बैतूल

National Defense Mission : शहडोल की मिट्टी से बनी स्वदेशी राखियां लेकर भारत चीन बार्डर जाएगा राष्ट्र रक्षा मिशन

National Defense Mission :National Defense Mission will go to India-China border with indigenous rakhis made from soil of Shahdol

जवानों की कलाई पर बंधेगी नारायणी मधुश्री के द्वारा बनाई गई 221 राखियां

National Defense Mission : (बैतूल)। सेना के प्रति समर्पण का भाव हर भारतीय में देखने मिलता है, बस कोई जाहिर कर पाता है तो कोई चुप रह जाता है। जब सडक़ पर आर्मी के ट्रक और पटरियों पर सेना के जवानों से भरी ट्रेनें दौड़ती नजर आती है तो हर देखने वाले का दिल जय हिन्द या जय जवान कह उठता है।

सेना के काफिलों का नागरिक हाथ लहराकर अभिवादन करते है। यह सभी वह वाकये है जो देश के जवानों को ऊर्जा और अपनत्व देते है। कारगिल विजय के बाद से जिले से देश अंतराष्ट्रीय सरहदों पर रक्षाबंधन मनाने के लिए प्रतिवर्ष बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति का राष्ट्र रक्षा मिशन पहुंच रहा है।

हर वर्ष सैनिकों के लिए देशवासियों के लिए कुछ खास भेंट इस काफिले के पास होती है। इस बार शहडोल से 221 राखियां बैतूल पहुंंच रही है। इन राखियों मिट्टी को आकर्षक स्वरुप देकर बनाई गई है। एक बहन की आत्मीयता और स्नेह को उसी के द्वारा बनाई गई मिट्टी से बनी राखियों के माध्यम से फौजियों की कलाई पर राष्ट्र रक्षा मिशन-2023 के दल में शामिल सदस्यों द्वारा बांधा जाएगा।

ऐसे राष्ट्र रक्षा मिशन से जुड़ी मधुश्री (National Defense Mission)

मधुश्री शहडोल ही नहीं पूरे प्रदेश के लिए परिचित नाम है। स्वयं दिव्यांग होने के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी अपितु सैकड़ों दिव्यांग बच्चों के लिए प्रेरणा बनी। स्वयं स्वरोजगार के गुर सीखे और सैकड़ों दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य भी किया।

वर्ष 2018 में मधुश्री को उनके द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हस्ते नारायणी पुरस्कार से नवाजा गया। इसी कार्यक्रम में सरहदों पर रक्षा बंधन मनाने वाली बैतूल की बेटी एवं सोल्जर्स सिस्टर गौरी बालापुरे पदम को भी सम्मानित किया गया। श्रीमती पदम के सैनिकों की हौसलाअफजाई के लिए चलाएं जा रहे अभियान से मधु श्री प्रभावित हुई और वे भी राष्ट्र रक्षा मिशन से दिली तौर पर जुड़ गई।

दूसरी बार सरहद पर जाएगी मधुश्री की भेंट (National Defense Mission)

मधुश्री राय ने बड़ी मेहनत से सैनिक भाईयों के लिए राखियां बनाई है। करीब एक महीने की मेहनत से यह राखियां तैयार की गई है। राखियों के निर्माण के लिए उन्होंने तिरंगे के रंगों के रिबन, डोरी, मौली का प्रयोग किया है।

राखी को आकर्षक बनाने मिट्टी, गोबर पावडर और प्रीमिक्स को मिलाकर गूथने के बाद अलग-अलग डिजाईन के फुल एवं पत्ते बनाकर उन्हें डोरी के साथ अटैच किया है। मधुश्री ने बताया कि इस बार चाईना बार्डर पर इको फे्रण्डली राखियां उनके द्वारा भेजी जा रही है। इसके पहले भी मधुश्री राष्ट्र रक्षा मिशन के माध्यम से 100 राखियां भुज-कच्छ भारत पाक सीमा पर भेज चुकी है।

Sagar Karkare

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