Sarni Employment Crisis: रोजगार की कमी से सारणी में पलायन जारी, विधायक के लालीपॉप वादे पर जनता नाराज
Sarni Employment Crisis: Migration continues in Sarni due to lack of employment, people are angry at the lollipop promise of the MLA
Sarni Employment Crisis: रोजगार की कमी से जूझ रहे सारणी और उसके आसपास के क्षेत्रों में स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। पलायन के कारण कस्बे की जनसंख्या तेजी से घट रही है, लेकिन जनप्रतिनिधियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। इस बीच, बाबा मठारदेव मेले के दौरान क्षेत्रीय विधायक ने एक बार फिर वादों की झड़ी लगाकर जनता को लुभाने की कोशिश की, लेकिन अब जनता उनके वादों को “लालीपॉप” करार दे रही है।

Sarni Employment Crisis: कोयला खदानों का बंद होना बना बड़ा कारण
सारणी का पाथाखेड़ा इलाका, जहां कभी 10 कोयला खदानें चालू थीं, अब महज चार खदानों तक सिमट गया है। रोजगार के अवसर घटने के कारण लोग अपने घरों को छोड़कर अन्य जिलों और राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। इस संकट ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया है।
Sarni Employment Crisis: चुनाव के दौरान वादे, बाद में ठंडे बस्ते में
पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान विधायक पंडाग्रे ने बड़े-बड़े वादे किए थे। उन्होंने कहा था कि अप्रैल तक नई कोयला खदानें खोली जाएंगी, सीमेंट फैक्ट्री स्थापित होगी और 660 मेगावाट का पावर प्लांट शुरू किया जाएगा। हालांकि, अप्रैल का महीना बीत चुका है, और अब अगला अप्रैल आने वाला है, लेकिन इन घोषणाओं में से कोई भी पूरी नहीं हुई।
Sarni Employment Crisis: झूठे वादों का जाल
हर महीने क्षेत्रीय विधायक की ओर से घोषणाएं की जाती हैं कि प्लांट आ गया है और उद्घाटन हो गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न तो खदान शुरू हुई, न सीमेंट फैक्ट्री का काम आगे बढ़ा और न ही 660 मेगावाट का यूनिट चालू हुआ। जनता का ध्यान भटकाने के लिए बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लगाए गए, लेकिन परिणाम शून्य है।
Sarni Employment Crisis: पलायन से बचे सिर्फ 20 वार्ड
सारणी में रोजगार के आभाव और झूठे वादों से तंग आकर लोग अपने घरों को ताला लगाकर पलायन कर रहे हैं। अगर अब सारणी का सर्वे किया जाए तो 36 वार्डों में से केवल 20 वार्ड ही बचे होंगे। स्थानीय लोग रोजगार की कमी के कारण परिवार समेत दूसरे जिलों में जाकर बसने को मजबूर हो रहे हैं।
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Sarni Employment Crisis: अवैध गतिविधियां बनीं एकमात्र रोजगार
क्षेत्र में रोजगार के अभाव ने अवैध गतिविधियों को जन्म दिया है। जुआ और सट्टा जैसी गतिविधियां चरम पर हैं, जबकि जनता रोजगार के अवसर की आस में परेशान है। भाजपा के कुछ खास नेता इस स्थिति से मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि आम जनता कंगाल हो रही है।
Sarni Employment Crisis: जनता की राय
- रमेश नागले ने कहा, “जब तक रोजगार उपलब्ध नहीं होगा, झूठे आश्वासन देना जनता के साथ धोखा है।”
- उमाकांत का कहना है, “रोजगार लाना बेहद जरूरी है, यह क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा है।”
- कमलेश मोहबे ने कहा, “जनता को बार-बार लालीपॉप वादे देकर गुमराह किया जा रहा है।”
Sarni Employment Crisis: विधायक ने नहीं दिया जवाब
इस विषय पर जब हमारे संवाददाता ने आमला-सारणी विधायक से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
सारणी जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में रोजगार की कमी और लगातार हो रहे पलायन ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। झूठी घोषणाओं और अधूरे वादों से जनता अब तंग आ चुकी है। अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। जनता को अब वास्तविक कार्य और समाधान का इंतजार है, न कि केवल चुनावी वादों का।
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राजेश नागदे की खबर ✍️
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