Jhabua medical negligence: दर्द की दवा के नाम पर मिली ज़हर की गोली, महिला की मौत
Jhabua medical negligence: Poison pill given in the name of painkiller, woman dies
Jhabua medical negligence: दवाओं की दुकान अब भरोसे की नहीं, खतरे की जगह बनती जा रही है। झाबुआ ज़िले के एक मेडिकल स्टोर पर ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक महिला को दांत दर्द की दवा के नाम पर सल्फास जैसी ज़हरीली गोली दे दी गई। गोली खाते ही महिला की तबीयत बिगड़ी और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।

Jhabua medical negligence: मेडिकल स्टोर की चूक से गई एक ज़िंदगी
जानकारी के अनुसार, रेखा सिंगाड़ (28 वर्ष), निवासी ग्राम धरमपुरी, अपने पति पिंजू और भांजे के साथ झाबुआ मुख्य बाज़ार के इंडिया मेडिकल स्टोर पर दवा लेने पहुंची थी। दांत दर्द की शिकायत पर मेडिकल संचालक मनोज बाबेल ने अपनी दुकान पर काम कर रही देवकन्या परमार को दवा देने को कहा।
देवकन्या ने महिला को जो गोली दी, वह दांत दर्द की दवा नहीं बल्कि गेहूं में रखने वाली ज़हरीली सल्फास की गोली थी। महिला ने घर जाकर आधी गोली खाई, जिसके बाद वह गिर पड़ी और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।
Jhabua medical negligence: अस्पताल पहुंचते-पहुंचते गई जान
रेखा को उसके पति पिंजू जिला अस्पताल लेकर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सन्नाटा और आक्रोश का माहौल बन गया है।
Jhabua medical negligence: FIR और गिरफ्तारी
पुलिस ने मेडिकल स्टोर संचालक मनोज बाबेल और महिला कर्मचारी देवकन्या परमार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धाराओं में मामला दर्ज किया है। मनोज को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दुकान को ड्रग इंस्पेक्टर ने सील कर दिया है और CCTV फुटेज जब्त कर लिए गए हैं।

Jhabua medical negligence: तीन लापरवाहियाँ बनीं मौत की वजह
- 1. सल्फास जैसी ज़हरीली गोली को आम दवाओं के साथ रखा गया।
- 2. बिना डॉक्टर की पर्ची के मरीज को दवा देना – गंभीर नियम उल्लंघन।
- 3. बिना डिग्री के कर्मचारी को दवा देने की ज़िम्मेदारी देना।
Jhabua medical negligence: परिजनों का गुस्सा, पुलिस अलर्ट
मृतक महिला के परिजन मेडिकल स्टोर पर प्रदर्शन के लिए पहुंच गए। पुलिस ने स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया। जयस जिलाध्यक्ष और परिजन कोतवाली पहुंचे, जहां थाना प्रभारी ने समझाइश देकर स्थिति शांत की।

Jhabua medical negligence: यथार्थ का प्रश्न:
- > जब एक मेडिकल स्टोर भी सुरक्षित नहीं, तो आम जनता कहां जाए?
- > क्या सिर्फ प्रकरण दर्ज कर देने से जिम्मेदारियां खत्म हो जाती हैं?
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यथार्थ योद्धा इस मामले की पूरी जांच की मांग करता है और सवाल उठाता है —
> ज़िंदगी से खिलवाड़ करने वालों को क्या सख़्त सज़ा मिलेगी?
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