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Betul Sub Registrar Office News: बाबूजी क्या गए ‘नानू’ के तो अच्छे दिन आ गए

Betul Sub Registrar Office News: As soon as Babuji left, Nanu's good days have come.

Betul Sub Registrar Office News: कहते हैं सरकारी दफ्तरों में नियम-कानून की रसीदें कटती हैं, लेकिन इन दिनों स्थानीय उप-पंजीयक कार्यालय के गॉसिप गलियारे में एक अलग ही इकोनॉमिक्स चल रही है। दफ्तर के असली बड़े बाबू क्या कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर गए, पीछे से कुर्सी संभाल रहे हमारे नानू जी ने अपनी खुद की नई वीआईपी रेट-लिस्ट ही लागू कर दी है।

Betul Sub Registrar Office News

Betul Sub Registrar Office News: अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार जिस कागज की सत्यापित नकल देने के लिए सिर्फ ₹300 का आधिकारिक शुल्क लेती है, नानू जी के दरबार में उस सर्विस का कथित बिल सीधे ₹1500 आ रहा है।यानी सीधे पांच गुना का बंपर मुनाफा।

Betul Sub Registrar Office News: महंगाई का गणित

चर्चा है कि जब कुछ जागरूक नागरिकों ने नानू जी से इस महंगाई का कारण पूछा, तो उन्होंने जो गणित समझाया, उसे सुनकर अच्छे-अच्छे चार्टर्ड अकाउंटेंट भी सिर पकड़ लें। सूत्रों का दावा है कि नानू जी के कथित फॉर्मूले के मुताबिक ₹500 बड़े साहब की जादुई कलम के हैं जो कागजों पर साइन करने के लिए खर्च होते हैं। ₹200 साहब की एक खास महिला मित्र के खाते में जाते हैं जो रसीद कंज्यूम कराने का हुनर जानती हैं। बाकी का बचा हुआ बैलेंस नानू जी का अपना हार्ड वर्क और रिकॉर्ड रूम से पुरानी फाइलें ढूंढने का सेवा शुल्क है।

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Betul Sub Registrar Office News: प्रतिबंधित रिकॉर्ड रूम में फोटोशूट का भी बंपर ऑफर?

दफ्तर के गलियारों में तैरती एक और खबर के मुताबिक, नानू जी सिर्फ पैसों की वसूली में ही नहीं, बल्कि विशेष मेहमाननवाजी में भी काफी आगे हैं। सूत्रों का कहना है कि बाबूजी की गैर-मौजूदगी में एक निजी स्कूल की मैडम दफ्तर पधारीं, तो नानू जी ने नियमों को ताक पर रखकर उन्हें न केवल अति-संवेदनशील रिकॉर्ड रूम में जाने की छूट दे दी, बल्कि पुरानी फाइलों के धड़ाधड़ फोटोशूट करने की अनुमति भी दे दी। चर्चा तो यह भी है कि नानू जी ने खुद गाइड बनकर पुरानी इबारत का अनुवाद भी करके दिया, जिसकी गोपनीय शिकायत भी ऊपर तक पहुंचने की खबर है।

Betul Sub Registrar Office News: साहब की ठीक नाक के नीचे…’ऑल इज वेल’?

सबसे मजेदार बात यह है कि दफ्तर के भीतर चल रहा यह सारा खेल उप-पंजीयक साहब की ठीक नाक के नीचे चल रहा है। अब साहब सचमुच इस गणित से अनजान हैं या फिर गांधी जी के तीन बंदरों की तरह सब कुछ देखकर भी अनजान बने हुए हैं, यह इस समय विभाग का सबसे बड़ा सस्पेंस बना हुआ है।

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Kartik Trivedi

Kartik Trivedi is the Editor in Chief of Yatharth Yoddha Digital Desk and He is also the youngest Publisher and Editor of Medhavi Samachar.

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