Betul Samachar: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रेंगा कोरकू की हर्षोल्लास से मनाई जयंती, युवाओं के प्रेरणास्रोत थे वीर रेंगा कोरकू, टंट्या मामा भील के साथ मिलकर अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ लड़ी थी लड़ाई: कुमरे
Betul Samachar: The birth anniversary of freedom fighter Renga Korku was celebrated with enthusiasm, Veer Renga Korku was an inspiration to the youth, along with Tantya Mama Bhil fought against the British rule: Kumre
25 जुलाई को भैंसदेही महाविद्यालय से कलेक्ट्रेट तक निकलेगी रामजी भाऊ कोरकु नामकरण पद यात्रा

Betul Samachar: (बैतूल)। आदिवासी मंगल भवन भैंसदेही में शनिवार 22 जुलाई को वीर क्रांतिकारी, महानायक, वीर योद्धा रेंगा कोरकू की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए जयस के प्रदेश संयोजक जामवंत सिंह कुमरे ने कहा कि वीर योद्धा रेंगा कोरकू आदिवासियों के मसीहा रॉबिनहुड के नाम से मशहुर थे। उन्होंने टंट्या भील के साथ कंधा से कंधा मिलकर अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ लडा़ई लड़ी। उन्होंने कहा कि भैंसदेही वीरों की भूमि है, इसलिये आदिवासी युवाओं का समाज के प्रति जोश- जुनून को देखकर महसूस हुआ कि, बहुत ही जल्द क्षेत्र और समाज में परिवर्तन होगा।
भैंसदेही के क्षेत्रीय आदिवासी क्रांतिकारी के नाम से वीर रामजी भाऊ कोरकू हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। क्षेत्र के लोग भी चाहते है कि भैंसदेही महाविद्यालय का नाम रामजी भाऊ कोरकू होना चाहिए। रामजी भाऊ कोरकू नाम होने से क्षेत्र के आदिवासी उनके जीवन इतिहास और उनके संघर्ष को समझ पाएंगे एवं उनके जैसे वैचारिक बन सकेंगे।
गोंडी भाषा में गीत गाकर बताई रेंगा कोरकू की वीरता
तुलाराम उइके मप्र आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष ने कहा हमारे समाज मे हमें वीर रेंगा कोरकू बनने कि आवश्यकता है, क्योंकि उनके जैसे बनने से हमारे समाज मे अत्याचार शोषण बंद होगा एवं अत्याचार शोषण करने से लोग डरेंगे। दिलीप वाड़िवा ने कहा कि हमारे समाज में बहुत से ऐसे वीर क्रांतिकारी है जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण त्याग दिये पर उनका नाम आज भी गुमनाम है, हमें मिलकर गुमनाम आदिवासी क्रांतिकारियों का मान और सम्म्मान दिलाना होंगा। कोरकू गायक सालिकराम बारस्कर द्वारा जयंती के अवसर पर कोरकू एवं गोंडी भाषा में गीत गाया एवं गीत के द्वारा रेंगा कोरकू के जीवन संघर्ष को बताया।
25 को भैंसदेही से कलेक्ट्रेट तक निकलेगी पदयात्रा
रामजी भाऊ कोरकू नामकरण समिति के अध्यक्ष महादेव बेठे ने कहा कि वीर रेंगा कोरकू हमारे समाज का गौरव है, उनके इतिहास से हमें सीखना है एवं उनके जैसे बनना है, क्योंकि आज आदिवासियों पर अत्याचार की सीमाएं हद से ज्यादा हो गई। करण चढ़ोकार उपाध्यक्ष ने कहा 25 जुलाई को भैंसदेही महाविद्यालय से कलेक्ट्रेट बैतूल तक रामजी भाऊ कोरकु नामकरण हेतु पैदल यात्रा प्रारम्भ होंगी। कार्यक्रम में मंच का संचालन रमेश (सोनू) पांसे द्वारा किया गया।
रेंगा कोरकू जयंती के अवसर पर तुलाराम उइके, जय अहाके , मोहनलाल वर्टी, कोरकू गायक मुंगीलाल अखंडे, कोरकू, प्रह्लाद धुर्वे, कलाकार किसन कनेकर, धर्मपाल कवडे जयस अध्यक्ष आठनेर, विजय मर्सकोले, शुभम बारस्कर, करण चढ़ोकार, सुरेश कुमरे, प्रहलाद धुर्वे, धीरज उइके, प्रितेश सोनारे, रामचंद अखंडे, राजेश वाडिवा, दिनेश जावरकर जयस अध्यक्ष कौड़िया, हरिश सालवे, रतिराम बारस्कर सातनेर एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ता कार्यक्रम में मौजूद रहे।



