Betul BJP Election: ‘कमलदल’ का वहीं पुराना सरदार बबला होगा!
Betul BJP Election: Babla must be the same old leader of Kamal Dal!
Betul BJP Election: रायशुमारी के नाम पर बैतूल के साथ छल, कपट व षड़यंत्र अरसे से हो रहा हैं। जिलाध्यक्ष को लेकर रायशुमारी का डंका भाजपा में बजा है। अब देखना ये है कि बैतूल भाजपा को उसका हक मिलेगा या बड़े नेताओ की मर्जी के नाम पर तथाकथित व्यक्ति से मुहर लगेगी औऱ रायशुमारी एक बार फिर महज एक नाटक साबित होगी? या फिर पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं का मन बहलाने का साधन मात्र?
Betul BJP Election: अब तक रायशुमारी तो बस ढोंग रही!
कमलदल यानी भाजपा का नया अध्यक्ष अब कभी भी प्रकट हो सकता हैं। इसकी कवायद शुरू हो रही हैं। इसमें पार्टी नेताओं से आज वन टू वन चर्चा की जाएगी। इस प्रक्रिया को रायशुमारी नाम दिया गया हैं। यानी सबकी सहमति और बहुमत से नेता का चयन हो। हालांकि बैतूल भाजपा के लिए पूर्व के अनुभव रायशुमारी को लेकर बेहद कड़वे रहें हैं। रायशुमारी में यहां जिस नेता के नाम सर्वानुमति रही, उसे पद नही मिला या दिया ही नही गया। इसकी जगह तथाकथित नेता अपनी पसन्द का अध्यक्ष, बैतूल पर थोप दिया। इसमे सत्ता से जुड़े नेता शामिल रहे।

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Betul BJP Election: रायशुमारी ही नए सरदार की ताजपोशी का कारण बनेगी या बड़े नेता की पसंद
इस बार भी ऐसी नोबत न आय इसे लेकर बैतूल भाजपा के नेता एकजुट हैं। सबकी मंशा है कि बैतूल का फैसला, सर्वसम्मति से बैतूल में ही हो जाये। थोपा न जाये। राजधानी से इस मामले में ‘ जादू ‘ हो जाता हैं। वहां बैठे नेताओ का अपना हित आड़े आ जाता हैं। इस बार भी भाजपा के बड़े नेता का हित एक बार फिर जागृत हो गया है। ऐसे में ये देखना दिलचस्प रहेगा कि रायशुमारी ही कमलदल के नए सरदार की ताजपोशी का कारण बनेगी या बड़े नेता की पसंद, नापसंद को पूर्व की तरह तरज़ीह मिलेगी?

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Betul BJP Election : पुराना सरदार और राजनितिक हत्या
जिले की कमान फिर वहीं पुराने सरदार के पास रहेगी। यह चर्चा अब हर चौक चौराहे पर हो रही हैं। लेकिन इसमें यह भी कहा जा रहा हैं कि ऐसा हो गया तो कई वरिष्ठ नेताओं कि राजनितिक हत्या होना तय हैं। लेकिन एक तरफ देखा जाए तो भाजपा संगठन के कार्यकर्त्ता संगठन को सर्वोपरि मान कर कार्य करते हैं।

मैं नहीं तो कौन बे…! बबला नहीं तो कौन..?
हा वह बात अलग हैं कि अगर किसी नेता का स्वहित जाग्रत हो गया तो संगठन को भविष्य में नुकसान उठाना पड़ सकता हैं। फिलहाल पुराने सरदार को लाने कि जद्दोजहद एक तथाकथित नेता कर रहे हैं, हालांकि ऐसी मनमानी करने की इजाज़त तो भाजपा का संविधान भी नही देता लेक़िन इसी संविधान को पार्टी के ही बड़े नेता, अपना निजी हित साधने के लिए ताक पर रख देते हैं। दुःख की बात तो ये है कि इस काम मे वे ही नेता शामिल हो रहें हैं, जिनके जिम्मे संगठन के नियम कायदों के पालन करने-करवाने की अहम जिम्मेदारी हैं। अब संगठन के नेता ही इस काम मे गहरे तक लिप्त है।
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Betul BJP Election: मण्डल अध्यक्ष कि रायसुमारी में देखा ही है कि महीनों पहले से अपने अपने नेताओं के पांव में अध्यक्षी के घुंघरू बंधवा देते हैं कि ये भैया का खास पट्ठा है, ये ही बनेगा। इस बार नियम कायदे कड़े है और इस पर भोपाल दरबार की भी नज़र हैं। ऐसे में अब सारा दारोमदार बैतूल भाजपा से जुड़े नेताओ पर है कि वे गुटों में ही बटकर फिर एक बार बैतूल का फैसला भोपाल से करवाते है या घर का मामला घर यानी बैतूल में ही निपटाते हैं।
Betul BJP Election: बैतूल के मिजाज का नया नेता मिलेगा?
मतभेद से परे रहे तो बैतूल के मिजाज का नया नेता मिलेगा नही तो वैसे ही सबको मुंह लटकाकर पदभार ग्रहण करवाना होगा, जैसे भाजपा के मण्डल कार्यक्रम में सब मुंह लटकाए कुर्सी के पीछे खड़े थे, जैसे किसी की शोकसभा में खड़े हो।

Betul BJP Election: बाकि समाज क्या करेंगे
कुनबी समाज के बाद बैतूल कि राजनीति में पवार समाज अहम भूमिका निभाते आया हैं। क्योंकि बैतूल कि भाजपा में पवार समाज के नेता कई वर्षो से कार्य करते आ रहे हैं जो अपनी बारी आने कि रस्ता ताके हुए हैं। अगर इस बार भी नंबर नहीं लगा तो कई नेताओं को भाजपा कहाँ मैनेज करेंगी यह तो वक्त ही बताएगा।
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