Betul Raas Garba Controversy: पत्रकारों से बदतमीजी आई ‘रास’, गरबे की रात में आयोजकों ने पार की औकात
Betul Raas Garba Controversy: Journalists were treated rudely at Raas; organisers crossed all limits on Garba night
Betul Raas Garba Controversy: यूं तो सोशाल मीडिया पर दिमागी नक्सल साउंड सिस्टम को लेकर जमकर भड़ास निकालते हैं, लेकिन जब पूंजीपति आयोजक होते हैं तो दिमागी नक्सल दिमाग भी लगाने से परहेज करते हैं, वहीं प्रशासन कायदे बनाकर कार्ड आने की और रास में शामिल होने की तैयारी करते हैं लेकिन कायदों पर कोई काम नहीं करते ऐसे में यथार्थ योद्धा के पत्रकारों ने जब लालबहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित रास गरबा में जब कायदों की पड़ताल करने की कोशिश की तो आयोजकों को पत्रकारों से कायदे की बात करने की जगह बत्तमीजी करना रास आया।
Betul Raas Garba Controversy: आयोजकों ने कार्यक्रम को लेकर तमाम नियमों की तय औकात को तो पार किया ही वहीं पत्रकारों से अभद्रता करते हुए सच्चाई सामने नहीं लाने की कोशिश की। जिसके बाद पत्रकारों ने आयोजक यथार्थ गुगनानी, पर्व भलवापुरी एवं अन्य एक अज्ञात के खिलाफ झीना झपटी और गाली गलौज का आरोप लगाते हुए थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में रात 10 बजे के बाद चल रहे साउंड सिस्टम को लेकर भी पत्रकारों ने आयोजकों पर कायदों को ठेंगा दिखाने के आरोप लगाए हैं।
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Betul Raas Garba Controversy: खबर करने गए तो मिली धमकी
यथार्थ योद्धा से जुड़े पत्रकार संकेत सिंह ठाकुर, आदर्श अग्निहोत्री और आयुष कमाविसदार 10 बजे के बाद साउंड सिस्टम की सच्चाई जानने के लिए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो आयोजक यथार्थ गुगनानी, पर्व भलवापुरी एवं उनके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने हाथ पकड़कर धमकी देते हुए मोबाइल तक झपट लिए जिसके बाद पूरे मामले की शिकायत थाने में की गई है। अब चर्चा यह है कि पत्रकारों के साथ इस तरह से जब व्यवहार किया गया तब आयोजन स्थल में प्रवेश को लेकर किस तरह की गाइड लाइन आयोजकों ने तय की थी अगर आयोजकों ने कोई सहयोग राशि लेकर प्रवेश दिया है तो आर्थिक अपराध का भी मामला नगर सरकार के गले पड़ सकता है।
Betul Raas Garba Controversy: परदे में रहने दो परदा न उठाओ
लालबहादुर शास्त्री स्टेडियम में रास गरबा हो रहा था या रासलीला चल रही थी, यह बात वे नहीं बता पाएंगे जिनके कार्यालय तक बकायदा कार्ड पहुंचे थे, इसलिए परदे के अंदर नियमों को ठेंगे पर रख जो नाच चलता रहा वह दिखाने से आयोजकों को इतनी तकलीफ थी कि आरएनआई से पंजीकृत यथार्थ योद्धा की डिजिटल टीम को प्रवेश से भी आयोजकों ने वंचित करते हुए हमारी जमात के पत्रकारों को दो कौड़ी का बताते हुए कहा कि जिन लोगों को हम कार्ड देते हैं वही पत्रकार हैं, बाकी पत्रकारों को हम नहीं पहचानते।
Betul Raas Garba Controversy: अब ये कौन पत्रकार हैं जो परदे के पीछे नियमों का गाना गाते हैं और परदे पर आते ही नियम तोड़ने वालों के साथ नंगे नाच में शामिल हो जाते हैं। इसको लेकर भी तमाम चर्चाएं हैं कि आयोजकों ने नगर सरकार को जो कार्यक्रम बताया और कार्यक्रम के नाम पर जो क्रिया करम किया उसमें भी कायदों को औकात से बाहर इस्तेमाल किया गया है।
Betul Raas Garba Controversy: पांच हजार में तीन दिन
लालबहादुर शास्त्री स्टेडियम के रास गरबा और नगर सरकार की ताल को लेकर जो ध्वनि सुनाई दे रही है वह भी काबिल-ए-गौर करने वाला है जहां मनोरंजन टैक्स को लेकर दबी जबान में बताया जा रहा है कि तकरीबन पांच हजार में पूरा सौदा तीन दिन का निपटा डाला, जबकि एक दिन के कार्यक्रम में ही कार्डधारकों की संख्या और दानदाताओं की संख्या काफी अधिक थी, बावजूद नगरपालिका के जिम्मेदार एक बार में ही बाकी दिन ओर दर्शक व प्रतिभागी भूलकर राजस्व की हानि भी कर बैठे दूसरी तरफ आयोजकों द्वारा कार्यक्रम के पहले से ही स्टेडियम पर अघोषित कब्जा कर लिया था अब नगर सरकार ओर आयोजकों का रिश्ता क्या कहलाता है इसकी पड़ताल भी जरूरी है।
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