Betul Samachar : मानसिक पूजा का फल प्रत्यक्ष पूजा से बड़ा होता है: आचार्य पुष्कर परसाई
Betul Samachar : The fruit of mental worship is greater than physical worship: Acharya Pushkar Parsai
घर में यदि माता-पिता रुष्ट हो तो भगवान को पूजने का कोई फल प्राप्त नही होता

Betul Samachar : (बैतूल)। विश्वकर्मा मंदिर गंज में श्री शिवमहापुराण कथा के तृतीय दिवस की कथा में नर्मदा पुरम होशंगाबाद से पधारे आचार्य पुष्कर परसाई ने बताया कि जो व्यक्ति भगवान का अभिषेक करता है, उससे उसकी आत्मा की शुद्धि होती है। शिवनाम का जप करने मात्र से अभिष्ट की प्राप्ति होती है। जन्म मरण के बंधन से मुक्ति पाने के लिए शिवलिङ्ग को माता-पिता की तरह पूजा जाना चाहिए।
108 करोड़ प्रणव शब्दों के जप करने से व्यक्ति परमात्मा की प्राप्ति कर लेता है। मानसिक पूजा का फल प्रत्यक्ष पूजा से बड़ा होता है। आचार्य श्री द्वारा रुद्राक्ष की उत्पत्ति के बारे में बताया कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव की नेत्रों से गिरे आंसुओ की बूंदों से हुई है। श्रद्धा और विश्वास का धागा कमजोर नही होता है। परमात्मा को आपका धन नही, केवल भाव चाहिए। घर में यदि माता- पिता रुष्ट हो तो भगवान को पूजने का कोई फल प्राप्त नही होता है।
माता- पिता की सेवा करना ही जगत में सबसे बड़ा धर्म है। सभी देवताओं के लिए अलग अलग शिवलिङ्ग का निर्माण भगवान विश्वकर्मा जी के द्वारा किया गया। जिसका उल्लेख महा शिवपुराण में भी है। पंडित परसाई ने बताया कि महिलाओं को पति से बातों को नही छिपाना चाहिए। अपनी संतान के दुर्गुणों का पता होने पर, पति को अवश्य खबर करना चाहिए, अन्यथा सन्तान का नाश होता है।
धर्म के प्रचार के लिए धर्म जागरण करने की आवश्यकता

पालघर की घटना पर बोलते हुए आचार्य ने कहा कि ये शर्म की बात है, सनातन धर्मियों के देश में सन्तो को मार दिया गया और प्रशासन देखता रहा। हमें सनातन धर्म के प्रचार के लिए धर्म जागरण करने की आवश्यकता है। मंच से सभी हिंदुओ से निवेदन किया कि वे “द केरला स्टोरीज” फ़िल्म अवश्य देखे और हमें फ़िल्म को देखकर सीखना चाहिए तथा धर्मांतरण से बचना चाहिए।
रोज सांयकाल में अपने घरों के बाहर कम से कम दो दीपक अवश्य जलाना चाहिए। शाम के समय देवता भ्रमण पर निकलते है , जिससे उनकी कृपा हमारे परिवार पर बनी रहती है। कथा स्थल विश्वकर्मा मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बड़ी मात्रा में रही। सभी श्रद्धालुओं ने आचार्य के द्वारा कथा में दिए गए उद्बोधन से हर हर महादेव के जय घोष से पूरा प्रांगण गूंज गया।
आज शिव विवाह की झांकी
आज चतुर्थ दिवस की कथा शिव विवाह झांकियों के साथ ठीक 2 बजे से प्रारंभ होगी। सभी श्रद्धालु बड़ी संख्या में बड़ी श्रद्धा से कथा श्रवण कर रहे हैं। आयोजन समिति ने सभी धर्म प्रेमियों से संगीत मय श्री महाशिवपुराण कथा में पधारकर पुण्य का लाभ लेने की अपील की। बुधवार 9 अगस्त की कथा में प्रसादी वितरण श्रीमती उन्नति जितेन्द्र मालवी, बैतूल टाक्स के संचालक साहिल राठौर द्वारा किया गया। कथा के अंतिम दिन पंचमुखी और षष्टमुखी रुद्राक्ष का वितरण होगा, जिसके धारण मात्र से समस्त मनोकामनाये पूर्ण होगी।



