Betul Basement Issue: उम्मीद थी इस बार बेसमेंट पर कोई “सेटलमेंट” नही होगा। वे पूरी तरह पार्किंग के लिए मुक्त किये जायेंगे। इन्ही बेसमेंट में शहर के बेतरतीब ट्रेफ़िक व पार्किंग की विकराल समस्या का समाधान छुपा हुआ हैं लेकिन ये ही बेसमेंट सरकारी भ्रष्टाचार के कारण छुपे हुए हैं। सरकारी महकमो की परस्पर मिलीभगत का नतीज़ा दिल्ली ने 05 माह पहले भुगता हैं। क्या बैतूल भी उस दिन का इंतजार कर रहा है जब उसके माथे पर दिल्ली जैसा कलंक लगे? नही न, तो फिर बेसमेंट को लेकर कलेक्टर महोदय के आदेश का पालन हर हाल में होना चाहिए था । शहर हित की इस मुहिम को इस बार कोई दबाव-प्रभाव प्रभावित न कर पाए ऐसा विश्वास था ।

Betul Basement Issue: इनकी भी है जिम्मेदारी
इसकी जिम्मेदारी कलेक्टर के साथ साथ डॉ मोहन यादव सरकार, नगरीय प्रशासन मंत्री व बैतूल नगर पालिका अध्यक्ष की भी बनती है। जनता की नजर चुने हुए जनप्रतिनिधियों पर भी थी जिनकी शह पर बेसमेंट पार्किंग की जगह कमाई का जरिया बने हुए हैं। बैतूल में ही ये चलन कमर्शियल इलाको में स्थापित हुआ है कि नई इमारत बनी नही कि उसके बेसमेंट पहले तैयार होकर कमर्शियल उपयोग के लिए बिक जाता हैं। क्योंकि जिम्मेदार बिक जाते है। जनता जाए भाड़ में और शहर रोता रहे पार्किंग ट्रेफ़िक के नाम पर। बिकने वालो की तो बैतूल में पो-बारह ही है…अरसे से, बरसो से।
Betul Basement Issue: ऐसा था आदेश
सावधान, अगर नक्शे में पार्किंग है तो बेसमेंट का उपयोग सिर्फ पार्किंग के लिए ही होगा। अगर बेसमेंट में पार्किंग की जगह का उपयोग व्यावसायिक कामकाज के लिए हो रहा है तो खबरदार..!! एक महीने में बेसमेंट से हटा दे दुकान, दफ्तर, कारखाने.. अन्यथा वैधानिक कार्रवाही की जावेगी । ऐसा आदेश दिया था!
ये चेतावनी मुख्य नगर पालिका की थी और इस बार भी यह सिर्फ काग़ज़ी बन कर रह गई! इस वार्निंग को हकीकत का अमलीजामा भी पहनाया गया । हर हाल में वे बेसमेंट मुक्त किये जाने थे , जहाँ होना तो पार्किंग थी लेकिन आफिस, दुकानें बनाकर कमाई की जा रही हैं। बैतूल इस समस्या से बरसो बरस से जूझ रहा हैं।

ये शहर सुगम यातायात व सहज पार्किंग के लिए नीत नए प्रयोग कर रहा है लेकिन समस्या की जड़ की तरफ ध्यान किसी का नही। भारी तोड़फोड़ कर सड़कें, बाजार चौड़े करने के बाद भी वाहनों के पार्किंग व सुगम ट्रेफ़िक की समस्या जस की तस बनी हुई है।
Betul Basement Issue: उदाहरण मध्य शहर के उस हिस्से से जांचा जा सकता है गंज क्षेत्र में जबरदस्त तोड़फोड़ की गई थीं। सिर्फ इसलिए कि मध्य शहर का यातायात सुधरे और पार्किंग की समस्या से निज़ात मिले। लेकिन हाल फिर बेहाल है और चोड़ी सड़को का आधा हिस्सा वाहनों के पार्किंग के ही काम आ रहा है और आधे में दुकानदारो का अतिक्रमण विद्यमान है। ट्रेफ़िक अब भी वैसे ही संकरे हिस्से में रेंग रहा है, जैसा स्मार्ट सिटी के नाम पर हुई तोड़फोड़ के पहले रेंगता था।
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Betul Basement Issue: मिलीभगत की करतूत
दिल्ली की घटना ने जिम्मेदारों को झकझोर कर जगा दिया था । नपा ने नोटिस भी चस्पा किये कई इमारतों की जांच हुई है, जहां तलघर का उपयोग व्यावसायिक हो रहा था । फिर स्थित जस की तस है।ये बीमारी गंज क्षेत्र में ही नही अपितु कोठी बाजार के आदि हिस्सो में ही नही, समूचे शहर में एक समान है। सीमेंट रोड, लिंक रोड, इटारसी रोड, बडोरा क्षेत्र ग्रामीण आदि। शहर का ऐसा कोई हिस्सा नही जहां बिल्डर ने सरकारी कारिंदों और महकमो से मिलीभगत कर बेसमेंट का उपयोग कमाई के लिए करवा लिया।
Betul Basement Issue: मध्य शहर के बाजार वाहन पार्किंग औऱ ट्रेफ़िक का रोना आये दिन रो रहे है लेकिन समस्या का समाधान तो उनके इलाके की उन इमारतों में ही है जहां नए निर्माण के साथ दर्जन, दो तीन दर्जन दुकानों के साथ नई बिल्डिंग तो अस्तित्व में आ गई लेकिन इन दुकानों की पार्किंग सड़क पर आ गई। अब कितनी ही बार बाजारो के दौरे कर लो, समस्या सुलझनी ही नही है और न इतनी जगह कही है कि अलग से पार्किंग बन सके। इसके लिए उन इमारतों के बेसमेंट पार्किंग के लिए मुक्त करना ही होंगे, जहां दुकानें बना दी गई है।
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Betul Basement Issue: बैतूल को कोई उम्मीद नही प्रशासन से , हर बार गरीबो पर वार
नगर पालिका की इस जनहित मुहिम में जनप्रतिनिधियों का साथ बेहद जरूरी है। आवासीय भवन के व्यवसायिक निर्माण की अनुमति नगर पालिका देता है। आवासीय का व्यवसायिक उपयोग की अनुमति भी नगर पालिका देता है। भवन निर्माण के नक्शे नगर पालिका देता है और दुकान के लाइसेंस भी नगर पालिका ही देता है। टेक्स भी वसूलता है। इस बार नपा के लिए भी ट्रेफ़िक बड़ा मुद्दा है। जनप्रतिनिधियों को ये मसला प्राथमिकता में नहीं आया। ऐसे में इस बार जनप्रतिनिधियों व नगर पालिका को मिलकर बेसमेंट मुक्ति अभियान को शिद्दत से अंजाम देना होगा।

Betul Basement Issue: अन्यथा इस शहर में बेसमेंट में से कमर्शियल कामकाज हटाने के पहले भी अभियान चले है लेकिन इसी शहर में बेसमेंट पर सेटलमेंट होते भी हर बार देखे है। गंज इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। लिहाजा इस बार ये बैतूल उम्मीद करता है अपने जिलाधीश व जनप्रतिनिधियों से कि वह इस भागीरथी संकल्प को आधा अधूरा न छोड़ेंगे।
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