Shri Shiv Mahapuran Katha : जो भगवान के सच्चे भक्त होते है, उन्हें किसी भी प्रकार का अहंकार नही होता: नरेन्द्र परसाई
Shri Shiv Mahapuran Katha : Those who are true devotees of God, they do not have any kind of ego: Narendra Parsai
आज अंतिम दिन की कथा, भंडारा प्रसादी के साथ होगा समापन
Shri Shiv Mahapuran Katha : बैतूल। श्री विश्वकर्मा मंदिर प्रांगण में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के छठवें दिन नर्मदापुरम से पधारे बड़े गुरुदेव नरेन्द्र परसाई द्वारा समस्त श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जो भगवान के सच्चे भक्त होते है उन्हें किसी भी प्रकार का अहंकार नही होता है।हमे सदा ही हमारे ज्येष्ठों का आदर करना चाहिए, प्रणाम करने से आयु में वृद्धि होती है।
कलयुग में भी ऋषि मार्कण्डेय अपने पुण्य कर्मों और सबके आदर के कारण अमर है। प्रणाम करने से यश, कीर्ति और विद्वत्ता मिलती है। हमें सदैव सहज और सरल बनकर रहना चाहिए। उसके पश्चात भागवत भूषण आचार्य पुष्कर परसाई द्वारा भगवान कार्तिकेय के पुत्रों का वर्णन करते हुए उनके किये तप और भगवान द्वारा उन्हें दिए गए वर के बारे में विस्तार में बताया।
(Shri Shiv Mahapuran Katha)ब्रम्हांड में जो भी दृष्टिगोचर वस्तुएं है, उनका निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा द्वारा किया गया है। भगवान विश्वकर्मा ही भगवान गणेश के ससुर है। जिसके पास पुण्यो का भंडार है, उनको मारना कठिन होता है। तत्पश्चात आचार्य द्वारा महाशिवरात्रि की कथा विस्तृत में सुनाई गई।

गुरुदेव ने बताया जो शिवरात्रि को भगवान का समर्पण के साथ अभिषेक करता है उसे समस्त पुण्यों का फल मिलता है, जो भी भगवान को प्रभु श्रीराम का नाम लिखकर 108 बिल्वपत्र अर्पण करता है, उन्हें राजसूय यज्ञ का फल मिलता है। समस्त सनातनियों को शिवरात्रि की प्रतीक्षा होनी चाहिए, उस दिन हम कैसे भगवान भोले की पूजा करें और उन्हें कैसे खुश करें।
वर्तमान परिदृश्य में जैसे जैसे हमें निष्ठा और धन की प्राप्ति होती है, हम वैसे वैसे भगवान से दूर होते जा रहे है, जबकि हमें अधिक से अधिक भगवान की भक्ति करनी चाहिए। भगवान द्वारा दिये गए जीवन और सांसारिक सुखों के लिए हमें भगवान को धन्यवाद करना चाहिए।
हमें भगवान को दूसरों के घर के फूल बिना अनुमति तोड़ के नही अर्पण करना चाहिए, अन्यथा हमें उसका कोई फल नही मिलता। ततपश्चात आचार्य ने त्रिपुंड, भस्म और भगवान को अर्पण होने वाली समस्त वस्तुओं के बारे में सविस्तार बताया। उन्होंने कहा कि सनातनियों को तिलक लगाना चाहिए, जिससे हमारे मन को शांति मिलती है और मन एकाग्र रहता है।
ब्रम्हाण में समस्त यज्ञ का फल देने वाले भगवान भोलेनाथ ही है।(Shri Shiv Mahapuran Katha)

आज कथा में भगवान लक्ष्मी नारायण की अलौकिक झांकी के दर्शन भी श्रद्धालुओं द्वारा किये गए। कथा में जिला उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे, शैलेन्द्र कुंभारे, जगन उइके, सुनील भलावी, जिला पंचायत सदस्य विवेक जावलकर मनोज वर्मा, चंद्रभान सिंह चंदेल, अलकेश वाघमारे, कुणाल शर्मा, जितेंद्र कपूर, आशु किलेदार, बबलु खुराना, रामकिशोर बोरबन, नारायण पवार, राजसिंह परिहार, श्रीमती मीरा एंथोनी, विक्रम वैध कोठीबाजार भाजपा मंडल अध्यक्ष, पार्षद एवं सभापति विकास प्रधान, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष कोठीबाजार वरुण धोटे, कृष्णा लोखंडे तथा विश्वकर्मा महापंचायत के प्रदेश संयोजक राजेश विश्वकर्मा, किशन मालवी, प्रदेश महामंत्री श्री विश्कर्मा महापंचायत, देवेंद्र बबलु मालवी प्रदेश उपाध्यक्ष, जितेंद्र मालवी जिला अध्यक्ष श्री विश्वकर्मा महापंचायत उपस्थित रहे।
(Shri Shiv Mahapuran Katha)श्री शिव महापुराण का 13 अगस्त को भंडारा प्रसादी एवं अंतिम दिन की कथा के साथ समापन किया जाएगा। भंडारे का समय दोपहर 1 बजे से होगा। आयोजन समिति ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से श्री विश्वकर्मा मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा में पधारकर कथा, भंडारा प्रसादी का पुण्य लाभ अर्जित करने का आग्रह किया।



