BJP Election News: तू भी फलों का दावेदार निकल आया, बेटे पहले पेड़ लगाने पड़ते हैं।
BJP Election News: You too have emerged as a contender for fruits, son, trees have to be planted first
BJP Election News: देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी के संगठन चुनाव इस समय जोर-शोर से चल रहे हैं। इस चुनाव में न केवल पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है, बल्कि कई युवा नेता भी अपनी दावेदारी पेश करने के लिए आगे आ रहे हैं।

हालांकि, इन युवा नेताओं में मंडल अध्यक्ष बनने की होड़ ने एक नई बहस को जन्म दिया है। इसी बीच, मशहूर शायर राहत इंदौरी की शायरी “तू भी फलों का दावेदार निकल आया, बेटे पहले पेड़ लगाने पड़ते हैं,” भाजपा संगठन के इस चुनाव के संदर्भ में बेहद सटीक साबित हो रही है।
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BJP Election News: बिना अनुभव पेश कर रहे दावेदारी
राजनीति में अनुभव और सेवाभाव की हमेशा से अहमियत रही है। पार्टी के मूल सिद्धांतों के तहत, किसी भी पद की दावेदारी से पहले पार्टी के लिए समर्पण और निरंतर सेवा का महत्व होता है। लेकिन वर्तमान संगठन चुनावों में देखा जा रहा है कि कई युवा नेता बिना अनुभव और बिना कोई योगदान दिए सीधे मंडल अध्यक्ष बनने की इच्छा लेकर पैरा शूट लैंडिंग करना चाह रहे हैं। इनमें से अधिकांश युवाओं के पास पार्टी के लिए दीर्घकालिक सेवा का अनुभव नहीं है, और वे केवल पद की महत्ता को देखकर दावेदारी कर रहे हैं।

BJP Election News: राहत इंदौरी की शायरी क्यों साबित हो रही सटीक
राहत इंदौरी की यह शायरी, जिसमें उन्होंने पहले पेड़ लगाने की बात कही है, मौजूदा परिदृश्य में बिल्कुल सटीक बैठती है। भाजपा जैसे बड़े और अनुशासित संगठन में भी कई युवा नेता सिर्फ पद प्राप्त करने की चाह में जुटे हुए हैं, बिना यह समझे कि पहले संगठन के लिए काम करना, मेहनत करना और निष्ठा दिखाना आवश्यक है। जिस प्रकार पेड़ लगाना और उसकी देखभाल करना फल प्राप्त करने के लिए जरूरी होता है, उसी प्रकार किसी भी संगठन में पद पाने के लिए निरंतर योगदान और सेवा का होना अनिवार्य है।
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BJP Election News: चर्चा तो गंज मंडल की भी है
भाजपा जैसे बड़े और अनुशासित संगठन में जिसके बड़े नेता मंचों से परिवार वाद की निंदा करते है। वहीं अब यह भी चौक चौराहे पर चर्चा हो रही है कि जब सपाक्स से आए हुए एक नेता को मंडल अध्यक्ष का दायित्व दिया जा सकता है तो हम कई वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहे हैं तो हम क्यों नहीं दावेदारी कर सकते। छोटे कार्यकर्ताओं को दर्द बड़े कार्यकर्ताओं को दिखाई नहीं दे रहा है।

भाजपा संगठन चुनाव में युवा नेताओं की भागीदारी निश्चित ही पार्टी की ऊर्जा और भविष्य की ओर इशारा करती है, लेकिन केवल पद प्राप्त करने की होड़ में पार्टी के सिद्धांतों की अनदेखी करना सही नहीं है। राहत इंदौरी की शायरी इस परिदृश्य में बिलकुल सटीक बैठती है, और यह शायरी उन युवा नेताओं को एक संदेश देती है कि फलों का दावेदार बनने से पहले पेड़ लगाना आवश्यक है।
BJP election news : पार्टी की मजबूती के लिए युवा नेताओं को पहले संगठन के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करना चाहिए, ताकि वे भविष्य में सच्चे अर्थों में नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल सकें। हम इस खबर के माध्यम से यह नहीं कहता की दावेदारी करना गलत है। लेकिन दावेदारी करने से पहले काम से कम यह तो सोच लेना चाहिए कि हमने भारतीय जनता पार्टी के लिए अभी किया ही क्या है।
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