बैतूल

Save Indian Family : पीड़ित पुरुषों की आवाज बन रहा एसआईएफ बैतूल, बेंगलुरु में आयोजित की गई एसआईएफ की नेशनल मीट 

Save Indian Family: SIF Betul is becoming the voice of the afflicted men, National Meet of SIF organized in Bengaluru

बैतूल के डॉक्टर संदीप गोहे ने किया जिले का प्रतिनिधित्व

Save Indian Family : पीड़ित पुरुषों की आवाज बन रहा एसआईएफ बैतूल, बेंगलुरु में आयोजित की गई एसआईएफ की नेशनल मीट 

Save Indian Family : (बैतूल)। सेव इंडियन फैमिली एसआईएफ की नेशनल मीटिंग बेंगलुरु में आयोजित की गई। इस राष्ट्रीय स्तरीय बैठक में डॉ संदीप गोहे ने बैतूल जिले का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा हर साल नेशनल मीट का आयोजन किया जाता है, जिसमें हर प्रदेश, हर जिले के लोग शामिल होते हैं। संस्था लंबे समय से प्रताड़ित पुरुषों के लिए कम कर रही है। यह 13 वी नेशनल मीटिंग थी।

डॉ संदीप गोहे ने बैतूल जिले के विभिन्न मुद्दों को इस नेशनल मीटिंग में रखे। उन्होंने बताया कि आजकल कानून का दुरुपयोग हो रहा है। नया फ्रॉड शुरू हुआ है, लड़की लड़के से बात करती है वीडियो कॉल करती है, अपने प्राइवेट मोमेंट्स शेयर करते हैं। लड़की रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेल कर के पैसे एठाना शुरू कर करती है। बैतूल छोटी जगह होने के बाद भी यहां अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।डॉ संदीप गोहे ने बताया कि जिला स्तर पर चौथा साल है संस्था को काम करते ।

बैतूल जिले में भी बहुत सारे प्रकरण सामने आ रहे हैं। पत्नियों से परेशान पतियों के लिए सेव इंडियन फैमिली जख्मों पर मरहम लगाने का काम कर रही है। संस्था द्वारा जारी किए हैल्प लाइन नंबर पर आने वाली कॉल्स की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। काल करने वालो में कोई महिलाओं द्वारा डाले गए झूठे केस से दुखी हैं तो कोई डोमैस्टिक वॉयलैंस जैसे मामलों से परेशान है। शिकायत कहीं कर नहीं सकते क्योंकि कानून सिर्फ महिलाओ का ही साथ देता है।

Save Indian Family : पीड़ित पुरुषों की आवाज बन रहा एसआईएफ बैतूल, बेंगलुरु में आयोजित की गई एसआईएफ की नेशनल मीट 

सेव इंडियन फैमिली (एसआईएफ) वर्ष 2005 से परिवार और वैवाहिक जीवन में सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक कार्य कर रहा है। दिनों-दिनों पतियों के प्रति पत्नियों द्वारा किए जा रहे अपराधों के चलते ही संस्था द्वारा जरूरत महसूस करते हुए, पुरुषों के लिए समर्पित फ्री राष्ट्रीय हैल्पलाइन 8882 498 498 शुरू किया। इस पर उन लोगों के लगातार कॉल बढ़ रही हैं जो 498-ए, बलात्कार आदि से संबंधित झूठे केसों का सामना कर रहे हैं।हालांकि दहेज प्रताडऩा और घरेलू हिंसा का दूसरा पहलू भी कम चिंताजनक नहीं है। यह है दहेज कानून की आड़ में लड़के और उसके परिवारवालों को तंग करना, दहेज के झूठे मामले दर्ज कराना। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानूनों का गलत इस्तेमाल हो रहा है। इसी का नतीजा है कि महिला मुक्ति की तर्ज पर पुरुष भी हकों के लिए एकजुट होने लगे हैं।

पुरूषों के लिए नहीं कोई कानून (Save Indian Family)

Save Indian Family : पीड़ित पुरुषों की आवाज बन रहा एसआईएफ बैतूल, बेंगलुरु में आयोजित की गई एसआईएफ की नेशनल मीट 

व इंडियन फैमिली के सदस्य डॉ गोहे के अनुसार हमारे देश में महिलाओं के हक की रक्षा के लिए बहुत से कानून बने हुए हैं, लेकिन पुरूषों के लिए ऐसा कोई कानून नहीं है। हमारे देश में अधिकारों की बात अक्सर महिलाओं से जोड़ कर ही की जाती है। यहां महिलाओं के लिए महिला थाना से लेकर महिला आयोग तक बनाया है, लेकिन अगर पुरुष को प्रताडऩा सहनी पड़े, तो उसके पास ऐसा कोई दरवाजा नहीं, जहां वे न्याय की फरियाद कर सकें।

देश में जहां 50 से अधिक कानून महिलाओं को पक्ष में बने हैं, 10 हजार से अधिक स्वयंसेवी संगठन (एनजीओ) महिलाओं की सुरक्षा के लिए काम कर रही हैं, जहां महिलाओं के कल्याण के लिए एक अलग मंत्रालय है, उस देश में पुरुषों के लिए कुछ भी नहीं है। ऐसे पीड़ित पुरुषों की आवाज को सशक्त करने के लिए ही-सेव इंडियन फैमिली संस्था आगे आई है, जिसने विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ मिल कर महिला आयोग की ही तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर पुरुष आयोग के गठन की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ रखा है। इसके लिए देश भर के विभिन्न संस्थाओं के साथ मिल कर पुरुषों के साथ होने वाली मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा के मामलों का रिकॉर्ड रखा जाता है।

लिंग के आधार पर न हो भेदभाव(Save Indian Family)

सेव इंडियन फैमिली सदस्यों का कहना है कि उनकी मांग है कि कानून लिंग के आधार पर भेदभाव न करे। बल्कि किसी भी मामले की कार्यवाही करते वक्त महिला व पुरूष को बराबर ही रखा जाए और ऐसे झूठे अपराधों में मामला दर्ज करने से पहले पुरुषों का भी पक्ष सुनना चाहिए। भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए का महिलाओं द्वारा सबसे अधिक गलत इस्तेमाल किया जाता है। कुछ साल पहले इस धारा में बदलाव किए गए थे ताकि विवाहित महिलाओं को उत्पीड़न से बचाया जा सके। उस समय देश में दहेज के मामले तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन आज स्थिति एकदम उलट है। अब उनका नतीजा खदकुशी के रूप में दिख रहा।

Sagar Karkare

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