Pradeepan Sanstha News: बचपन के नाम पर एनजीओ कर रहा बेइमानी
Pradeepan Sanstha News: NGO is doing dishonesty in the name of childhood
Pradeepan Sanstha News: जिले में बालश्रम के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई के नाम पर प्रदीपन संस्था ने 12 अगस्त को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह दावा किया कि श्रम विभाग और पुलिस की मदद से उन्होंने कार वॉश सेंटर और गैराज से 10 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू कराया है। सुनने में यह खबर जितनी ज़ोरदार लगी, हकीकत उतनी ही खोखली नज़र आ रही है।

Pradeepan Sanstha News: संस्था छुपा रही प्रतिष्ठान के नाम
जब इस मामले की तह तक जाने के लिए हमारी टीम ने प्रदीपन संस्था के PRO सुनील कुमार से संपर्क किया और संबंधित प्रतिष्ठानों की जानकारी मांगी, तो उनका जवाब था “हम आपको यह जानकारी नहीं दे सकते, मामला कोर्ट में है और जांच श्रम विभाग कर रहा है“।
यानी, ठोस सबूत या नाम सामने रखने में संस्था ने साफ हाथ खड़े कर दिए।
Pradeepan Sanstha News: पड़ताल में पता चला प्रदीपन वाले बोल रहे झूठ
अब बड़ा सवाल यह है कि जिस कार्रवाई में श्रम विभाग की सहभागिता का दावा किया गया, उस श्रम विभाग के अधिकारी धम्मदीप भगत का कहना है “मेरे संज्ञान में अभी तक यह मामला आया ही नहीं, अगर आता है तो जानकारी देता हूं”।
अधिकारी का यह कहना सीधे-सीधे संस्था की प्रेस विज्ञप्ति को कटघरे में खड़ा कर देता है।
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Pradeepan Sanstha News: संस्था के दावों पर उठ रहे सवाल
तीन दिन बाद भी अधिकारी के पास मामला नहीं और प्रेस विज्ञप्ति में लिखा है “श्रम विभाग के सहयोग से कार्रवाई” तो आखिर किस श्रम विभाग की बात हो रही थी? या फिर यह सिर्फ पब्लिसिटी का एक नुस्खा था?

बालश्रम जैसा गंभीर मुद्दा किसी की रोटी सेंकने का ज़रिया नहीं बनना चाहिए। अगर वाकई कार्रवाई हुई है तो नाम, जगह और तारीख सब सार्वजनिक होना चाहिए, वरना यह खबर “बचपन बचाने” से ज्यादा “सच छुपाने” का उदाहरण बन जाएगी।
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