Betul News:कामन सिविल कोड (यूसीसी) आदिवासी समुदाय को दिए गए विशेषाधिकार का हनन
Betul News: Common Civil Code (UCC) violates the privilege given to the tribal community

Betul News:(बैतूल)। राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय एच एन रैकवाल साहब के आव्हान पर देश के 573 जिलों की समस्त तहसीलों में एक साथ घोषित चार चरणों के चरण बद्ध आंदोलन के दूसरे चरण में 18 जुलाई को राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद सहित भारत मुक्ति मोर्चा एवं बहुजन क्रांति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा बहुजन मुक्ति पार्टी ने मंगलवार को संयुक्त रूप से जिले की समस्त तहसीलों में यूसीसी के विरोध में प्रदर्शन किया।
संगठनों ने इस धरना प्रदर्शन के माध्यम से यूसीसी लागू हो जाने से आदिवासियों के सामने आने वाली परेशानियों पर चिंता व्यक्त की। समस्त तहसीलों में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर आदिवासी विरोधी कानून पर रोक लगाने की मांग की।
संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि अगर केंद्र सरकार यूसीसी लागू करती है तो यह आदिवासियों के विशेष अधिकारों का हनन होगा।

आदिवासियों को संविधान में विशेष अधिकार मिला है। हिंदू मैरिज एक्ट के तहत आदिवासियों की शादी नहीं होती है। संबंध विच्छेद में भी अलग तरीका अपनाया जाता है। हमारे यहां सामाजिक तौर पर इनका निपटारा होता है. अगर यूसीसी पूरे देश में लागू हो जाएगा तो आदिवासियों का न केवल विशेषाधिकार खत्म होगा बल्कि हमारा अस्तित्व भी खतरे में आ जाएगा वहीं, जल जंगल जमीन और परंपरा आदिवासियों की विरासत है।
यूसीसी लागू कर केंद्र सरकार आदिवासियों का हक नहीं छीन सकती। यह हमारे लिए अधिकार की लड़ाई है। हम किसी भी कीमत में इस लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। आपको बता दें कि भारत सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए भारतीय विधि आयोग द्वारा सुझाव और विचार मांगा जा रहा है। ऐसे में आदिवासी एकता परिषद, भारत मुक्ति मोर्चा एवं बहुजन क्रांति मोर्चा का कहना है कि यूसीसी आदिवासी समुदाय को दिए गए विशेषाधिकार का हनन है।
महामहिम राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि विडंबना यह है कि जिन तमाम विदेशी आक्रमणकारियों से लड़ते हुए गुलाम भारत में आदिवासी महापुरुषों ने जंगल, जल, जमीन और अपनी संस्कृति को सुरक्षित करने के लिए जान की बाजी लगाई थी, लेकिन तथाकथित 1947 को मिली आजादी और हमें 1950 में मिले अधिकारों के बावजूद विकास के नाम पर, पर्यावरण संरक्षण के नाम एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण के नाम पर आदिवासियों की उनके जल, जंगल और जमीन से विस्थापित किया गया और उनका पुनर्वास करने का कोई ईमानदार प्रयास नहीं हुआ।
जबकि संविधान में अनुच्छेद 244 के तहत अनुसूची 5 और 6 में उल्लेख है कि इन क्षेत्रों में केंद्रिय या राज्य सरकार को दखल देने का कोई अधिकार नहीं होगा। बल्कि जनजाति मंत्रणापरिषद की स्थापना कर वही विकास की सारी संभावनाओं को जमीन पर उतारने का काम करें और उसका नियंत्रण प्रदेश में राज्यपाल और देश में राष्ट्रपति के अधीन होगा। लेकिन संवैधानिक व्यवस्था के विरोध में राज्य और केंद्र की सरकारे लगातार आदिवासियों के विरोध में कानून बनाकर आदिवासियों को बेदखल करने का काम कर रही है।
इसलिए देशभर के लाखों जनजातियों के सामाजिक संगठनों में आक्रोश होने से उन्हें आंदोलन करना पड़ रहा है और हम संगठनों ने अपनी बुनियादी और जायज मांगों को एकत्रित कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह कदम उठाया है।
सतत जारी रहेगा उलगुलान
संगठनों ने चेतावनी दी है कि हम मूलनिवासियों की विरासत को जिन्होंने भी तहस नहस करने की कोशिश की तो हम उन्हें किसी भी हालत में छोड़ने वाले नही है। हमारा उलगुलान सतत जारी रहेगा। प्रदर्शन में जिले तहसील एवं प्रदेश के प्रमुख कार्यकर्ता पदाधिकारी मौजूद थे।
बैतूल से राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गासिंह मर्सकोले, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद प्रदेश संरक्षक अंतुसिंह मर्सकोले, सर्व समाज आदिवासी संगठन के जिला अध्यक्ष सुंदरलाल उईके, राष्ट्रीय मूलनिवासी महिला संघ के नर्मदापुरम संभाग अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा मर्सकोले, बहुजन मुक्ति पार्टी के जिला संयोजक सुखराम निरापुरे, पेंशनर संघ से अरविंद चौकीकर, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला संयोजक विनोद पवार, राजकुमार उइके, रेवाराम सलामे, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा जिला महासचिव मितेंद्र वटके, आमला से लखनलाल उईके, मनोज वानखेडे , भावना धुर्वे, नेहरू धुर्वे, उमेश इवने गजानन कुमरे, विजय धुर्वे, हंसराज मर्सकोले।
श्याम चौरासे, पिंटू उइके, गोपाल उईके, कौशल परते, फूलचंद धुर्वे, राजकुमार उईके, सहदेव वटके, चिचोली से दिलीप उइके, शाहपुर से मोहन उईके, भौरा से अंगद चौधरी, मुलताई से सहदेव पाटिल, बहुजन क्रांति मोर्चा प्रदेश सह संयोजक बीएल मासोदकर, भारत मुक्ति मोर्चा प्रदेश प्रभारी बीआर भूमरकर, राष्ट्रीय मूलनिवासी बहुजन कर्मचारी संघ प्रदेश अध्यक्ष शिवदास जाउरकर, भारत मुक्ति मोर्चा जिला अध्यक्ष रामलाल इवने सहित अनेक लोग मौजूद थे।
संगठनों ने जानकारी दी है कि तीसरे चरण में 27 जुलाई को जिला मुख्यालय पर रैली प्रदर्शन एवं चौथे अंतिम चरण में 7 अगस्त को भारत बंद होगा।



