Betul Municipality News: बैतूल को जिम्मेदार नहीं जवाबदार चाहिए
Betul Municipality News: Betul needs accountable people, not responsible people
Betul Municipality News: एक पुरानी कहावत है… हाथी के दांत दिखाने के कुछ और, खाने के कुछ और होते हैं... बस यही हाल बैतूल नगरपालिका का है। दरअसल दिखाई ये देता है कि इसे नगरपालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सीएमओ चला रहे हैं, ऐसा नहीं है ये बस दिखाने के लिए ही हैं, चला कोई और रहा है नहीं तो इतने बुरे हाल नहीं होते। स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर तमाम नौटंकी और मोटा खर्च करने के बाद नतीजा यह निकला कि स्वच्छता सर्वेक्षण में बैतूल का पूरा मैनेजमेंट औंधे मुंह गिर गया। 14 वे पायदान पर से सीधे 80 तक लुढक़ गया। वाह! भैया इसे कहते हैं पक्का मैनेजमेंट।

Betul Municipality News: जानकारी देने से कतराते जिम्मेदार
नगरपालिका में बैठे जिम्मेदार किसी भी तरह की जानकारी देने तक में कतराते हैं, न जाने किस बात का डर उन्हें सताता है, यदि कोई कुछ पूछे तो सीधे आरटीआई लगाकर जानकारी ले लो का रटारटाया जवाब आपको मिल जाएगा।
Betul Municipality News: शहर को मैला करने में कोई कसर नहीं
सीएमओ भदौरिया तो भद पिटवाकर गए ही थे लेकि मटसेनिया ने भी शहर को मैला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में शहर के सरकारी और राजनीतिक दिग्गज यह कहते नहीं थक रहे थे कि सर्वेक्षण में बैतूल नंबर- 1 आएगा। लेकिन नंबर एक से ये कितनी पायदान पीछे गया है इसका अंदाजा भी शायद इन जिम्मेदारों को नहीं होगा।

Betul Municipality News: 36 ड्राइवर बटोरते है शहर का कचरा
केवल कहने को ही शहर में नगरपालिका के 36 ड्राइवर सूखा और गीला कचरा बटोरने के लिए दिनभर घूमते हैं, लेकिन फिर भी शहर इतना गंदा है कि आज जिधर नजर घुओगे उधर गंदगी के अलावा कुछ नहीं दिखाई देगा, ऐसे में नंबर वन आने की उम्मीद करना बेकार है।
Betul Municipality News: नेताओं के इशारे पर नाचती नपा
नगरपालिका के कमीशनखोर और नेतानगरी के पेटी कांट्रेक्टरों के भरोसे बैतूल शहर का भला नहीं हो सकता। प्रदेश में शायद ही कोई ऐसी नगर पालिका होगी जो नेताओं के इशारों पर नाचती होगी, प्रदेश में इकलौती नगरपालिका बैतूल ही है जिसके अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक नेताओं के तलुओं में पड़े हैं, जैसा नेता कहेंगे वैसा नगर चलेगा और चलेगा या रेंगेजा इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है, सडक़ें देख लो टूटी-फूटी, स्ट्रीट लाइट कहीं जल रही है कहीं जल चुकी है, सफाई का बेड़ा गरक हो गया है।

काम करवाने वाले दिनरात चक्कर काट रहे हैं, जबकि नगर पालिका में अधिकारियों और कर्मचारियों की अच्छी खासी फौज बैठी है, लेकिन काम के नाम पर वही ढाक के तीन पात वाला कहावत है।
Betul Municipality News: फिर स्वच्छता के नाम पर करोड़ों का खर्च कैसे हुआ?
स्वच्छता सर्वेक्षण में हम अव्वल आने की बजाए गंभीर रूप से बुरी तरह पिछड़ गए हैं और यह हाल केवल बैतूल नगरपालिका का ही नहीं है बल्कि बैतूल जिले की सभी नगरपालिका और नगरपरिषदों के यही हाल हैं, स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर इन सभी का सालाना खर्च जोड़ा जाए तो वह करोड़ों में होगा, यदि प्रदेश में बैतूल 80 पर फिसल गया है तो आखिर खर्च फिर हुआ कहां, किसकी जेब में गया यह गंभीर रूप से जांच का विषय है।
Betul Municipality News: रैंकिंग 14वें से गिरकर 80वें स्थान पर पहुंची
स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में बैतूल नगर पालिका की स्थिति में भारी गिरावट आई है। राज्य स्तर पर नगर की रैंकिंग 14वें से गिरकर 80वें स्थान पर पहुंच गई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी बैतूल 54वें से 67वें स्थान पर आ गया है।
Betul Municipality News: गार्बेज फ्री सिटी श्रेणी में पिछली बार के तीन स्टार के मुकाबले इस बार एक स्टार मिला है। फरवरी से मई 2024 के बीच हुए इस सर्वेक्षण में कुछ क्षेत्रों में बैतूल का प्रदर्शन शानदार रहा। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, आवासीय क्षेत्रों और बाजारों की सफाई, कचरे की प्रोसेसिंग और जलस्रोतों की सफाई में शत-प्रतिशत अंक मिले।

