Indore Crime News: एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज दुष्कर्म के मामलों में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक अध्ययन में पाया गया है कि ऐसे 75% से अधिक मामले कोर्ट में साबित नहीं हो पा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह पीड़िताओं का परिवार के दबाव में झूठे आरोप लगाना है।

इंदौर जिला कोर्ट में पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पीड़िताओं ने खुद कोर्ट में स्वीकार किया है कि उन्होंने दबाव में आकर केस दर्ज कराया था। एक्सपर्ट जस्टिस शांतनु केमकर (रिटायर) के साथ मिलकर किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है।
- यह भी पढ़े: Betul Apprenticeship Fair: बैतूल में प्रधानमंत्री नेशनल अप्रेंटिसशिप मेला, युवाओं के लिए सुनहरा मौका
Indore Crime News: शादी और मुआवजा हैं बड़ी वजहें
अध्ययन के अनुसार, बरी होने वाले करीब 60% मामलों में पीड़िताओं ने बाद में आरोपियों से शादी कर ली। कुछ मामलों में तो पीड़िताएं आरोपियों को निर्दोष साबित कराने के लिए खुद ही कोर्ट में गईं और यहां तक कि आरोपियों के वकीलों की फीस भी चुकाई।

Indore Crime News: दहेज और सामाजिक दबाव
आदिवासी समाज में कुछ समूहों में लड़की के लिए दहेज की परंपरा है। यदि कोई लड़की प्रेम विवाह कर लेती है तो परिजन उससे वंचित रह जाते हैं। ऐसे में वे मुआवजे के लिए झूठा केस दर्ज करा देते हैं।
Indore Crime News: एक नजर में
- एससी-एसटी एक्ट के 75% से अधिक मामले कोर्ट में साबित नहीं हो रहे।
- पीड़िताएं परिवार के दबाव में झूठे आरोप लगा रही हैं।
- बरी होने वाले 60% मामलों में पीड़िताएं आरोपियों से शादी कर रही हैं।
- मुआवजा और दहेज प्रमुख कारण हैं।
Indore Crime News: यह मामला क्यों है महत्वपूर्ण?
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि कानून का दुरुपयोग कैसे हो रहा है। झूठे आरोप लगाने से न केवल निर्दोष लोगों का जीवन बर्बाद होता है बल्कि कानून व्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ता है।
- यह भी पढ़ें: Betul Police News: बैतूल पुलिस को खुला चैलेंज
___________________________________
इसी प्रकार की जानकारी और समाचार पाना चाहते हैं तो,हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़े व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए “कृपया यहां क्लिक” करे।
साथ ही हमारे इंस्टाग्राम के जुड़ने के लिए यहां “क्लिक करें”



