Betul Garba Sponsorship Tax: गरबे की ताल, टैक्स का सवाल, आयोजकों के हिसाब-किताब की कब होगी पड़ताल?
Betul Garba Sponsorship Tax: The rhythm of Garba, the question of tax, when will the accounts of the organizers be investigated?
Betul Garba Sponsorship Tax: शारदीय नवरात्रि के आते ही शहर में चमचमाते गरबा पंडालों और वीआईपी पासेज की प्री-बुकिंग का धंधा पूरे उफान पर आ चुका है। आस्था और परंपरा के नाम पर लाखों रुपये का टर्नओवर बटोरने की तैयारी कर रहे इन कमर्शियल आयोजनों में राष्ट्र के प्रति वित्तीय और कानूनी जिम्मेदारियों को सरेआम ठेंगे पर रखा जा रहा है। अमूमन ये रसूखदार आयोजक जिला प्रशासन से मैदान, पुलिस से लाउडस्पीकर बजाने और नगर पालिका से भीड़ जुटाने की बुनियादी अनुमतियां लेकर खुद को कानूनन पाक-साफ मान लेते हैं।
लेकिन जब बात देश के प्रति टैक्स और कानूनी जवाबदेही की आती है, तो नियम-पुस्तिकाओं को बंद कर दिया जाता है। ताज्जुब की बात यह है कि लाखों रुपये की स्पॉन्सरशिप और महंगे टिकटों की इस खुली कमर्शियल एक्टिविटी पर स्थानीय कमर्शियल टैक्स विभाग और प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना बैठा है।
Betul Garba Sponsorship Tax: स्पॉन्सरशिप का खेल और रिवर्स चार्ज से परहेज
इन भव्य आयोजनों की चमक के पीछे सबसे बड़ा खेल स्थानीय सर्राफा व्यापारियों, बड़े कोचिंग संस्थानों, कपड़ा शोरूमों और ऑटोमोबाइल डीलर्स से मिलने वाली भारी-भरकम स्पॉन्सरशिप का है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 9(3) के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, किसी भी व्यावसायिक इवेंट को मिलने वाली स्पॉन्सरशिप पर 18 प्रतिशत जीएसटी चुकाना अनिवार्य है।
कानूनन, यदि कोई गरबा मंडल अपंजीकृत संस्था के रूप में यह पैसा ले रहा है, तो रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत स्पॉन्सर करने वाली फर्म को खुद यह टैक्स सरकारी खजाने में जमा करना होता है। लेकिन बैतूल में बिना किसी वैध इनवॉइस और बिना जीएसटी नंबर के लाखों रुपये का यह वित्तीय लेन-देन सीधे तौर पर समानांतर ब्लैक-मार्केट इकोनॉमी को हवा दे रहा है।
Betul Garba Sponsorship Tax: सिंगर्स और साउंड वेंडर्स को लाखों का नकद भुगतान, आयकर नियमों का खुलेआम उल्लंघन
आयोजकों की मनमानी सिर्फ जीएसटी तक सीमित नहीं है, बल्कि आयकर विभाग के बुनियादी नियमों की भी यहाँ धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बड़े शहरों से बुलाए जा रहे नामचीन सिंगर्स, कलाकारों और हाई-टेक साउंड-लाइट सिस्टम के वेंडर्स को लाखों रुपये का भुगतान गुपचुप तरीके से नकद में किया जा रहा है।
Betul Garba Sponsorship Tax: आयकर अधिनियम की धारा 40A(3) साफ कहती है कि व्यावसायिक खर्च के रूप में किसी भी व्यक्ति को एक दिन में ₹10,000 से अधिक का नकद भुगतान पूरी तरह अमान्य है। इसके साथ ही, इन बाहरी कलाकारों को किए जाने वाले बड़े भुगतानों पर नियमानुसार टीडीएस काटना आयोजकों की विधिक जिम्मेदारी है। अगर आज इन मंडलों के कैश-बुक और बैंक खातों का ऑडिट करा लिया जाए, तो काले धन का एक बहुत बड़ा नेटवर्क उजागर हो जाएगा।
Betul Garba Sponsorship Tax: कॉम्प्लीमेंट्री पासेज का मायाजाल
कार्रवाई से बचने के लिए आयोजक अक्सर यह दलील देते हैं कि उन्होंने रसूखदारों और वीआईपी लोगों को मुफ्त या कॉम्प्लीमेंट्री पास बांटे हैं और कोई कमाई नहीं की। लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जीएसटी कानून के शेड्यूल 1 सप्लाई विदाउट कंसीडरेशन के तहत व्यावसायिक लाभ के लिए बांटे गए मुफ्त पासेज की ओपन मार्केट वैल्यू पर भी टैक्स वसूलने का प्रावधान है।
Betul Garba Sponsorship Tax: अफसरों और वीआईपी दीर्घा को खुश करने के लिए बांटे जा रहे इन महंगे पासेज के पीछे का असली वित्तीय गणित अब सीधे तौर पर जांच के घेरे में है। जब एक आम छोटे दुकानदार की मामूली सी बिलिंग पर विभाग का अमला पहुंच जाता है, तो करोड़ों का कमर्शियल मेला लगाने वाले रसूखदारों पर प्रशासन मेहरबान क्यों है? आस्था की ओट लेकर देश के राजस्व को चूना लगाने वाले इन गरबे की ताल पर थिरकने वाले टैक्स चोरों पर जब तक कानूनी डंडा नहीं चलेगा, तब तक यह खुली लूट ऐसे ही चलती रहेगी।
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