Bhopal Court News: रील्स बनाना शौक या तलाक की वजह?
Bhopal Court News: Making reels a hobby or reason for divorce?
Bhopal Court News: आज के डिजिटल युग में इंटरनेट मीडिया का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। जहां यह प्लेटफ़ॉर्म कई लोगों के लिए मनोरंजन और रचनात्मकता का साधन है, वहीं कुछ के लिए यह दांपत्य जीवन में तनाव और विवाद की भी वजह बन रहा है। भोपाल के कुटुंब न्यायालय में तलाक के मामलों की बढ़ती संख्या ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है।

Bhopal Court News: तलाक के मामलों में रील्स का बड़ा योगदान
कुटुंब न्यायालय के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 20 नवंबर 2024 के बीच तलाक के कुल 3,349 मामलों में से 2,009 (लगभग 60%) में मोबाइल और रील्स बनाने की लत को विवाद का कारण बताया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि रील्स का नशा सिर्फ समय की बर्बादी नहीं कर रहा, बल्कि परिवारों को भी तोड़ रहा है।
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Bhopal Court News: केस स्टडीज से बढ़ती कलह की तस्वीर
– केस 1: एक महिला ने पति पर आरोप लगाया कि वह उसे खर्चा नहीं देते और रील्स बनाने से रोकते हैं। दूसरी तरफ, पति का कहना था कि पत्नी ने उन्हें सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया है।
– केस 2: एक सरकारी अधिकारी ने शिकायत की कि उसकी पत्नी रील्स बनाने में इतनी व्यस्त रहती है कि बच्चे की पढ़ाई और घर के सभी काम प्रभावित हो रहे हैं।
– केस 3: सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति ने आरोप लगाया कि पत्नी रील्स बनाने के लिए खर्च बढ़ा रही है और उनके रिश्ते पर ध्यान नहीं दे रही।
– केस 4: एक पत्नी ने पति पर आरोप लगाया कि वह सहकर्मी के साथ रील्स बनाते हैं, जो उनके लिए अस्वीकार्य था।
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Bhopal Court News: रील बन रही समस्या की जड़
विशेषज्ञों का कहना है कि रील्स (Reels) बनाने की लत एक तरह का नशा बन चुकी है, जहां लोग वर्चुअल पहचान के लिए अपने वास्तविक रिश्तों की बलि दे रहे हैं।

इनका कहना है :
आजकल घर टूटने के 60 प्रतिशत मामले मोबाइल की लत और इंटरनेट मीडिया पर रील्स बनाने की वजह से आ रहे हैं। कई ऐसे मामले आए हैं, जिसमें बहुत बार समझाने के बाद भी रील का नशा नहीं छूट रहा है। ऐसे मामलों में समझौता कराकर रिश्ते को बचाने की कोशिश की जा रही है।
– शैल अवस्थी, काउंसलर, कुटुंब न्यायालय, भोपाल
Bhopal Court News: रील्स और इंटरनेट मीडिया जहां लोगों के लिए रचनात्मक (Creative) अभिव्यक्ति का माध्यम हो सकते हैं, वहीं इसका अत्यधिक उपयोग रिश्तों में दरार डाल रहा है। जरूरत है कि लोग डिजिटल दुनिया और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन बनाएं ताकि उनके निजी रिश्ते और भी ज्यादा सुरक्षित रह सकें।
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