पुराने डंपिंग ग्राउंड के निपटान में 81 प्रतिशत सफलता हासिल की। हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में खराब प्रदर्शन ने समग्र रैंकिंग को प्रभावित किया। कचरे के पृथक्करण में 57 प्रतिशत और सार्वजनिक शौचालयों की सफाई में मात्र 17 प्रतिशत अंक मिले।बता दें कि, स्वच्छता सर्वेक्षण के मापदंड अब व्यापक हो गए हैं।
Betul Municipality News: इनमें शहर की नालियां, फुटपाथ, चौराहों का सौंदर्यीकरण, हरियाली, सार्वजनिक शौचालय और कचरे का पुनर्चक्रण शामिल हैं। गार्बेज फ्री सिटी की अखिल भारतीय रैंकिंग में बैतूल 950वें स्थान पर है, जो शहर प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है। कुल मिलाकर बैतूल नगरपालिका का अब भगवान ही रखवाला है।
Betul Municipality News: नेतागिरी की दखलअंदाजी निगल रही नगरपालिका का भविष्य
दरअसल दो कौड़ी की नेतागिरी बैतूल नगरपालिका का भविष्य निगल रही है, वार्ड पार्षद जैसा जनता का सेवक होने के पद पर बैठे पार्षद नगरपालिका में ऐसे दाखिल होते हैं जैसे वे ही नगरपालिका चला रहे हों वे पार्षद नहीं अलबत्ता शहर के माईबाप हैं, जैसा वे कहेंगे नगरपालिका के अधिकारी वैसा ही करेंगे।
Betul Municipality News: यानी पार्षद ने जो नगरपालिका में कह दिया वह पत्थर की लकीर हो जाती है। इतना ही नहीं बैतूल नगरपालिका के ये हाल हैं कि लाइसेंस लेकर बैठे ठेकेदार आज फालतू घूम रहे हैं जबकि पार्षद ठेकेदारी कर रहे हैं, भले ही यह ऑन रिकार्ड नहीं है, लेकिन बैतूल नगरपालिका में या तो पार्षद का भाई ठेकेदार मिलेगा, या 50 प्रतिशत का पार्टनर ठेकेदार मिलेगा नहीं तो पूरा काम ही ऑफ रिकार्ड हो जाएगा और भारी बजट भी निकल जाएगा।

Betul Municipality News: नपा की मजबूरी
ये सारी खुरापात आलाकमान से लेकर आला अधिकारियों तक तो पता है लेकिन न जाने कौन से मजबूरी है जो दाल में नमक तो चल जाता है पर नमक में दाल चले ये हजम होने वाली बात नहीं है, या तो जिम्मेदारों की नसें भी कहीं न कहीं इन्हीं छुटभैयों ने दबा रखी हो कौन जाने।
Betul Municipality News: नगरपालिका का भविष्य अंधकारमय
खैर जो भी हो लेकिन बैतूल नगरपालिका का भविष्य अंधकारमय ही है। कोई भी काम या नगरपालका की कोई भी शाखा पटरी पर नहीं है, सब बेपटरी होकर काम चल रहा है। नगरपालिका यानी नगर को पालने वाला वह संस्थान जो छोटे से लेकर बड़े तक का ध्यान रखता है, लेकिन बैतूल नगर पालिका में केवल बड़ों का और दबंगों का ध्यान रखा जाता है इसके कई उदाहरण है लिखने के लिए लेकिन लिखने का कोई मतलब इसलिए नहीं निकलता क्योंकि जो भैया कहेंगे वही होगा वह नहीं होगा जो आप चाहते हैं।
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