Betul Samachar : स्कूल शिक्षा विभाग में उच्च पद के प्रभार में विसंगतियों का अंबार
Betul Samachar: Piles of discrepancies in charge of higher posts in School Education Department
वरिष्ठ पदों के प्रभार में फिर सामने आई गड़बडी, शिक्षकों में रोष

Betul Samachar : (बैतूल)। स्कूल शिक्षा विभाग में वरिष्ठ पदों के प्रभार में फिर गड़बडी सामने आई है। वरिष्ठ पदों का प्रभार ऊपरी पद पर दिया जाता है। विभाग में प्रधानाध्यापक व उच्च श्रेणी शिक्षक को ऊपरी पद व्याख्याता व हाईस्कूल प्राचार्य का प्रभार मिलता है और व्याख्याता का प्रभार व सीधे हाईस्कूल प्राचार्य बनाया जा रहा है।इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने निर्देश जारी कर दिए हैं और काउंसलिंग होकर प्रभार भी दिया जा चुका है।
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शिक्षक संघ का कहना है कि प्रधानाध्यापक माध्यमिक विद्यालय को व्याख्याता का भी उच्च पद प्रभार दिया गया है और बहुत से प्रधान पाठक को हाईस्कूल प्राचार्य भी बनाया गया यह भी एक विसंगति पूर्ण पदनाम है।हाईस्कूल प्राचार्य के पद रिक्त होने से व्याख्याता संवर्ग में उच्च पद का प्रभार प्राप्त प्रधानाध्यापक माध्यमिक विद्यालय को हाईस्कूल प्राचार्य के उच्च पद का प्रभार दिया जाना है।
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विभाग में करीब छह महीने से चल रही उच्च पद के प्रभार में विसंगतियां सामने आने लगी है। विभाग में करीब छह महीने से उच्च पद के प्रभार की प्रक्रिया चल रही है। नियमों को तोड़कर की जा रही प्रभार की प्रक्रिया में शिक्षक परेशान है। शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष व प्रदेश महामंत्री नारायण सिंह नगदे का कहना है कि उच्च पद के प्रभार की छह महीने से प्रक्रिया चल रही है।
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इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय(डीपीआइ) से जो सूचियां जारी की जा रही है। उसमें अनेक प्रकार की विसंगतियां है। 30 से 35 वर्षों की सेवा उपरांत एक भी प्रमोशन पदनाम नहीं मिला ऐसे हजारों सीनियर शिक्षक के नाम छूट गए है। लोक शिक्षण के अधिकारी भी कोई एक तरह की नीति नही बना पाए है। एक ही संवर्ग में दोहरी नीति चल रही है। कुछ लोगों को बिना काउंसलिंग के उच्च पद का प्रभार दे दिया गया।
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किसी पद को जम्प करवाकर उच्च पद दे दिया है, किसी संवर्ग को इस पद से वंचित कर दिया। हाईस्कूल प्राचार्य के उच्च पद पर व्याख्याता, प्राधानाध्यापक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक को उच्च पद देने की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षा विभाग के पोर्टल पर जितने पद दिखाई दे रहे है। उतने पद ऑफलाईन सूची में उपलब्ध ही नहीं है।
अब ऐसी स्थिति में जो शिक्षक काउंसलिंग के लिए आ रहे है वे बार-बार यही तर्क कर रहे है कि पोर्टल पर ऑनलाईन पद दिखाई तो दे रहे है फिर उच्च पद प्रभार कम पदों पर क्यों दिया जा रहा है? जबकि विभाग को चाहिए था कि पहले पदों की स्थिति का सही आंकलन करता फिर उच्च पद प्रभार देता, लेकिन ऐसा न कर शिक्षकों को उच्च पद प्रभार काउंसलिंग में बुलाया जा रहा है, जिससे विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है।
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बताया गया कि पोर्टल पर जो ऑनलाईन पदों की सूची है वह ट्रांसफर्म पोस्टिंग के समय उपयोग की गई सूची है और जो उच्च पद का प्रभार दिया जा रहा है वह ऑफलाईन सूची से दिया जा रहा है और इससे तमाम विवाद खड़ा हो रहा है। बताया जा रहा है कि इसमें सीधी भर्ती वाले और खाली पद दोनों स्थिति में उच्च पद प्रभार दिया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि 1998 की स्थिति के आधार पर पदों का आंकलन कर उच्च पद प्रभार दिया जाता तो यह स्थिति निर्मित नहीं होती, शासन द्वारा सभी 30 से 35 वर्षों की सेवा अवधि व रिटायरमेंट के करीब समस्त सहायक शिक्षकों को उच्च पद प्रभार की काउंसलिंग में सम्मिलित किया जाना था। विशेषकर सामाजिक व हिन्दी विषय के लगभग शिक्षक उच्च प्रभार पदनाम से वंचित रह गए जबकि उनसे कनिष्ठ से कनिष्ठ शिक्षकों को पदनाम प्रभार दिया गया उससे पहले इन शिक्षकों को भी पदनाम दिया जाना चाहिए क्योंकि अधिकांश विद्यालयों में अतिथि शिक्षक से अध्यापन कराया जा रहा है।
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ये सभी शिक्षक पदनाम से भी वंचित हो रहे हैं और अपने आपको सहायक शिक्षक होना ही सबसे बड़ा पाप समझ कर बिना पद लिए वापस हो रहे हैं इसलिए यह तमाम स्थितियां सामने आ रही है। इस।मामले में जिला शिक्षा अधिकारी भी स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहे है, इसकी वजह से भी असंतोष बढ़ रहा है और लोगों को शंका है कि इसमें अधिकांश पदो को छिपाया जा रहा है।
समय रहते विभाग द्वारा इन विसंगतियों को सुधार कर पुनः उच्च प्रभार पदनाम दिया जाए जिसको लेकर संघ के नारायण सिंह नगदे जिलाध्यक्ष व प्रदेश महामंत्री शिक्षक संघ के साथ रघुवर प्रसाद सोनी, एमएल कोकाटे, सूर्यवंशी, अनेकराव गायकवाड़, राजेन्द्र सूर्यवंशी, नरेन्द्र मालवीय ने उच्चतर प्रभार का पद नाम दिए जाने की मांग की है।
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