Betul News : वोट के माध्यम से कैंसर से जंग लड़ेंगे हेमंत चन्द्र दुबे, वोट फार नोटा का देंगे नारा
Betul News: Hemant Chandra Dubey will fight cancer through vote, will give slogan of Vote for NOTA
राजनीतिक दलों की लड़ाई से दूर कैंसर की लड़ाई में मांगा जनता का साथ

Betul News : (बैतूल)। कैंसर जैसी घातक बीमारी से चार साल संघर्ष कर जीतने वाले 50 साल के बबलू दुबे इसके बाद से चैन से नहीं बैठे। उनके मन में कैंसर को जड़ से खत्म करने का एक जुनून है। जहां भी कैंसर पीड़ित कोई मिलता है उसे पहले तो बीमारी से लड़ने का हौसला देते हैं, उसके बाद बीमारी का सही इलाज बताकर उसे राह दिखाते हैं। अब तक बबलू दुबे आठ सैकड़ा कैंसर पीड़ितों की मदद कर चुके हैं।
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इसके अलावा विश्व कैंसर दिवस पर कैंसर जागरूकता के कार्यक्रम भी करते आ रहे हैं। अब उन्होंने लोकतंत्र में रहकर वोट के माध्यम से कैंसर से जंग लड़ने का आव्हान किया है। सारी उम्र पैदल चलकर कैंसर जागरूकता करने का निर्णय लेने वाले हेमंत चंद्र बबलू दुबे के हौसले का ही परिणाम है कि आज उनकी जंग में पूरा बैतूल उनके साथ खड़ा हुआ है, अब लोकतंत्र के महापर्व में उन्होंने कैंसर के खिलाफ वोट के जरिए लड़ाई लड़ने का बिगूल फूंक दिया है।
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बबलू दुबे का मानना है कि सरकार आती है जाती है और सभी विकास के नाम पर कैंसर को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैंसर जैसी घातक बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए लोकतंत्र के इस महापर्व में भी अभियान चलाएंगे। उन्होंने बताया कि जब तक देश में नोटा की व्यवस्था नहीं थी तब चुनाव में अगर किसी को लगता था कि उनके अनुसार कोई भी उम्मीदवार योग्य नहीं है, तो वो लोग वोट नहीं डालने ही नहीं जाते थे और इस तरह से उनका वोट जाया हो जाता था।
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ऐसे में मतदान के अधिकार से लोग वंचित रह जाते थे। ऐसे में साल 2009 में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को नोटा का विकल्प उपलब्ध कराने संबंधी मंशा से अवगत कराया था। लेकिन इतने सालों में भी जनता नोटा के प्रति जागरूक नहीं हो पाई है, यही कारण है कि राजनीतिक पार्टियां मानवता के हितों को अनदेखा कर रही है। उन्हें नोटा की ताकत से अवगत कराने के उद्देश्य से वे जिले प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाएंगे।
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कैंसर पीड़ितों के लिए समर्पित कर दिया पूरा जीवन
गौरतलब है कि बबलू दुबे दुबे को सन 2011 में ब्लड कैंसर हो गया था। चार साल तक कैंसर से लड़ते हुए 2015 में इस बीमारी पर जीत हासिल की। कैंसर से फाइट करने के बाद बबलू दुबे ने अपना पूरा जीवन कैंसर जागरूकता और हॉकी के लिए समर्पित कर दिया। 2015 से बबलू दुबे जिले सहित आसपास के कैंसर पीड़ितों को जीने का हौसला देकर बीमारी से लड़ने की प्रेरणा देते हैं। बबलू दुबे ने बीमारी से ठीक होने के बाद अपना पूरा जीवन कैंसर पीड़ितों के लिए समर्पित कर दिया है वे लगातार कैंसर जागरूकता का काम कर रहे हैं।
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कौन करेगा कैंसर कारकों का विरोध
बबलू दुबे का मानना है कि सरकारें बनाई जाती हैं?बेतहाशा विकास के काम किए जाते हैं जिससे प्रकृति का विनाश किया जाता हैं? नागरिक वोट देता है बदले मे उसके हिस्से मौत आती है। सरकारों ने नागरिक की बुरी आदत का किस तरह से बेतहाशा फायदा उठाया है। कौन करेगा इस सब कैंसर कारकों का विरोध? इसलिए मानवता को बचाने के लिए नोटा की बटन दबाए।
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