Betul News : घरेलू हिंसा के मामले में पुरुष भी होते हैं पीड़ित
Betul News: Men are also victims in case of domestic violence
मेंस मेंटल हेल्थ पर आयोजित कार्यशाला में पुरुषों के हित में हुई चर्चा

Betul News : (बैतूल)। एसआईएफ बैतूल (सेव इंडियन फैमिली बैतूल ) द्वारा रविवार को नेहरू पार्क में मेंस मेंटल हेल्थ पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में एसआईएफ बैतूल संस्था द्वारा घरेलू हिंसा सहित अन्य न्यायिक मामलों में पीड़ित पुरुषों को मदद मुहैया कराने के उद्देश्य से विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
वहीं कार्यशाला में शामिल पीड़ित पुरुषों को संस्था द्वारा समझाइश दी गई कि किसी भी परिस्थिति में अपने आप को कोई नुकसान ना पहुंचाएं, मादक पदार्थों से बचे, किसी भी समस्या के लिए एसआईएफ संस्था द्वारा हेल्पलाइन नंबर 8882498498 जारी किया गया है। संस्था से हर संभव मदद करने के लिए तत्पर है।
संस्था के डॉ संदीप गोहे ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि घरेलू हिंसा या फिर महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा को लेकर न सिर्फ अक्सर बातें होती हैं बल्कि कठोर कानून भी बने हैं, बावजूद इसके इनमें कोई कमी नहीं दिखती, लेकिन इस घरेलू हिंसा का एक पक्ष यह भी है कि घरेलू हिंसा के पीड़ितों में महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी हैं लेकिन उनकी आवाज इतनी धीमी है कि वह न तो समाज को और न ही कानून को सुनाई पड़ती है।
पारिवारिक मसलों को सुलझाने के मकसद से चलाए जा रहे तमाम परामर्श केंद्रों की मानें तो घरेलू हिंसा से संबंधित शिकायतों में करीब चालीस फीसद शिकायतें पुरुषों से संबंधित होती हैं यानी इनमें पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार होते हैं और उत्पीड़न करने वाली महिलाएं होती हैं।
सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि भारत में नब्बे फीसद से ज्यादा पति तीन साल की रिलेशनशिप में कम से कम एक बार घरेलू हिंसा का सामना कर चुके होते हैं। पुरुषों ने जब इस तरह की शिकायतें पुलिस में या फिर किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर करनी चाही तो तो उसे इंसाफ नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि हमारी संस्था महिला विरोधी नहीं है। उन्होंने बताया मेंस मेंटल हेल्थ पर कभी कोई बात व ध्यान नहीं देता है, महिलाएं, बच्चे, जानवर, पर्यावरण, पेड़ पौधे सभी के बारे में बाते होती है, लेकिन पुरुषों के मेंटल हेल्थ के बारे में कभी कोई विचार नहीं करता। अधिकांश मामलों में पुरुष प्रताड़ित होते हैं महिलाओं द्वारा कानून का दुरुपयोग कर पुरुषों को झूठे आरोपों में फंसा दिया जाता है। इसलिए संस्था ऐसे पुरुषों की मदद के लिए कम कर रही है।
पुरुष आयोग बनाने की मांग
एसआईएफ संस्था ने यह मांग उठाई है कि राष्ट्रीय महिला आयोग की तर्ज पर राष्ट्रीय पुरुष आयोग जैसी भी एक संवैधानिक संस्था बननी चाहिए। महिला प्रताड़ित कई पुरुष मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं, लेकिन कानून के एकतरफा रुख और समाज में हंसी के डर से वे खुद के ऊपर होने वाले घरेलू अत्याचारों के खिलाफ आवाज नहीं उठा रहे हैं। संस्था उन पीड़ित पुरुष जो किसी न किसी रूप में महिलाओं से प्रताड़ित हैं और झूठे केस में फंस गये है या कोई महिला उन्हें झूठे केस में फ़साने की धमकी दे रही हो उनकी मानसिक और कानूनी रूप से मदद करती है।



