MP High Court on bank account freezing: साइबर जांच के नाम पर पूरा बैंक खाता बंद करना गलत; इंदौर पीठ ने खाता तुरंत चालू करने और केवल संदिग्ध राशि की एफडी बनाने के दिए आदेश
MP High Court on bank account freezing: It is wrong to freeze an entire bank account in the name of cyber investigation; the Indore bench ordered the immediate re-opening of the account and the creation of fixed deposits only for the suspicious amount.
MP High Court on bank account freezing: साइबर अपराधों की जांच के नाम पर किसी भी खाताधारक का पूरा बैंक अकाउंट फ्रीज करने की पुलिसिया मनमानी पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी बैंक खाते में केवल एक निश्चित राशि संदिग्ध है, तो पुलिस या बैंक सुरक्षा के नाम पर पूरे खाते के संचालन को नहीं रोक सकते। हाईकोर्ट ने इंदौर एमजी रोड स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाताधारक की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनका खाता तुरंत अनफ्रीज (सक्रिय) करने के आदेश जारी किए हैं।
MP High Court on bank account freezing: क्या था पूरा मामला?
याचिकाकर्ता महेंद्र सिंह नेगी ने अधिवक्ता मनीष साहू के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक रिट याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि कोटक महिंद्रा बैंक की इंदौर एमजी रोड शाखा में स्थित उनके खाता संख्या 6049313859 को किसी साइबर सेल की सूचना पर बैंक ने पूरी तरह से फ्रीज कर दिया था। जांच एजेंसियों का दावा था कि इस खाते में ₹5,200 की राशि किसी साइबर फ्रॉड से जुड़ी हुई है। खाताधारक का कहना था कि इस मामूली संदिग्ध रकम के चक्कर में उनका पूरा खाता ब्लॉक होने से वे अपनी वैध जमा पूंजी का इस्तेमाल भी नहीं कर पा रहे हैं।
MP High Court on bank account freezing: पुराने फैसले का मिला हवाला
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि यह मामला पूरी तरह से पूर्व में दिए गए ‘मैल्कम मुरैयस बनाम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ के फैसले के समान है। उस मामले में भी कोर्ट ने साइबर सेल की ढीली कार्यप्रणाली और बिना नोटिस दिए खाते ब्लॉक करने की आदत पर सवाल उठाए थे।
MP High Court on bank account freezing: हाईकोर्ट ने दिए ये सख्त निर्देश:
- खाता तुरंत चालू करें: कोटक महिंद्रा बैंक याचिकाकर्ता महेंद्र सिंह नेगी के बैंक खाते को तत्काल अनफ्रीज करे।
- संदिग्ध राशि की बनेगी FD: खाते में मौजूद केवल विवादित ₹5,200 की राशि को अलग निकालकर उसकी फिक्स डिपॉजिट बना दी जाए।
- बाकी रकम पर कोई रोक नहीं: खाते में मौजूद शेष अन्य सभी वैध राशि को फ्रीज रखने की कोई आवश्यकता नहीं है, खाताधारक उसका इस्तेमाल कर सकेगा।
- पुलिस को 3 महीने की मोहलत: जांच एजेंसी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता या संबंधित कानून के तहत आगामी 3 महीनों के भीतर सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट से इस राशि को लेकर उचित आदेश प्राप्त करे। यदि पुलिस तीन महीने में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहती है, तो खाताधारक इस एफडी की रकम को भी निकाल सकेगा।
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