Betul News : बांध में भरपूर पानी होने के बाद भी सिंचाई से वंचित 42 गांव के हजारों किसान
Betul News : Despite abundant water in the dam, thousands of farmers of 42 villages deprived of irrigation. Hundreds of farmers of Prabhat Pattan development block reached the Collectorate under the leadership of District Panchayat member and District Vice President
Betul News : पारसडोह बांध में भरपूर पानी होने के बावजूद विकासखंड प्रभात पटृन के 42 गांव के हजारों किसान सिंचाई से वंचित हो रहे हैं जबकि शासन द्वारा इन किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए विभाग को निश्चित राशि भी उपलब्ध की जा रही है। इसके बावजूद किसानों को सिंचाई योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के सैकड़ो किसानों ने गुरुवार को जिला पंचायत सदस्य उर्मिला गवहाडे जनपद उपाध्यक्ष देवीराम बनखेडे, किसान नेता मकरध्वज सूर्यवंशी के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पारसडोह जलाशय की सुक्ष्म सिंचाई प्रणाली से सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की। मौके पर प्रकाश पाल जनपद सदस्य प्रभात पट्टन, राधेश्याम सोलंकी, रमेश हरोडे, लक्ष्मण राव देशमुख, शंकर बर्दे, नामदेव मगरदे, वामनराव मगरदे, रामचंद्र वामनकर सरपंच काजली प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कलेक्टर को सौंपे आवेदन में किसानों ने बताया कि जिला कार्यालय की अधिसूचना के अनुसार पारसडोह जलाशय के कमाण्ड क्षेत्र में आने वाले 42 गांव के लगभग 13 हजार किसानों ने अपने खेतों में रबी वर्ष 21-22 एवं 22-23 मे गेंहू की फसल लगाई थी।किसानों के बार-बार निवेदन एवं सी.एम. हेल्पलाईन ठेकेदार के अधिकारी कर्मचारी एवं विभाग के अधिकारियों से निवेदन के बाद भी सिंचाई हेतु पानी प्रापत नही हुआ है किसानों को केवल आश्वासन मिला है कि आगामी वर्ष में सिंचाई हेतु अच्छा पानी देंगें तथा किसानो की फसल सुख गई। पुनः रबी वर्ष 2023-24 में श्रीमान कलेक्टर महोदय की अधिसूचना जारी होने के पश्चात सौभाग्य से 27-28 नवम्बर को अच्छा मावठा गिरने से पारसडोह जलाशय के कमाण्ड क्षेत्र में आने वाले 42 ग्रामों के लगभग 13 हजार किसानों ने 19785 हे. क्षेत्र में गेहू गेहू की फसल लगा दी जिसमें सिंचाई के पानी हेतु किसानों द्वारा ठेकेदार के अधिकृत अधिकारी देवेश नागले एवं कर्मचारियों से मौखिक एवं लिखित एवं व्यक्तिगत और दूरभाष पर संपर्क करने के उपरान्त भी किसान पानी प्राप्त करने में असमर्थ रहा।साथ ही विभाग के अधिकारी शिवकुमार नागले उपयंत्री, मनोज चौहान अनुविभागीय अधिकारी एवं कार्यपालन यंत्री विपिन वामनकर से संपर्क करने के बाद भी फसल की सिंचाई हेतु पानी प्राप्त करने में कमाण्ड क्षेत्र का किसान असफल रहा है। कृषकों ने सी.एम हेल्पलाईन एवं जनसुनवाई में जाकर सिंचाई करवाने के लिए मदद मांगी लेकिन अधिकारियों द्वारा झूठे आश्वासन देकर सी.एम. हेल्पलाईन बंद करवाई गई एवं जिला प्रशासन को गुमराह करने के कारण कमाण्ड क्षेत्र का कृषक सिंचाई प्राप्त करने में असफल रहा। पुरजोर कोशिश करने के बाद भी फसल सुख गई और किसान हताश होकर पुन: जिला प्रशासन से गुहार लगाने को मजबूर है।
