MP BJP President 2025: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की तलाश अंतिम दौर में, क्या आदिवासी बनेगा नया चेहरा?
MP BJP President 2025: The search for BJP state president is in the final stage, will a tribal become the new face?
MP BJP President 2025: मध्यप्रदेश की सियासत में लंबे समय से जो हलचल चल रही थी, अब उसका पटाक्षेप होने जा रहा है। पिछले छह महीनों से भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है, लेकिन जुलाई माह के पहले सप्ताह में इस अटकलबाज़ी पर पूर्ण विराम लग जाएगा।

पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा नियुक्त मध्यप्रदेश के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान अब चुनाव अधिकारी की भूमिका में 2 जुलाई को भोपाल पहुंचने वाले हैं, इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो जाएगी। बता दे कि इस बार संघ और संगठन मिलकर एक ऐसा नाम सामने लाने की तैयारी में हैं, जो सबको चौंका सकता है।
MP BJP President 2025: क्या आदिवासी चेहरे पर लगेगी मोहर?
भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रपति पद पर द्रौपदी मुर्मु को बैठाकर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वह आदिवासी समाज को भी सम्मान देती है। और अब यह भी माना जा रहा है कि मध्यप्रदेश में बीजेपी आदिवासी वोट बैंक को और मजबूत करने के लिए नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में आदिवासी चेहरे को प्राथमिकता देने पर विचार कर रही है। इसी कड़ी में बैतूल सांसद और केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके, खरगोन सांसद गजेन्द्र पटेल, मंडला के वरिष्ठ नेता फग्गन सिंह कुलस्ते और राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी जैसे नामों पर गंभीरता से मंथन चल रहा है।

MP BJP President 2025: महिला भी हो सकती है प्रदेश अध्यक्ष
ऐसा भी सुनने में आ रहा है कि इस बार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए महिला चेहरों पर भी मंथन कर रही है, भाजपा ने कई अनुभवी और प्रभावशाली महिला नामों पर विचार कर सकती है। चर्चाओं में पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस, राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार और बालाघाट सांसद लता वानखेड़े प्रमुखता से शामिल हैं। साथ ही, आदिवासी महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करने के संकेत के रूप में सावित्री ठाकुर का नाम भी संभावित दावेदारों में देखा जा रहा है। महिला वर्ग को साधने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दृष्टि से पार्टी यह बड़ा कदम उठा सकती है।

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MP BJP President 2025: आदिवासी वोट बैंक की वापसी की कोशिश में भाजपा
भाजपा इस बार प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आदिवासी चेहरे को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है, और इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक गणित छिपा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में अधिकांश आदिवासी सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था, और पार्टी सिर्फ दो सीटों पर ही बढ़त बना पाई थी। ऐसे में आदिवासी वोट बैंक को फिर से साधने के लिए भाजपा नेतृत्व अब संगठनात्मक संतुलन के जरिए भरोसा जीतने की कोशिश में है।
साथ ही कांग्रेस भी राहुल गांधी के निर्देश पर आदिवासी समुदाय को जिला अध्यक्षों में शामिल कर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।

MP BJP President 2025: संघ की रणनीति, चुप्पी में छिपा बड़ा फैसला
संघ भारतीय राजनीति का वह मौन रणनीतिकार है जो मंच पर कम, पर मंच के पीछे सबसे अधिक सक्रिय रहता है। संगठनात्मक मजबूती, अनुशासन और विचारधारा की स्पष्टता ही संघ की पहचान रही है। मध्यप्रदेश को संघ ने हमेशा अपनी प्रयोगशाला की तरह देखा है, जहां नए नेतृत्व, नीति और सामाजिक संतुलन के प्रयोग किए जाते हैं और बता दे कि संघ के अधिकांश प्रयोग सफल भी हुए हैं। संघ के निर्णय अक्सर परदे के पीछे तय होते हैं, लेकिन उनके असर से पूरे प्रदेश की सियासी दिशा बदल जाती है।

इस बार भी प्रदेश अध्यक्ष के चयन में संघ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, और पार्टी के भीतरू हलकों में यह माना जा रहा है कि अंतिम निर्णय संघ की सहमति के बिना नहीं होगा।
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