Betul News: काजल की कोठरी में नया सेटलमेंट नया नहीं
Betul News: New settlement in Kajal's room is not new
Betul News: हमने अपने पिछले अंक में लिखा था कि ..उम्मीद थी इस बार बेसमेंट पर कोई ‘सेटलमेंट’ नहीं होगा। लेकिन यहां तो मामला ‘काजल की कोठरी में नया सेटलमेंट, नया नहीं’ वाली बात चरितार्थ हो रही है, मतलब ये तो सब चलता रहता है और चलता ही रहेगा। सरकार ने बेसमेंट को लेकर कई नियम जारी किए हैं, जैसे कि बेसमेंट के इस्तेमाल के लिए अनुमति लेना ज़रूरी है, बेसमेंट का इस्तेमाल व्यवसाय के लिए तय शर्तों पर ही किया जा सकता है, और बेसमेंट की खुदाई अवैध रूप से नहीं की जा सकती। 2012 में जारी संशोधित भूमि विकास अिधनियम की धारा 76 में बेसमेंट के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत गाइड लाइन दी गई हैं।

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इसके मुताबिक बेसमेंट का इस्तेमाल व्यवसायिक कार्यों के लिए सिर्फ कड़ी शर्तों के आधार पर ही किया जा सकता है। यह तभी संभव है, जबकि जिस जमीन पर यह बना है वह कम से कम एक हेक्टेयर क्षेत्रफल की हो। शहर में इतने इलाके में तो एक पूरी कालोनी ही बन जाती है। जिन इमारतों में बेसमेंट में दुकान या अन्य कारोबारी गतिविधियां चल रही हैं, वे बहुत छोटे भूखंड में बने है।
Betul News: 200 से ज्यादा है बेसमेंट
शहर में अनुमान के मुताबिक 200 से ज्यादा बेसमेंट हैं। इनमें से कई तो शहर के मुख्य मार्गों व बाजारों में हैं। कई बेसमेंट में तो बकायदा शॉपिंग कॉम्पलेक्स बन गए हैं। कानून के मुताबिक बेसमेंट का इस्तेमाल गोदाम के लिए भी नहीं हो सकता। अगर कोई इनमें गोदाम बनाना चाहता है तो उसे उन शर्तों का पालन करना होगा, जिनके आधीन बेसमेंट के कारोबारी इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है।

शहर की कई इमारतों के बेसमेंट में आफिस चल रहे हैं, वहीं पार्किंग की जगह न होने से इनके सामने रोजाना दर्जनों वाहन खड़े रहते है, जिनकी वजह से शहर के मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित होता है। मुख्य बाजार क्षेत्र में अनेक व्यापारियों ने दुकान के नीचे बेसमेंट बनाकर उसमें गोदाम बना रखे हैं। इधर नगरपालिका तो छोडिय़े इन हालातों को जिन जिम्मेदारों को देखना चाहिए वे तो इधर झांक भी नहीं रहे हैं, उनका तो फोकस प्रॉपर्टी, पद को लेकर ज्यादा है, खैर जो भी लेकिन इतना तो तय है कि इस शहर में जैसे कुछ ठीक होने वाला ही नहीं है…?
Betul News: नपा सीएमओ कहते हैं कि टीएनसीपी का मामला है
तो फिर मटसेनिया जी ये भी बता दीजिये आप क्या काम देखते हैं? आप टीएनसीपी को पत्र लिखकर हालात तो बता ही सकते हैं?
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इतना तो तय है कि किसी की अकाल मौत से नगरपालिका या नगरपालिका के कर्ताधर्ताओं को कोई फर्क नहीं पडऩे वाला है। दिल्ली बेसमेंट हादसे के बाद केवल नगरपालिका नोटिस-नोटिस खेल रही है, कार्रवाई के नाम पर बस मामला इधर से उधर ढोला जा रहा है।

हम बात कर रहे हैं शहर में धड़ल्ले से बेसमेंट में बैंक, पार्किंग, शॉपिंग मॉल, दुकानों का संचालन हो रहा है, जबकि बेसमेंट के लिए दिल्ली हादसे के बाद सख्त नियम कायदे खड़े कर दिए गए थे, लेकिन हमारे स्थानीय निकाय के आला अधिकारियों को इससे कोई लेना देना नहीं है, वे बस अपनी नौकरी बजा रहे हैं, हालांकि वे कर क्या रहे हैं ये ऑफ द रिकार्ड सब जानते हैं।
Betul News : जब यथार्थ योद्धा ने नगरपालिका सीएमओ सतीश मटसेनिया से सवाल किया कि नगर में धड़ल्ले से बेसमेंट का उपयोग कामर्शियल तरीके से किया जा रहा है उनका सीधा सा जवाब था कि यह मामला टीएनसीपी डिपार्टमेंट देखता है, यानी नगरपालिका क्षेत्र में निर्माण और उपयोग होगा, नोटिस भी नगरपालिका देगी, लेकिन मामले के पूरा अधिकार होने का ठीकरा टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग पर फोड़ दिया जाएगा क्योंकि कई लोगों को तो पता ही नहीं ये डिपार्टमेंट है कहां और इसका क्या-क्या काम है।
Betul News: क्या है दिल्ली बेसमेंट मामला
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में तीनों अभ्यर्थियों की मौत पानी में डूबने से हुई। हादसे के वक्त कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में करीब 35 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे थे। इस दौरान पानी के प्रेशर से बेसमेंट की सीढिय़ों पर लगे कांच का दरवाजा टूट गया और चंद मिनटों में वहां पानी भर गया।मामले के दोनों आरोपियों मालिक और सीईओ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
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Betul News : पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। इन्हीं धाराओं में बिल्डिंग मैनेजमेंट, ड्रेनेज सिस्टम का रखरखाव करने वाले नगर निगम कर्मियों और अन्य के विरुद्ध भी केस दर्ज किया गया था। कोचिंग सेंटर को सील कर दिया गया था। हादसे में मरने वाली एक छात्रा तान्या की पहचान उसी समय हो गई थी। वह मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद की रहने वाली थी।

उसके पिता तेलंगाना में इंजीनियर हैं। रविवार को दो अन्य की पहचान उत्तर प्रदेश के अंबेडकर की श्रेया यादव व केरल के एर्नाकुलम के नेविन डाल्विन के रूप में हुई। ये तीनों राजेंद्र नगर में ही अलग-अलग पीजी में रहते थे। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों छात्राओं के शव स्वजन को सौंप दिए गए थे। रूह कंपा देने वाले इस हादसे से लेकिन बैतूल में जिम्मेदारों पर कोई असर दिखाई नहीं देता।
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