Betul News : भीमपुर ब्लाक के 3 उपस्वास्थ्य केन्द्रो में कर्मचारियों का टोटा
Shortage of staff in 3 sub-health centers of Bhimpur block
Betul/Bheempur News : जिले के भीमपुर ब्लाक को एक दशक पहले तक कालापानी कहा जाता था क्योंकि यहां सड़क, बिजली और पानी की बहुत ज़्यादा समस्या थी। इसलिए इस क्षेत्र में काम करने वाले सरकारी कर्मचारी कभी मुख्यालय पर नहीं रहते थे, आना जाना करते हुए कुछ साल बिता कर ट्रांसफ़र करवा लेते थे, इस तरह कर्मचारियों की कमी यहां बनी ही रहती थीं। बाद में समय के साथ ये मूलभूत सुविधाएँ तो यहां आ गई लेकिन कर्मचारियों की कमी आज भी ख़त्म नहीं हुई हैं। इसका एक उदाहरण यहां का स्वास्थ्य विभाग भी है। भीमपुर ब्लाक के 3 उपस्वास्थ्य केंद्रों मे एएनएम कर्मचारियों की कमी से यहाँ के लगभग 25 यहां व ढानो की जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ रहा हैं। भीमपुर के उपस्वास्थ्य केंद्र जमन्या और कामोद में एक भी एएनएम कार्यरत नहीं है। जिस वजह से इन दो ग्रामों और इसके आस पास के 10 ग्रामों के बच्चों का टीकाकरण और गर्भवती/ धात्री माताओ की जांच, इलाज व देखभाल में समस्या हो रही है। इसके अलावा उप स्वास्थ्य केंद्र चिल्लोर में एक एएनएम कार्यरत ज़रूर है लेकिन डिलीवरी पॉइंट होने के कारण यहां 2 एएनएम की आवश्यकता है। एएनएम के द्वारा सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं या बुख़ार सर्दी ख़ासी का उपचार भी किया जाता है, लेकिन ये सुविधा इन 15 गावों की जनता को उपलब्ध नहीं हो पा रही है। गौरतलब है कि भीमपुर ब्लॉक में एएनएम की कोई कमी भी नहीं है। इनके 45 उप स्वास्थ्य केंद्रों में कई ऐसे भी है जहां 2 तो कही 3 एएनएम कार्यरत है, उप स्वास्थ्य केंद्र चोहटा में 3, न्यू पिपरिया और सिंगारचावड़ी में 2 एएनएम पदस्थ है। यहां से एक एक एएनएम का अटैचमेंट रिक्त उप स्वास्थ्य केंद्रों में करने से आसानी से ये समस्या हल की जा सकती है लेकिन बीएमओ इस कार्य में बिलकुल रुचि नहीं ले रहे है। बीएमओ से जानकारी लेने पर बताया कि 3 एएनएम को 3 रिक्त केंद्रों में अटैच कर दिया था किंतु उनके आदेश वापिस लेना पड़ा कारण नही बताया जिसमें लगता है कि राजनैतिक दबाव और के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ा हो। काम के दबाव और बैतूल से ज़्यादा दूरी के चलते राजनीतिक दबाव बनाने की आशंका लगती है। अब देखना ये है कि भीमपुर जैसे आदिवासी क्षेत्र के हितों के लिए बीएमओ अपनी जनता की भलाई के लिए कर्मचारियों की कमी दूर करके स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायेंगे या इसी तरह आँख मुँदे हाथ पे हाथ धरे बैठे रहेंगे। इस संबंध में सवाल पूछने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।



