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India Rice Export Ban : भारत के एक फैसले से अमेरिका में मची खलबली! इमरजेंसी जैसे हालात, बेकाबू हुए लोग

India Rice Export Ban : A decision of India created panic in America! Emergency like situation, uncontrollable people


India Rice Export Ban : भारत की मोदी सरकार के एक फैसले से पूरे अमेरिका सहित कई देशों में खलबली मच गई है। इन देशों से वायरल हो रही तस्वीर और वीडियो देख लगता है कि यहां कोई इमरजेंसी लग गई हो। लोग बेकाबू हो गए है। महंगाई भी बढ़ गई है। दरअसल, भारत सरकार ने पिछले हफ्ते ही देश से गैर-बासमती सफेद चावल और टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसकी वजह घरेलू बाजार में चावल की कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना है। देश में पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश से धान की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इसलिए सरकार को ये फैसला लेना पड़ा।

हालत हुए खराब

सुपर मार्केट में चावलों को खरीदने के लिए लोगों के बीच होड़ लग गई. वहां के वीडियो सामने आये हैं। जिनमें वहां मची अफरा तफरी साफ़ झलक रही है। पिछले कुछ दिनों ने ऐसे कई वीडियो सामने आ रहे हैं। जिनके लिए कहा जा रहा है कि चावल खरीदने के लिए लोग छुट्टियां लेकर आ रहे हैं। जिसके कारण चावलों की कीमतों में भी वृद्धि हो गई। 9 किलो का चावल 2215 रुपये में यानी लगभग 27 डोलर में मिल रहे हैं।

यहां देखेंं वीडियाे… 

कीमतों में होगा इजाफा

WAM की रिपोर्ट के मुताबिक, जो भी कंपनी UAE से चावल का निर्यात या दोबारा निर्यात करना चाहती है। उसे आर्थिक मामलों के मंत्रालय में आवेदन कर परमिट लेना अनिवार्य होगा। इसके बिना वह UAE से चावल निर्यात नहीं कर सकेगी। UAE के स्थानीय बाजारों और सुपरमार्केट में चावल की कीमतें बढ़ने की आशंका है, इसलिए वहां की सरकार ने यह फैसला लिया है।

सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है भारत

भारत अमेरिका को बड़े स्तर पर चावल का निर्यात करता है।निर्यात होने वाले चावलों में 25 फीसदी बासमती चावल शामिल है। साल 2022- 23 में सफ़ेद चावल यानी गैर बासमती राईस का निर्यात 4.2 मिलियन डॉलर का हुआ था। उसके पहले साल 2021- 22 में यह आंकड़ा 2.62 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। अमेरिका के अलावा भारत से चावलों का निर्यात स्पेन, इटली, थाईलैंड, स्पेन, श्रीलंका जैसे देशों में होता है। इस साल केवल एक तिमाही में ही 15.54 लाख टन चावलों का निर्यात किया गया है। हर साल तिमाही आधार पर चावलों के निर्यात में वृद्धि होती है। लेकिन इस बार लगा बैन कई देशों के लिए चावल का संकट पैदा कर सकता है।

Sagar Karkare

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