Betul Garba Event: गरबा आयोजन के नाम पर चल रहा था कमाई का धंधा, शासन को लगा दिए राजस्व का चूना
Betul Garba Event: A business of earning money was going on in the name of Garba event, the government was cheated of revenue
Betul Garba Event: शहर में आयोजित गरबा कार्यक्रमों ने धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के नाम पर व्यापारिक लाभ का स्वरूप ले लिया था। जहां जनता को संस्कृति का हिस्सा बनाने की जगह, आयोजकों ने राजस्व की चोरी कर सरकार को लाखों का चूना लगाया है। गरबा आयोजन में टिकट बेचकर भारी कमाई की गई है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में मनोरंजन शुल्क और जीएसटी की चोरी की गई है।

Betul Garba Event: मीडिया को बांटे गए मुफ्त पास, बाकी जनता से उगाही
आयोजन के आयोजकों ने मीडिया को चुप रखने और किसी भी प्रकार की आलोचना से बचने के लिए पत्रकारों को मुफ्त पास वितरित किए गए थे, जबकि अन्य दर्शकों को 300 से 800 रुपये तक के टिकट बेचे गए थे। सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि टिकट बिक्री से लाखों रुपये की कमाई हुई है, लेकिन इस पर जीएसटी का भुगतान नहीं किया गया।
Betul Garba Event: शासन की अनदेखी
ऐसे आयोजनों पर प्रशासन की निगरानी होती है ताकि मनोरंजन शुल्क सही से जमा हो सके। लेकिन बैतूल के कलेक्टर इस मामले में मूकदर्शक बने हुए थे। जनता का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण शासन को भारी राजस्व हानि हो रही है।

Betul Garba Event: प्रायोजकों का भी बड़ा रोल
इन आयोजनों में कई बड़े ब्रांड प्रायोजक बने हुए थे, जिनकी ब्रांडिंग गरबा स्थल पर होल्डिंग्स और बैनर्स के जरिए की जा रही थी। यह सभी गतिविधियां आयोजन के बड़े व्यावसायिक मंसूबों की ओर इशारा करती हैं, जिससे सरकार को लाखों का नुकसान हो रहा है।
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Betul Garba Event: नैतिक जिम्मेदारी से बचते अधिकारी
शहर के कलेक्टर की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह राजस्व चोरी की घटनाओं को रोके, लेकिन इस मामले में उनकी निष्क्रियता सवालों के घेरे में है। जनता को उम्मीद है कि इस मामले की जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

Betul Garba Event: युवाओं का कहना
“गरबा जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में यदि टैक्स चोरी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जाता है, तो यह समाज के लिए एक बड़ा धक्का है। प्रशासन को तुरंत इस मामले पर ध्यान देना चाहिए ताकि जनता को न्याय मिल सके और सरकार के राजस्व का नुकसान न हो।”
सुमित अहिरवार (युवा समाजसेवी)
“यह धार्मिक आयोजन जनता के लिए होना चाहिए, न कि कुछ लोगों की जेबें भरने के लिए। हम चाहते हैं कि प्रशासन तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे और टैक्स चोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे।”
कमलेश बुंदेले (युवा समाजसेवी)
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