Betul fireworks godown: गोदाम में धमाका, मुनाफे का तमाशा! बैतूल में पटाखों का काला कारोबार बेखौफ जारी
Betul fireworks godown: Explosion in warehouse, profit-making spectacle! The illegal firecracker trade continues unabated in Betul.
Betul fireworks godown: त्योहारों की रौनक के बीच बैतूल में पटाखों का काला कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। शहर के कई इलाकों में खुले दुकानों से नहीं, बल्कि गुप्त गोदामों से पटाखों की सीधी बिक्री हो रही है। न कोई बिल, न तय रेट, बस “कैश दो और माल लो” का खेल चल रहा है। ये पूरा कारोबार न केवल सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी टैक्स चोरी और कानून की सीधी अवहेलना भी है।

Betul fireworks godown: गोदाम बने बारूद के ढेर
सूत्रों के अनुसार, शहर के कुछ प्रमुख इलाकों में बने गोदामों में बिना किसी लाइसेंस और सुरक्षा मानक के भारी मात्रा में पटाखों का भंडारण किया गया है। यह भंडारण न केवल खतरनाक है, बल्कि आसपास के घरों और दुकानों के लिए भी आग का खतरा बन चुका है।
Betul fireworks godown: जेब पर वार
जहां एक ओर दुकानदारों को तय रेट और बिल देने की जिम्मेदारी होती है, वहीं ये गोदाम वाले रेट अपनी मर्जी से तय कर रहे हैं। 100 रुपये का सामान 200 में बेचा जा रहा है और कोई बिल नहीं दिया जा रहा। यानी न ग्राहक को गारंटी, न सरकार को टैक्स। पूरे लेन-देन का कोई रिकॉर्ड नहीं सिर्फ काले धन का खेल चल रहा है।

Betul fireworks godown: कानून की धज्जियां
Explosives Rules, 2008 और Indian Explosives Act, 1884 के तहत बिना अनुमति पटाखों का भंडारण और बिक्री गंभीर अपराध है। नियमों के अनुसार:
- किसी भी विक्रेता को गोदाम से बिक्री की अनुमति नहीं होती।
- सार्वजनिक स्थान पर बिना सुरक्षा उपकरण के भंडारण पर सख्त रोक है।
- हर विक्रेता को बिल देना अनिवार्य है।
लेकिन बैतूल में नियमों की जगह मुनाफे का मनमाना कानून चल रहा है।
Betul fireworks godown: प्रशासन की चुप्पी या मिलीभगत?
सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब बिना लाइसेंस के गोदामों में पटाखे बिक रहे हैं, तो फायर ब्रिगेड, पुलिस और राजस्व विभाग आंखें क्यों मूंदे बैठे हैं? क्या उन्हें इस काले कारोबार की भनक नहीं, या फिर “मौन स्वीकृति” दे दी गई है?

Betul fireworks godown: जनता का सवाल
अगर कोई हादसा हुआ, तो जिम्मेदार कौन? गोदाम वाला, या वह विभाग जो कार्रवाई नहीं कर रहा?
बैतूल में रौशनी का त्योहार, अब मुनाफे के अंधेरे में डूबता जा रहा है। जहां रोशनी फैलनी थी, वहां काले कारोबार की चिंगारियाँ फूट रही हैं। अब वक्त है कि प्रशासन की नींद टूटे, वरना अगली खबर “त्योहार नहीं, हादसा” होगी।
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