Yatharth Yoddha: यथार्थ योद्धा के 2 साल, सच और सामर्थ की आवाज़
Yatharth Yoddha: 2 years of Yatharth Yoddha, the voice of truth and power
Yatharth Yoddha: आपकी अपेक्षाओं पर खरे बने रहने के लिए हमारा “खरा-खट” होना भी आवश्यक हैं। आप पाठकों की ताकत के दम पर हम ऐसा करेंगे ही। हम आपके लिए, कलम के लिए खरे, शुद्ध बने रहंगे। ये विश्वास हैं। आत्मविश्वास हैं। आपके इसी भरोसे के दम पर हम अखबार की पहली वर्षगाँठ पर आपसे वादा करते है कि हम न डरेंगे, न दबेंगे, न झुकेंगे। सच लिखते रहेंगे। बगेर किसी प्रलोभन के। पूरी ताकत के साथ। सत्य और सामर्थ के साथ।
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बैतूल का भरोसा जितना कोई मामूली बात हैं क्या? वह भी तब, जब शहर में मीडिया के हमसे ज्येष्ठ औऱ श्रेष्ठ प्रकाशन समूह यहां स्थापित है। बरसो बरस से। इन समूहों की भी अपनी प्रतिष्ठा हैं। बरसो बरस की शब्द साधना हैं। बड़ा पाठक वर्ग है। काम करने के तौर-तरीके औऱ संसाधन हमसे कई कई गुना बेहतर हैं। मजबूत टीम, एक्सपर्ट लोग। विषय विशेषज्ञों की कोर टीमें। शासन-प्रशासन, सत्ता प्रतिष्ठानों का “लाड़-दुलार” भी हैं। आर्थिक तंत्र भी मजबूत हैं।
Yatharth Yoddha: बड़े समूहों के बीच छोटा लेकिन दमदार
हम क्या है? हमारे ज्येष्ठ-श्रेष्ठ हम बिरादर अखबारों के समकक्ष? कुछ भी नही। दूर दूर तक शून्य। – “हाथ पैर के दम पर” अखबार का प्रकाशन। न कोई संसाधन। न जेब मे मोटा रोकड़ा। न कोई पीठ पीछे पैसा लगाने वाला। न कोई गॉड फ़ादर। न कोई प्रकाशन की पृष्ठभूमि। न सत्ता प्रतिष्ठान का कोई प्रश्रय। न किसी मंत्री, विधायक, सांसद का शुभाशीष। बावजूद इसके साप्ताहिक यथार्थ योद्धा बतौर एक दमदार अखबार के रूप में मौजूद है। हमारा सपना साकार हुआ। न केवल साकार हुआ, बल्कि आप सबकी अपेक्षाओं पर खरा भी उतरने के लिए प्रयासरत है।
Yatharth Yoddha: जनता का भरोसा, हमारी ताकत
वह जनता जो राजनीती से कोशों दूर है उनका यह भरोसा हैं कि जिस प्रकार की पत्रकारिता कर रहा हैं, वैसा कोई नही कर रहा। ये अखबार सत्य और सामर्थ के साथ जो छाप रहा हैं, ऐसा शहर में और कोई नही करता। ये भी बैतूल वासी का ही कहना है कि इतने कम समय मे यथार्थ योद्धा ने शहर में वो धूम मचा दी है कि सब तरफ साप्ताहिक अखबारों में वो ही छाया हुआ हैं। बिन पढ़े मजा ही नही आता।

Yatharth Yoddha: अखबारों में छाया यथार्थ योद्धा
बेसब्री से इंतजार रहता है कि इस सप्ताह साप्ताहिक यथार्थ योद्धा ने क्या छापा। फिर चाहे वो मामला राजनीति से जुड़ा हो या अपराध से। शहर की तासीर से जुड़ा हो या फिर सामाजिक सरोकारों से। तीज-त्यौहार, पर्व-परम्परा हो या फिर मामला कला- सँस्कृति-उत्सव का हो। आमजन जानता और मानता भी है कि यथार्थ योद्धा बैतूल की असली आवाज बन गया हैं। वो आवाज़ जो कोई बंद नही कर सकता।
Yatharth Yoddha: बैतूल की असली आवाज
हम स्वयं की पीठ नहीं थपथपा रहें हैं। ये बैतूल की बात हैं। भरोसा न हो तो बैतूल से पूछकर देख लीजिए। जनता से जुड़े हर ज्वलन्त मुद्दे पर हमने बेबाकी से वो लिखा, जो साप्ताहिक अख़बार के लिए जरूरी था। हमने सत्ता प्रतिष्ठान के गुणगान नही गाये। न ब्यूरोक्रेसी के सपने परोसे।
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