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Street Harassment Issues: औरत ‘माल’ नहीं, इंसान है ये समझने की आज़ादी कब मिलेगी?

Street Harassment Issues: When will we get the freedom to understand that women are not 'props' but human beings?

Street Harassment Issues: कल्पना कीजिए कि आप कही जा रहे हो, आपके मन में वहां पहुंचने की बहुत उत्सुकता हैं, आप मन ही मन खुश हो और अच्छे से तैयार हो कर अपने घर से निकलते हो और रास्ते में कुछ ऐसा हो जो आपको पूरी तरीके से झिंझोड़कर रख दे। नहीं समझ आया न, आइए एक कहानी के माध्यम से समझाती हूं।Street Harassment Issues

Street Harassment Issues: चलो शुरू करते है

नमस्कार मेरा नाम अपर्णा है और मैं अपने शहर के ही एक सरकारी स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षिका हूं। ये बात है 15 अगस्त की जब में अपने घर से स्कूल जा रही थी, हा हा 15 अगस्त अपना स्वतंत्रता दिवस, इसी दिन तो हमारे देश को आज़ादी मिली थी। इस दिन को मानने ही मैं स्कूल जा रही थी। मैने एक एक सफेद रंग का फुल आस्तीन का सूट पहना हुआ था, और हां एक लाल रंग का दुपट्टा भी ओढ़ा था।

अब आप लोग सोचोगे की में आप लोगों को यह सब क्यों बता रही हूं, तो बात ऐसी है कि उस दिन मेरे विद्यालय से थोड़ी ही दूरी पर मेरे साथ एक ऐसी घटना हुई जिसे मैं आज भी याद करती हु तो सोच कर मुझे ही शर्म आ जाती है।Street Harassment Issues

Street Harassment Issues: दिमाग में पूरा क्राइम सीन बन गया

दरअसल, मै जब अपने विद्यालय के लिए निकली तो रास्ते में दो बाइक वाले लड़कों ने मुझे घूर कर देखा, ओर जब तक वे लोग निकल नहीं गए तब तक वो मुझे घूरते ही रहे। मैने उन्हें इग्नोर किया और आगे निकल गई, थोड़ी देर बाद वही लड़के वापिस आए और बार बार मेरे आप पास से गाड़ी निकाल रहे थे, मैं बहुत डर गई थी और मेरी धड़कने भी तेज हो गई थी। पता नहीं क्यों पर आज कल लड़कियों के साथ हो रहे अपराधों की संख्या इतनी बढ़ गई है न कि अब कोई अंजान आदमी बाजू से भी निकलता है तो मेरे दिमाग में पूरा क्राइम सीन बन जाता है।

उस दिन भी मुझे यही लगा की आज तो काम खत्म ही था, और हां मै उन नौजवानों के बारे में भी आप लोगो को बता दूं कि वो लोगों की भी ज्यादा उम्र नहीं थी, शकल सूरत से वो तो मुझे किसी विद्यालय के छात्र ही लग रहे थे जो स्कूल जाने के नाम पर आवारागर्दी करने निकले थे।

उन तीनों ने मेरी तरफ ऐसे देखा मानो मेरे पूरे शरीर का एक्स-रे निकाल लिया हो और एक दूसरे की तरफ एक अजीब सा इशारा करते हुए कहा कि ‘देख तो यार आज कल मार्केट में एक से एक माल आ गए हैं और हमें खबर भी नहीं।’

Street Harassment Issues: मुझे दिया नया नाम

‘माल’….। घर वालों के द्वारा तो कई सारे नाम दिए जाते है, और यहां तक के तो कई बार ससुराल में जाकर भी लड़कियों के नाम बदल दिए जाते है, चाहे हमें पसंद हो या न, यहां तक तो हम लड़कियां सह लेती है लेकिन, अब तो बाहर घूम रहे हैवान भी हमे नाम दे देते है। जैसे इन लोगों ने मुझे दिया ‘माल’.. वो जाहिल लोगों को मैं कुछ बोलूं उससे पहले तो वो लोग बहुत दूर निकल गए थे। उनके जाने के बाद में दो मिनट वही खड़ी रही और अपने आप को ऊपर से नीचे तक देखा और उस दो मिनट में मैने पूरा स्वतंत्रता दिवस मना लिया और चुपचाप घर लौट आई।

Street Harassment Issues: जब घर पहुंची तो सभी लोग टीवी में लाल किले पर हो रहे झंडावंदन को देख रहे थे। मैने जा कर टीवी बंद कर दिया और अपने कमरे में चले गई। अब कुछ लोग सोचेंगे कि इसमें इतना ओवर रिएक्ट करने की क्या आवश्यकता थी।

Street Harassment Issues: डर कुछ इस प्रकार

इसका जवाब बस इतना सा हैं कि मुझे आज भी उस बात का अफसोस है कि में उन तीनों में से एक को भी कुछ नहीं बोल पाई। जिसकी वजह थी मेरा डर, मै उन्हें कुछ बोल दूं और कल को मेरा पीछा करके घर आजाएं, या मेरे साथ कुछ गलत कर दिया तो, मेरी तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। मेरी एक छोटी बहन है जो शाम को रोज़ अकेले ट्यूशन जाती है कही मेरा बदला उससे निकाल लिया तो । उसके बाद लोगों की बाते ओर न जाने क्या क्या सुनना पड़ता है हमें।Street Harassment Issues

Street Harassment Issues: आज़ादी सिर्फ देश को मिली है, औरतों को नहीं

कई बार जिंदगी में ऐसी घटनाएँ हमारे भीतर इतनी गहरी चोट कर जाती हैं कि वो पल बीत जाने के बाद भी हमारा पीछा नहीं छोड़तीं। बाहर से हम हिम्मती और मज़बूत दिखने की कोशिश करते हैं, लेकिन भीतर कहीं न कहीं डर, असुरक्षा और अपमान हमें तोड़ता रहता है। उस दिन स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मैंने समझा कि आज़ादी सिर्फ देश को मिली है, औरतों को नहीं। हम आज भी बेड़ियों में जकड़े हुए हैं – डर की बेड़ियाँ, समाज की बेड़ियाँ, और उन गंदी सोच रखने वालों की बेड़ियाँ।

सबसे दुखद बात यह है कि गलती हमारी नहीं होती, फिर भी हमें ही शक की निगाहों से देखा जाता है। हमें ही अपने कपड़ों का, अपनी चाल-ढाल का, अपने बाहर निकलने के समय का हिसाब देना पड़ता है। जबकि सच्चाई तो यही है कि गलती नज़रों में है, सोच में है, और उन मानसिक रूप से गिरे हुए लोगों में है जो औरत को ‘माल’ कहकर उसकी पहचान छीन लेना चाहते हैं। कहानी शायद मेरी है, लेकिन एहसास उन हर एक लड़की का है जिसने कभी सड़क पर चलते हुए यह डर महसूस किया है कि कोई पीछा न कर ले, कोई गंदी टिप्पणी न कर दे, या कोई गलत इरादा न पाल ले।

Street Harassment Issues: यही वजह है कि हमें सिर्फ ‘सुरक्षा’ की नहीं, बल्कि सम्मान और बराबरी की ज़रूरत है। और जब तक समाज यह नहीं समझेगा कि औरत इंसान है, कोई वस्तु नहीं तब तक हमारी असली आज़ादी अधूरी ही रहेगी।

✍🏻अनुष्का बिंजवे (छात्रा, भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली)

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Kartik Trivedi

Kartik Trivedi is the Editor in Chief of Yatharth Yoddha Digital Desk and He is also the youngest Publisher and Editor of Medhavi Samachar.

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