Lumpy Virus: लंपी बीमारी की वापसी, कोटा में 18 गायों की मौत का दावा, पशुपालन विभाग ने किया खंडन
Lumpy Virus: Lumpi disease returns to, 18 cows died in Kota, animal husbandry department denies it
Lumpy Virus: राजस्थान में दो साल पहले 75 हजार गौवंशों की मौत का कारण बनी लंपी वायरस एक बार फिर लौटने की आशंका जताई जा रही है। कोटा में अब तक 119 लंपी के मामले सामने आ चुके हैं। कोटा नगर निगम गोशाला समिति का दावा है कि लंपी बीमारी से 18 गायों की मौत हो चुकी है। हालांकि, पशुपालन विभाग ने इन मौतों का कारण लंपी नहीं, बल्कि निमोनिया और हीमोग्लोबिन की कमी बताया है।

Lumpy Virus: आइसोलेशन वार्ड में गौवंशों की स्थिति
लंपी से संक्रमित गौवंशों को कोटा की दो गोशालाओं के आइसोलेशन वार्ड में रखा जा रहा है। किशोरपुरा और बंधा की गोशालाओं में संक्रमित मवेशियों का इलाज किया जा रहा है। किशोरपुरा आइसोलेशन केंद्र में 25 से 30 गौवंश रखने की क्षमता है, लेकिन वहां फिलहाल 55 से 60 गौवंशों को रखा गया है, जो क्षमता से कहीं अधिक है।
Lumpy Virus: नगर निगम का दावा: 18 मौतें लंपी से हुईं
शहर में लंपी से अब तक 18 गौवंशों की मौत हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पशुपालन विभाग इन मौतों का सही कारण छिपा रहा है और पोस्टमार्टम भी नहीं करवा रहा। उनके अनुसार, 22 सितंबर को कोटा में पहला लंपी का मामला सामने आया था, जिसके बाद से संक्रमण तेजी7 से फैल रहा है। निगम की टीम ने शहरी क्षेत्रों से लंपी से संक्रमित गौवंशों को पकड़कर आइसोलेशन में रखा है।
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Lumpy Virus: डॉक्टरों का बयान, लंपी से नहीं हुई मौतें
वहीं, किशोरपुरा गोशाला में लंपी संक्रमित गौवंशों का इलाज कर रहीं वेटनरी डॉक्टर ने बताया कि अब तक 119 केस सामने आए हैं, जिनमें से 5 गौवंशों की मौत हुई है। लेकिन उनकी मौत का कारण लंपी नहीं, बल्कि निमोनिया और हीमोग्लोबिन की कमी थी। डॉक्टरों का दावा है कि विभाग द्वारा हर संभव इलाज किया जा रहा है और स्थिति पर नियंत्रण रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
Lumpy Virus: पोस्टमार्टम न होने पर उठ रहे सवाल
लंपी से मरने वाले गौवंशों का पोस्टमार्टम नहीं किया जा रहा, जिससे मौत के असल कारण को लेकर संदेह बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टमार्टम न करवाने से बीमारी के फैलाव और नियंत्रण पर सवाल खड़े होते हैं।
Lumpy Virus: लंपी का सबसे ज्यादा असर बछड़ों पर
इस बार लंपी बीमारी का सबसे ज्यादा असर 4 माह से 1 साल के बछड़ों पर देखा जा रहा है। संक्रमण से प्रभावित बछड़े तेजी से बीमार हो रहे हैं और इलाज के अभाव में उनकी हालत और खराब हो रही है। प्रशासन और पशुपालन विभाग को इस स्थिति से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि संक्रमण को रोका जा सके और गौवंशों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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