Betul Gram Panchayat corruption: भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा, बैतूल जिले की ग्राम पंचायत केकड़ियाकलां में फर्जी भुगतान मामला
Betul Gram Panchayat corruption: Big revelation of corruption, fake payment case in Gram Panchayat Kekariyakalan of Betul district
Betul Gram Panchayat corruption: बैतूल जिले के भीमपुर विकासखंड की केकड़ियाकलां ग्राम पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत में तीन तालाबों के निर्माण कार्य के नाम पर करीब 10.50 लाख रुपये का फर्जी भुगतान किए जाने की बात उजागर हुई है। ग्रामीणों द्वारा मनरेगा पोर्टल पर बिलों की जांच के दौरान यह गड़बड़ी पकड़ में आई।

Betul Gram Panchayat corruption: ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल
ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का आरोप है कि दादाजी कंस्ट्रक्शन, खोरदा के नाम पर तीन तालाबों के निर्माण के फर्जी बिल पेश किए गए, जबकि 30 दिसंबर 2024 तक कोई भी कार्य धरातल पर नहीं हुआ। स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने वास्तव में कार्य किया, उनके नाम से बिल न लगाकर ठेकेदार के नाम से बिल प्रस्तुत किए गए हैं। यह मनरेगा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन और सरपंच व सचिव द्वारा वित्तीय अनियमितता का मामला है।
Betul Gram Panchayat corruption: मनरेगा नियमों की अनदेखी
मनरेगा के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि जिन मजदूरों ने कार्य किया है, उन्हीं के नाम पर भुगतान होना चाहिए। लेकिन इस मामले में ग्रामीणों के अनुसार, काम करने वाले मजदूरों को दरकिनार कर ठेकेदार के नाम से फर्जी बिल बनाकर भुगतान किया गया।
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Betul Gram Panchayat corruption: ग्रामीणों की मांग: उच्च स्तरीय जांच हो
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने इस विषय पर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और जिन लोगों ने वास्तविक कार्य किया है, उन्हें भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

Betul Gram Panchayat corruption: सरपंच-सचिव पर आरोप
ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने ठेकेदार के साथ मिलकर फर्जी बिलों के माध्यम से बड़ा वित्तीय घोटाला करने की योजना बनाई।
Betul Gram Panchayat corruption: प्रशासन से न्याय की उम्मीद
यह मामला न केवल मनरेगा योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह ग्रामीण विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की गंभीर स्थिति को भी उजागर करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।

इस तरह के मामलों में सख्त कदम उठाए जाने से ही ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और विश्वास कायम रह सकता है।
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