— प्रति हेक्टेयर 75 हजार का हो रहा नुकसान —
किसानों का कहना है कि फसल सुखने के कारण किसान की जुताई खाद बीज प्रति हेक्टेयर 20 हजार रुपये का खर्च एवं फसल पकने से प्रति हेक्टेयर 75 हजार रूपये की शुध्द हानि हुई है। किसान अब 95 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर की मांग के लिए मजबूर है। किसानों ने रबी फसल गेंहू का भौतिक सत्यापन एवं फसल उत्पादन का सत्यापन संयुक्त टीम बनाकर एक सप्ताह के भीतर करते हुए दोषी ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों पर उचित कार्यवाही करने की मांग की। किसानों ने बताया कि क्षेत्र की किसानों का दुर्भाग्य है कि बांध में पानी है, भरपूर बिजली है शासन द्वारा भरपूर पैसा उपलब्ध रहने के बाद भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा। उक्त योजना में प्रतिवर्ष लगभग 4 करोड़ रूपये का बिजली बिल शासन पर अधिरोपित हो रहा है। शासन के नियमानुसार कृषकों को ओ.एम.एस के प्रत्येक आउटलेट से बारी-बारी से प्रति छः घण्टों में प्रति हेक्टेयर सिंचाई प्राप्त होना था एवं प्रति 9 दिन के अंतराल में प्रति 10वें दिन पानी देकर फसल को पकाने की जिम्मेदारी ठेकेदार एवं विभाग की थी, लेकिन उक्त दोषपूर्ण कार्यों के कारण 42 ग्रामों के एक भी कृषक को शासन के नियमानुसार सिंचाई हेतु पानी नहीं मिला है।
— किसानों की यह है मांग–
पारसडोह योजना के प्रत्येक किसानों के सिंचाई बिल तुरन्त माफ किए जाए। प्रत्येक किसान को फसल हानि के रूप में दो लाख पच्यासी हजार रूपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाए और दोषी ठेकेदार एवं विभागीय अधिकारियों पर प्रकरण दर्ज कर पीड़ित किसानों का न्याय दिलाया जाए। योजना का टूट फूट कार्य, निश्चत गहराई में पाईपलाइन, ओ.एम.एस पेटी का सुधार कार्य एवं नदी नालो में योजना के 3 वर्षों से लापरवाही पूर्ण पड़े पाईपो को निश्चित गहराई पर रखकर कांक्रीट कार्य करवाकर योजना के शेष रहे किसानो के खेतो में पाईपलाईन बिछायी जाए। सर्वश्रेष्ठ सिंचाई प्रणाली को बंद होने की कगार से बचाया जाए।
— वर्धा नदी पर वर्धा फेस 2 निर्माण की मांग —
किसानों ने बताया कि मुलताई तह. के ग्राम शेरगड़ (बोरगांव के पास ) मध्यम परियोजना के डाऊन स्ट्रीम में वर्धा फेस 2 हेतु उत्तम प्राकृतिक स्थल है जिसे तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा बांध बनवाने पूर्व में भी अनुशंसा की गई। किसानों ने मांग की है कि उक्त परियोजना का सर्वे कराकर बैतूल जिले के वर्धा एवं पारसडोह परियोजना से ग्राम आष्टा, मासोद, जामगांव देवझिरी, दातोरा, वण्डली, गंगापुर, इसापुर, वरूड, पट्टा, सांवगी, वायगांव, साईखेडा, सिरडी सहित 14 ग्रामों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।
— नहरों में सुधार एंव मरम्मत कार्य करवाने की मांग —
किसानों ने इटावा लघु सिंचाई योजना, अमरावतीघाट लघु सिंचाई योजना, परसोडी लघु सिंचाई योजना, जम्बाडी लघु सिंचाई योजना, सुखाखेडी (मोही) लघु सिंचाई योजना, परसठानी लघु सिंचाई योजना, बघोली लघु सिंचाई योजना, पोहर (साईखेडा) लघु सिंचाई योजना, उभारिया लघु सिंचाई योजना, बोरगॉव लघु सिंचाई योजना की नहरों के सुधार का कार्य करवाने की कार्यवाही करने की भी मांग की।



