District Transport Service News: बैतूल से इंदौर तक सफर करने वाले यात्रियों के लिए इस बार की दिवाली “दर्द” बन गई। क्योंकि जो बसें लोगों को आराम और सुविधा देने के लिए चलती हैं, उन्हें डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट सर्विस (DTS) वालों ने सीधा ट्रक बना डाला! जहां बैठने की सीटें थीं, वहां भी लगेज , और जहां लगेज रखना था, वहां भी लगेज मतलब यह कहे कि पूरी बस में पैसेंजर से ज्यादा लगेज ही लगेज और ये हालात तब हैं जब किराया दोगुना वसूला गया यानी किराया भी “फर्स्ट क्लास” और सुविधा “फुटपाथ क्लास” कहे तो दाम भी बड़ा और आराम भी घटा।

District Transport Service News: त्यौहार पर लूट का ‘ट्रांसपोर्ट स्पेशल’
त्यौहार का नाम आते ही डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट वालों की नीयत बदल गई। इंदौर-बैतूल रूट की बसों में किराया सीधा दोगुना कर दिया गया। रेडबस, अभीबस और डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट की खुद की वेबसाइट तीनों पर रेट में एक जैसी लूट दिखी। यात्रियों को लगा कि “सरकारी दर” होगी, लेकिन यहां तो “त्यौहारी दर” निकली। पहले 400 में आने-जाने का किराया था, अब 800 से नीचे कोई टिकट नहीं मिली।
District Transport Service News: ओवरलोडिंग से जान पर खतरा
बसें यात्रियों से ठसाठस भरी हुई थीं फिर भी हर जगह लगेज भर लिया गया था, मानो कोई ट्रक में सफर कर रहे हों। बस के ऊपर भी लगेज और बस के अंदर भी लगेज ही लगेज, यात्रियों को असुविधा तो हुई ही हुई साथ ही जान हानि का खतरा भी लगा ही था, लेकिन प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा। ना पुलिस की रोकटोक, ना RTO की कार्रवाई लगता है डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट के बस मालिक ने सुरक्षा की परिभाषा ही बदल दी है: “जो बच गया वही सुरक्षित!”

District Transport Service News: प्रशासन और RTO पर सवाल
बैतूल जिले में डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट की बसों की मनमानी अब आम हो चुकी है। त्यौहार के नाम पर किराया बढ़ाना, ओवरलोडिंग करना और यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करना इनकी नई “बिज़नेस स्ट्रैटेजी” बन गई है। अब सवाल ये उठता है कि RTO विभाग और प्रशासन आखिर कर क्या रहा है? क्या कोई बड़ा हादसा होने के बाद ही नींद खुलेगी? या ये “त्यौहार की लूट” हर बार ऐसे ही चलती रहेगी?

District Transport Service News: यथार्थ सवाल
- DTS बसों की ओवरलोडिंग पर एक्शन कब होगा?
- दोगुना किराया वसूलने पर कौन जिम्मेदार है?
- त्योहार के नाम पर यात्रियों की जान से खेलना अपराध नहीं?
त्योहार की खुशियां मनाने निकले लोग, DTS की बसों में डर के साए में सफर कर रहे हैं। प्रशासन अगर अब भी नहीं जागा, तो अगली दिवाली किसी के लिए आखिरी सफर बन सकती है।
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✍️ यथार्थ योद्धा, इंदौर-बैतूल यात्रा विशेष रिपोर्ट
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