाम मैसेजिंग सेवा की ओर आकर्षित किया, साइबरबुलिंग रोकने वाली अपनी एआई मॉडरेशन क्षमता के बारे में भ्रामक दावे किए और कुछ ऐसे संदेश भेजे जो वास्तविक लोगों से आए हुए प्रतीत होते थे।

शिकायत में यह भी आरोप था कि यूजर्स को पेड सब्सक्रिप्शन लेने के लिए यह विश्वास दिलाया गया कि इससे संदेश भेजने वाले की पहचान सामने आ जाएगी। प्रस्तावित आदेश में 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों को अनाम मैसेजिंग ऐप उपलब्ध कराने पर रोक और 5 मिलियन डॉलर के भुगतान का प्रावधान था।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये एफटीसी और लॉस एंजिल्स प्राधिकरण द्वारा लगाए गए आरोप और उस मामले में प्रस्तावित/न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े उपाय थे। इन्हें भारत में एनजीएल के खिलाफ किसी आपराधिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।Anonymous Messages Legal Issue

Anonymous Messages Legal Issue: भारत में अनाम संदेश भी कानून से बाहर नहीं

यदि किसी अनाम पोस्ट या संदेश में किसी व्यक्ति के बारे में ऐसा कथन प्रकाशित किया जाता है जिससे उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का इरादा हो, या भेजने वाला यह जानता हो अथवा उसके पास ऐसा मानने का कारण हो कि उससे प्रतिष्ठा को नुकसान होगा, तो परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356 के तहत मानहानि का प्रश्न उठ सकता है।

इसी धारा में सत्य, सार्वजनिक हित और सद्भावना में व्यक्त राय जैसी कई अपवाद स्थितियां भी दी गई हैं। इसलिए हर नकारात्मक टिप्पणी को स्वतः मानहानि कहना कानूनी रूप से सही नहीं होगा। इसी तरह, यदि किसी अनाम संदेश में धमकी दी जाती है, तो मामले के तथ्यों के आधार पर आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान भी सामने आ सकते हैं।

Anonymous Messages Legal Issue: डिजिटल निशान और जांच की प्रक्रिया

किसी विवादित संदेश का स्क्रीनशॉट, लिंक, समय और अन्य उपलब्ध जानकारी बाद की जांच में उपयोगी हो सकती है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 94 अदालत या पुलिस को ऐसे दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन और कम्युनिकेशन डिवाइस प्रस्तुत कराने की शक्ति देती है, जिनमें डिजिटल साक्ष्य मौजूद हो सकते हैं।Anonymous Messages Legal Issue

Anonymous Messages Legal Issue: हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी अनाम संदेश से व्यक्ति की पहचान हर मामले में तुरंत सामने आ जाएगी। वास्तविक पहचान तक पहुंचना उपलब्ध तकनीकी रिकॉर्ड, प्लेटफॉर्म के पास मौजूद जानकारी और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

Anonymous Messages Legal Issue: अनामियत सुरक्षा भी है, जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं

अनामियत को पूरी तरह नकारात्मक भी नहीं देखा जा सकता। कई बार कोई व्यक्ति अपनी पहचान उजागर किए बिना उत्पीड़न, साइबरबुलिंग या किसी गंभीर समस्या की जानकारी देना चाहता है। ऐसे मामलों में अनाम माध्यम उसकी सुरक्षा का जरिया बन सकता है।

समस्या तब शुरू होती है जब यही अनामियत किसी दूसरे व्यक्ति की प्रतिष्ठा, निजता या मानसिक शांति को नुकसान पहुंचाने का माध्यम बन जाए।

एनजीएल अपनी सेफ्टी गाइड में यूजर्स को हानिकारक संदेशों को ब्लॉक और रिपोर्ट करने की सलाह देता है। उसकी कानून-प्रवर्तन संबंधी जानकारी में यह भी कहा गया है कि वैध कानूनी प्रक्रिया के तहत वह कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ आवश्यक जानकारी साझा कर सकता है।

Anonymous Messages Legal Issue: इसलिए सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे जरूरी समझ यही है स्क्रीन के पीछे नाम भले दिखाई न दे, लेकिन जिम्मेदारी गायब नहीं होती। अनाम संदेश भेजने से पहले सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि मेरा नाम कौन जानेगा?, बल्कि यह भी होना चाहिए कि ‘मेरे शब्दों से किसी दूसरे व्यक्ति को क्या नुकसान हो सकता है?’

✍🏻अनुष्का बिंजवे, छात्रा, भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली

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Kartik Trivedi

Kartik Trivedi is the Editor in Chief of Yatharth Yoddha Digital Desk and He is also the youngest Publisher and Editor of Medhavi Samachar.

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